दिल्ली को टीबी मुक्त करना है तो विश्व टीबी मुक्त हो!

दिल्ली को टीबी मुक्त करना है तो विश्व टीबी मुक्त हो!

कोप टीबी मुक्त करने का नारा लगाया नगर प्रमुख सुश्री आरती मेहरा ने। आरती जी दिल्ली मुनिसिपल कॉर्पोरेशन का गुलाब बाघ में एक टीबी जागरूकता शिविर को संबोधित कर रही थीं।

आरती जी ने खेद जताया कि तमाम प्रयास के बावजूद दिल्ली में ४०,००० से अधिक टीबी से ग्रसित लोग हैं। दिल्ली में ६०० से अधिक DOTS केनरा है। दोट्स यानी कि चिकित्सीय निरीक्षण में टीबी की दवा लेना। दोट्स एक सीमित सफलता प्राप्त कार्यक्राम रहा है खासकर कि उस टीबी में जिसपर दवा असर करती है। यदि ये दवा समय से या उचित मात्रा में न ली जाएँ तो दृग रेसिस्तांस की स्थिति उत्पन हो जाती है और ये दवा बेअसर हो जाती है। ऐसी स्थिति में बहुत कम दवा बचती हैं जो संभवत असर्दायक हों, पर इलाज लंबा है, कठिन है, और मुश्किल भी। अक्सर ऐसी टीबी जानलेवा भी हो सकती है। इसीलिए यदि ऐसी टीबी हो जिसपर दोट्स कि दवा कारगार है तो दवा समय से और उचित मात्रा में लेने पर विशेष ध्यान देना चाहिऐ।

आरती जी का ये नारा कि दिल्ली को टीबी मुक्त बनाना है, मगर गले नही उतर रहा। क्योकि टीबी एक संक्रामक रो है, जिसका नियंत्रण मुमकिन है पर सरल नही। एक शहर को टीबी मुक्त नही बनाया जा सकता। दुनिया का एक भी देश नही है जो अपने आप को टीबी मुक्त कह सके। इसीलिए २००७ के विश्व टीबी दिवस - २४ मार्च - को यहीविचार था कि 'यदि टीबी कही पर भी है, तो टीबी हर जगह है' - TB anywhere is TB everywhere

परन्तु शायद आरती जी को य याद न रह हो कि ९ माह पेहे विश्व टीबी दिवस पर उन जैसे उच्च स्तारिये नेताओं ने इसी विचार पर भाषण दिए थे।

आरती जी को याद था तम्बाकू नियंत्रण का नारा - दिल्ली को २००९ तक धुआं रहित बनने का नारा - Smoke-Free Delhi। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऐसे अभियान को समर्थन दिया है जो नगर को धुआं रहित बनने की योजना रखते है।

तम्बाकू नियंत्रण और टीबी नियंत्रण कार्यक्राम अलग अलग प्रकार के हैं। धुआं रहित नगर का नारा तो वास्तविक हो सकता है पर एक संक्रामक रोग मुक्त का नारा तब तक वास्तविक नही हो सकता जबतक उस संक्रमण को विश्व से मिटने की योजना सशक्त न हो।

हाल ही में विश्व बैंक की नयी रिपोर्ट - The Economic Benefit of Global Investments in Tuberculosis Control - यानी कि विश्व स्तर पर टीबी नियंत्रण में निवेश के आर्थिक लाभ को भी आरती जी और दिल्ली मीडिया भूल गयी। इसी महीने तो ये रिपोर्ट रेलेअसे हुई थी और लगभग सभी देशी विदेशी समाचार पत्रों में इस रिपोर्ट का जिक्र था। इस रिपोर्ट से साफ जाहिर है कि यदि भारत जैसे राज्य, जहाँ विश्व के १/३ टीबी रोगी है, ने 'ग्लोबल प्लान तो स्टॉप टीबी' - Global Plan to Stop TB - का समर्थन नही किया और इसमे निवेश नही किया तो टीबी कण्ट्रोल प्रभावकारी नही होगा और भारत को कही ज्यादा खर्चा करना पड़ेगा टीबी के विकराल चुनौती से निबटने के लिए।

दिल्ली को टीबी मुक्त बनाना है तो विश्व को टीबी मुक्त बनाना है। केवल एक घर, एक शहर, एक राज्य, एक देश, टीबी मुक्त अकेले नही हो सकता।

आरती जी ने दृग रेसिस्तंत टीबी से निबटने के लिए कोई ठोस योजना का जिक्र नही किया। ऐसा ही कुछ भारत के परिवार कल्याण और स्वास्थ्य मंत्री डाक्टर अम्बुमणि रामादोस ने भी किया था जब वी इसी महीने अखिल भारतीय टीबी संगोष्टि को संबोधित कर रहे थे। डाक्टर रामादोस ने भी दृग रेसिस्त्तंत टीबी से निबटने की कोई ठोस बात नही की थी और न ही ग्लोबल प्लान तो स्टॉप टीबी या विश्व बैंक की नयी रिपोर्ट का jikr किया। (पुरा समाचार यह पढे: recently)



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