टीबी की गिरावट दर को 1.5% से 5% बढ़ाने के लिये केवल 21 माह शेष

हालांकि भारत समेत 193 देशों की सरकारों ने 2030 तक टीबी उन्मूलन का वायदा तो सितम्बर 2015 की संयुक्त राष्ट्र महासभा में किया था, पर टीबी की जो वर्तमान वैश्विक गिरावट दर है, वह 2030 तक टीबी समाप्ति के लिये कदापि पर्याप्त नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन रिपोर्ट २०१८ के अनुसार, वैश्विक टीबी गिरावट दर अत्यंत शिथिलता के साथ बहुत कम बढ़ रही है। वर्तमान वैश्विक टीबी गिरावट दर 1.5% पर रेंग रही है। 2030 तक दुनिया से टीबी समाप्त करने के लिये 2020 तक टीबी गिरावट दर 5% और 2025 तक 10% हो जानी चाहिये।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एकजुट हुए अनेक चिकित्सक-विशेषज्ञ और महिला अधिकार-समानता कार्यकर्ता

[English] 100 साल से भी अधिक समय बीत गया है जब अमरीका में सोशलिस्ट पार्टी ने पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था जिसकी मुख्य मांग थीं: महिला समानता और चुनाव में वोट डालने का अधिकार. इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का केंद्रीय विचार है #BalanceForBetter, क्योंकि सरकारों द्वारा 2030 तक सतत विकास लक्ष्य का सपना और सबके लिए एक बेहतर दुनिया का सपना तभी मुमकिन है जब हर किस्म की लिंग-जनित असमानता समाप्त हो और हर इंसान बराबरी से सम्मानजनक ढंग से जीवन यापन कर सके.

जब एक-तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है तो यह जन-स्वास्थ्य प्राथमिकता क्यों नहीं?

[English] [वेबिनार रिकॉर्डिंग] [पॉडकास्ट] भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य है कि गैर-संक्रामक रोग जैसे कि कैंसर का दर और असामयिक मृत्यु दर में 2025 तक 25% गिरावट आये. पर अनेक कैंसर दर और मृत्यु दर बढ़ोतरी पर है! "यदि सरकार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य पूरे करने हैं तो यह सुनिश्चित करना होगा कि कैंसर दरों में बढ़ोतरी न हो बल्कि तेज़ी से गिरावट आये. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है. तम्बाकू और शराब सेवन में तेज़ी से गिरावट, शारीरिक व्यायाम और गतिविधियों में वृद्धि होना, पौष्टिक आहार, आदि से न सिर्फ कैंसर नियंत्रण बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी व्यापक रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा" शोभा शुक्ला ने वर्ल्ड कैंसर डे वेबिनार को संचालित करते हुए कहा. शोभा शुक्ला, लोरेटो कान्वेंट कॉलेज से सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका हैं जो आशा परिवार और सीएनएस से जुड़ीं हैं.

गैर-संक्रामक रोग महामारी पर विराम लगाने के लिए ज़मीनी नेत्रित्व ज़रूरी

[English] एशिया पैसिफ़िक क्षेत्र के अनेक देशों के स्थानीय निर्वाचित नेताओं ने घोषणापत्र पारित किया कि तम्बाकू नियंत्रण और गैर संक्रामक रोग महामारी पर अंकुश लगाने के लिए मज़बूत कदम उठाये जायेंगे. "एपी-कैट" के तीसरे समिट में 12 देशों के 30 शहरों से आये ज़मीनी नेताओं, जैसे कि, महापौर, राज्यपाल, उप-महापौर, उप-राज्यपाल, अन्य स्थानीय सरकारी अधिकारी, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, आदि, ने यह घोषणापत्र सिंगापुर में जारी किया.

कब होगा एड्स उन्मूलन? जब सभी एचआईवी पॉजिटिव लोग सामान्य ज़िन्दगी जी सकें और नया-संक्रमण दर शून्य हो

जैसे कि चेन की सबसे कमज़ोर कड़ी ही उसकी ताकत का मापक होती है, वैसे ही, जन स्वास्थ्य का मापक भी उसके सबसे कमज़ोर अंश होते हैं. स्वास्थ्य सुरक्षा का सपना तभी पूरा होगा जब सबसे पिछड़े और समाज के हाशिये पर रह रहे लोग स्वस्थ रहेंगे. यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) दिवस पर यह सत्य दोहराना ज़रूरी है क्योंकि हर इंसान के लिए यूएचसी की सुरक्षा देने का वादा पूरा करने के लिए अब सिर्फ 12 साल शेष हैं. भारत सरकार समेत 193 देशों की सरकारों ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्य पूरे करने का वादा किया है जिनमें यूएचसी शामिल है.

घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए क्यों ज़रूरी है वेतनभोगी अवकाश?

[English] 25 नवंबर को महिला हिंसा को समाप्त करने के लिये अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य पर, सरकारी सेवायें प्रदान कर रहे श्रमिक यूनियनों ने एक अभियान को आरंभ किया जिसकी मुख्य मांग है: घरेलू हिंसा से प्रताड़ित महिला को वेतनभोगी अवकाश मिले जो उसको न्याय दिलवाने में सहायक होगा. स्वास्थ्य को वोट अभियान और आशा परिवार से जुड़ीं महिला अधिकार कार्यकर्ता शोभा शुक्ला ने कहा कि हिंसा और हर प्रकार के शोषण को समाप्त करने के लिए, श्रम कानून और नीतियों में जो बदलाव ज़रूरी हैं, उनमें यह मांग शामिल है.

सिर्फ 26 महीने शेष: क्या एड्स के 90-90-90 लक्ष्य पूरे हो पाएंगे?

[English] [विडियो] [फोटो] बेंगलुरु में भारत के एचआईवी/एड्स से सम्बंधित चिकित्सकों के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग ले रहे देश और विदेश के वरिष्ठ विशेषज्ञों के अनुसार, एड्स नियंत्रण में प्रशंसनीय प्रगति तो हुई है परन्तु न तो यह 2020 तक 90-90-90 लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और न ही यह 2030 तक एड्स समाप्त करने के लिए.

आखिर क्यों सरकारें तम्बाकू महामारी पर अंकुश लगाने में हैं विफल?

[English] तम्बाकू के कारण 70 लाख से अधिक लोग हर साल मृत और अमरीकी डालर 1004 अरब का आर्थिक नुक्सान होने के बावजूद भी, सरकारें क्यों इस महामारी पर अंकुश नहीं लगा पा रही हैं? भारत सरकार समेत 193 सरकारों ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्य पूरे करने का वादा तो किया है पर विशेषज्ञों के अनुसार, बिना तम्बाकू महामारी पर विराम लगाए सतत विकास मुमकिन नहीं है.

एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) के कारण क्या दवाएं बेअसर और रोग लाइलाज हो रहे हैं?

शोभा शुक्ला, सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस)
[English] हाल ही में टीबी (तपेदिक) पर हुई संयुक्त राष्ट्र संघ की उच्च स्तरीय बैठक में यह सर्व-सम्मति से माना गया कि टीबी (तथा दवा प्रतिरोधक टीबी), जो रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस या एएमआर) का सबसे सामान्य और विकराल उदाहरण है, विश्व की सबसे अधिक जानलेवा संक्रामक बीमारी है.

जो उद्योग तम्बाकू महामारी के लिए जिम्मेदार हो, उसकी जन स्वास्थ्य में कैसे भागीदारी?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2014 में महानिदेशक डॉ मार्गरेट चैन ने वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि बैठक में सरकारों से कहा था कि "लोमड़ी को मुर्गों की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी न दें".

हिमशिला की नोक? सिर्फ़ स्वास्थ्य ही नहीं, सतत विकास को भी कुंठित करता है तम्बाकू

[English] प्रति वर्ष 70 लाख से अधिक लोग तम्बाकू के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं. ज़रा ध्यान से सोचें: हर तम्बाकू जनित रोग से बचा जा सकता है और हर तम्बाकू जनित असामयिक मृत्यु को टाला जा सकता है। तम्बाकू उद्योग ने यह जानते हुए भी कि उनका उत्पाद जानलेवा है, न केवल अपने बाज़ार को बढ़ाया बल्कि विश्वभर में पर्वतनुमा तम्बाकू महामारी को भी अंजाम दिया।