एड्स उन्मूलन का वादा पूरा करने के लिए 133 माह शेष


[English] सरकार के 2030 तक एड्स उन्मूलन के वादे को पूरा करने की दिशा में सराहनीय प्रगति तो हुई है परन्तु नए एचआईवी संक्रमण दर में वांछित गिरावट नहीं आई है जिससे कि आगामी 133 माह में एड्स उन्मूलन का स्वप्न साकार हो सके.

उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य है: नयी WHO रिपोर्ट

[English] विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नयी वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2019 के अनुसार, टीबी नियंत्रण में जो सफलता मिली है, वह सराहनीय तो है पर रोग-उन्मूलन के लिए पर्याप्त नहीं है. जब टीबी की पक्की जांच और पक्का इलाज मुमकिन है तो 2018 में क्यों 15 लाख लोग टीबी से मृत हुए और 1 करोड़ को टीबी रोग झेलना पड़ा?

2030 तक टीबी उन्मूलन के लिए ज़रूरी है कि 2020 तक टीबी के नए रोगी दर में सालाना 20% गिरावट आये और टीबी मृत्यु दर में 35% गिरावट. विश्व में सिर्फ एक छेत्र है जो 2020 टीबी नियंत्रण लक्ष्य पूरे करने की ओर अग्रसर है: यूरोप. 7 ऐसे देश हैं जहाँ टीबी का दर अत्याधिक है पर सतत प्रयास से वह भी 2020 लक्ष्य पूरे करने की ओर प्रगति कर रहे हैं: कीन्या, लिसोथो, म्यांमर, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंज़ानिया और ज़िम्बाब्वे. बाकि पूरी दुनिया 2020 लक्ष्य से फ़िलहाल बहुत पिछड़ी हुई है.

बिना मानवाधिकार उल्लंघन के, व्यापार करे उद्योग: वैश्विक संधि की ओर प्रगति

[English] संयुक्त राष्ट्र में दुनिया भर से आए देश एक वैश्विक संधि को पारित करने के लिए एकजुट हैं जो यह सुनिश्चित करे कि जब बहुराष्ट्रीय उद्योग व्यापार करें तो किसी भी क़िस्म का मानवाधिकार उल्लंघन न हो, और दोषी को जवाबदेह ठहराया जा सके।

एजेंडा 2030: सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता

यदि सरकारें विकास को पूर्ण कार्यसाधकता के साथ न करें तो अक्सर परिणाम अपेक्षा से विपरीत रहते हैं। “कार्यसाधकता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि पूर्व में विकास कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा से नहीं हुए हैं” कहना है जस्टिन किलकुल्लेन का जो सीपीडीई (सीएसओ पार्टनरशिप फ़ॉर डिवेलप्मेंट इफ़ेक्टिवनेस) के सह-अध्यक्ष हैं।

टीबी-मुक्त भारत के लिए ज़रूरी है लेटेंट टीबी पर अंकुश लगाना

हर नया टीबी रोगी, पूर्व में लेटेंट टीबी से संक्रमित हुआ होता है। और हर नया लेटेंट टीबी से संक्रमित रोगी इस बात की पुष्टि करता है कि संक्रमण नियंत्रण निष्फल था जिसके कारणवश एक टीबी रोगी से टीबी बैक्टीरिया एक असंक्रमित व्यक्ति तक फैला।

टीबी की गिरावट दर को 1.5% से 5% बढ़ाने के लिये केवल 21 माह शेष

हालांकि भारत समेत 193 देशों की सरकारों ने 2030 तक टीबी उन्मूलन का वायदा तो सितम्बर 2015 की संयुक्त राष्ट्र महासभा में किया था, पर टीबी की जो वर्तमान वैश्विक गिरावट दर है, वह 2030 तक टीबी समाप्ति के लिये कदापि पर्याप्त नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन रिपोर्ट २०१८ के अनुसार, वैश्विक टीबी गिरावट दर अत्यंत शिथिलता के साथ बहुत कम बढ़ रही है। वर्तमान वैश्विक टीबी गिरावट दर 1.5% पर रेंग रही है। 2030 तक दुनिया से टीबी समाप्त करने के लिये 2020 तक टीबी गिरावट दर 5% और 2025 तक 10% हो जानी चाहिये।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एकजुट हुए अनेक चिकित्सक-विशेषज्ञ और महिला अधिकार-समानता कार्यकर्ता

[English] 100 साल से भी अधिक समय बीत गया है जब अमरीका में सोशलिस्ट पार्टी ने पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था जिसकी मुख्य मांग थीं: महिला समानता और चुनाव में वोट डालने का अधिकार. इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का केंद्रीय विचार है #BalanceForBetter, क्योंकि सरकारों द्वारा 2030 तक सतत विकास लक्ष्य का सपना और सबके लिए एक बेहतर दुनिया का सपना तभी मुमकिन है जब हर किस्म की लिंग-जनित असमानता समाप्त हो और हर इंसान बराबरी से सम्मानजनक ढंग से जीवन यापन कर सके.

जब एक-तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है तो यह जन-स्वास्थ्य प्राथमिकता क्यों नहीं?

[English] [वेबिनार रिकॉर्डिंग] [पॉडकास्ट] भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य है कि गैर-संक्रामक रोग जैसे कि कैंसर का दर और असामयिक मृत्यु दर में 2025 तक 25% गिरावट आये. पर अनेक कैंसर दर और मृत्यु दर बढ़ोतरी पर है! "यदि सरकार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य पूरे करने हैं तो यह सुनिश्चित करना होगा कि कैंसर दरों में बढ़ोतरी न हो बल्कि तेज़ी से गिरावट आये. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है. तम्बाकू और शराब सेवन में तेज़ी से गिरावट, शारीरिक व्यायाम और गतिविधियों में वृद्धि होना, पौष्टिक आहार, आदि से न सिर्फ कैंसर नियंत्रण बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी व्यापक रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा" शोभा शुक्ला ने वर्ल्ड कैंसर डे वेबिनार को संचालित करते हुए कहा. शोभा शुक्ला, लोरेटो कान्वेंट कॉलेज से सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका हैं जो आशा परिवार और सीएनएस से जुड़ीं हैं.

गैर-संक्रामक रोग महामारी पर विराम लगाने के लिए ज़मीनी नेत्रित्व ज़रूरी

[English] एशिया पैसिफ़िक क्षेत्र के अनेक देशों के स्थानीय निर्वाचित नेताओं ने घोषणापत्र पारित किया कि तम्बाकू नियंत्रण और गैर संक्रामक रोग महामारी पर अंकुश लगाने के लिए मज़बूत कदम उठाये जायेंगे. "एपी-कैट" के तीसरे समिट में 12 देशों के 30 शहरों से आये ज़मीनी नेताओं, जैसे कि, महापौर, राज्यपाल, उप-महापौर, उप-राज्यपाल, अन्य स्थानीय सरकारी अधिकारी, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, आदि, ने यह घोषणापत्र सिंगापुर में जारी किया.