तम्बाकू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
तम्बाकू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

अमरीका बनाम दुनिया: क्या स्वास्थ्य और जेंडर को राजनीतिक प्राथमिकता मिलेगी?

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पाद बनाने के सबसे बड़े वैश्विक उद्योग हैं अमरीकी

[English] सितंबर 22 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में, अमरीका ने दुनिया के अधिकांश देशों की आपसी सहमति से तैयार किया हुआ राजनीतिक घोषणापत्र को पारित करने से रोक दिया। सरकारों ने इस राजनीतिक घोषणापत्र के मसौदे को अनेक महीने के विमर्श के बाद सर्वसम्मति से तैयार किया था जिससे कि ग़ैर-संक्रामक रोगों के कारण होने वाले रोग और असामयिक मृत्यु दर पर रोक लग सके। अमरीका के इस नकारात्मक हस्तक्षेप के बाद यह संभव है कि जल्दी ही यह राजनीतिक घोषणापत्र का मसौदा, संयुक्त राष्ट्र में वोट के लिए जाये।

बच्चों को नशीले उत्पादन बेचने की गहरी साजिश

[English] जो उद्योग बच्चों को मुनाफा कमाने के लिए नशीले उत्पादनों की लत लगवा रहे हैं, वे  सब एक सी ही धूर्त चालें और भ्रामक कूटनीति अपनाते हैं। इन उत्पादनों में शामिल हैं: तंबाकू और निकोटीन, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड (अति-प्रसंस्कृत) खाद्य उत्पाद, और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ।

कैंडी स्वाद के जानलेवा फंदे में फँसती युवा पीढ़ी

[English] विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस का मानना है कि "इतिहास खुद को दोहरा रहा है, क्योंकि तम्बाकू उद्योग हमारे बच्चों को एक ही निकोटीन को अलग-अलग पैकेजिंग में बेचने की कोशिश कर रहा है। ये उद्योग सक्रिय रूप से स्कूलों, बच्चों और युवाओं को नए उत्पादों के साथ लक्षित कर रहे हैं जो अनिवार्य रूप से कैंडी-स्वाद वाले जाल हैं। जब वे बच्चों को इन खतरनाक, अत्यधिक नशे की लत वाले उत्पादों का विपणन कर रहे हैं, तो वे नुकसान कम करने की बात कैसे कर सकते हैं?” तम्बाकू किसी भी रूप में हो, घातक है।

कैंसर बढ़ाने वाले कारणों पर बिना विराम लगाये कैसे होगी कैंसर रोकधाम?


भारत समेत दुनिया के सभी देशों ने वादा किया है कि 2025 तक कैंसर दरों में 25% गिरावट आएगी परंतु हर साल विभिन्न प्रकार के कैंसर से ग्रसित होने वाले लोगों की संख्या और कैंसर मृत्यु दर में बढ़ोतरी होती जा रही है। कैंसर बढ़ेंगे क्यों नहीं जब कैंसर का ख़तरा बढ़ाने वाले कारणों पर विराम नहीं लग रहा है। अनेक कैंसर जनने वाले कारण ऐसे हैं जिनपर रोक के बजाय उनमें बढ़ोतरी हो रही है।

टीबी उन्मूलन के लिए तम्बाकू उन्मूलन और ग़ैर-संक्रामक रोग नियंत्रण ज़रूरी

[English] भारत सरकार ने 2025 तक (45 माह शेष) और दुनिया के सभी देशों ने 2030 तक (105 माह शेष) टीबी उन्मूलन के सपने को साकार करने का वादा किया है। परंतु जब तक वह अनेक कारण जो टीबी रोग होने का ख़तरा बढ़ाते हैं, जाँच में मुश्किल पैदा करते हैं, उपचार निष्फल करते हैं, और टीबी से मृत्यु तक का ख़तरा बढ़ाते हैं – जब तक ऐसे कारणों पर अंकुश नहीं लगेगा, तब तक टीबी उन्मूलन कैसे मुमकिन होगा?

तम्बाकू उत्पाद पर चित्रमय चेतावनी से कम होता है तम्बाकू सेवन

[English] सिर्फ़ दो तरह से तम्बाकू सेवन कम हो सकता है: नए बच्चे-युवा तम्बाकू सेवन शुरू न करें, और जो लोग तम्बाकू व्यसनी हैं वह नशा-मुक्त हों। तम्बाकू उत्पाद के पैकेट पर प्रभावकारी चित्रमय चेतावनी से, यह दोनों लक्ष्य पूरे करने में मदद होती है इसीलिए यह जन स्वास्थ्य की दृष्टि से प्रभावकारी नीति है परंतु तम्बाकू उद्योग को नहीं 'पसंद' क्योंकि उसके मुनाफ़े की क्षति होती है। यह कहना है डॉ तारा सिंह बाम का जो सुप्रसिद्ध तम्बाकू नियंत्रण विशेषज्ञ हैं और इंटरनैशनल यूनियन अगेन्स्ट टुबर्क्युलोसिस एंड लंग डिज़ीज़ (द यूनियन) के एशिया पैसिफ़िक निदेशक हैं।

तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप से मुक्त होने का घोषणापत्र क्यों है सरकारों के लिए ज़रूरी


वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि की बैठकों में सरकारों ने गत वर्षों में मजबूरन निर्णय लिया कि चूँकि तम्बाकू उद्योग इन बैठकों में जन स्वास्थ्य नीति में निरंतर हस्तक्षेप करता रहा है और जन हितैषी नीतियों को बनने में एक बड़ा अड़ंगा है, इसलिए जन स्वास्थ्य नीति में उद्योग के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसीलिए सरकारों ने 2008 में वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया और आर्टिकल 5.3 की मार्गनिर्देशिका पारित की। पर बीबीसी समेत अनेक ऐसे रिपोर्ट ने खुलासा किया कि तम्बाकू उद्योग चूँकि अब सीधे तौर पर बैठक में नहीं हस्तक्षेप कर पा रहा तो अनेक अन्य हथकंडे अपना रहा है जैसे कि सरकारी दल कि सदस्यों को रिश्वत देना आदि। 

म्यांमार में सारे तम्बाकू उत्पाद पर होगी "प्लेन पैकिजिंग"

[English] सिंगापुर और थाइलैंड की तरह अब म्यांमार में भी सशक्त तम्बाकू नियंत्रण नीति लागू होगी। म्यांमार ने हर तम्बाकू उत्पाद पर "प्लेन पैकिजिंग" नीति को लागू करने का निर्णय लिया है। तम्बाकू उत्पाद की पैकिजिंग को उद्योग, बच्चों और युवाओं को भ्रमित और झुठलाने के लिए इस्तेमाल करता था अब वह मजबूरन प्लेन पैकिजिंग नीति के कारणवश, पैकिजिंग से भ्रामक झूठे प्रचार नहीं कर पाएगा और उसको इसी जगह पर, सशक्त तम्बाकू नियंत्रण चित्रमय चेतावनी को निर्देशानुसार प्रकाशित करना होगा। 

तम्बाकू महामारी के अंत के लिए क्यों है ज़रूरी अवैध तम्बाकू व्यापार पर रोक?

[English] तम्बाकू जनित महामारियों से पूर्ण रूप से बचाव मुमकिन है, क्योंकि यह मानव निर्मित आपदा है. हर तम्बाकू जनित रोग से बचाव मुमकिन है और हर तम्बाकू जनित मृत्यु असामयिक है. उद्योग अपने मुनाफे के लिए इस जानलेवा उत्पाद के व्यापार को बढ़ा रही है पर कीमत और जान जा रही है जनता की और सरकारों के सतत विकास के प्रयास भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं. डॉ तारा सिंह बाम जो इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरक्लोसिस एंड लंग डिजीज के एशिया पसिफ़िक निदेशक हैं, ने कहा कि मानव निर्मित तम्बाकू महामारी का पूर्ण रूप से अंत आवश्यक है क्योंकि इससे पूर्णत: बचाव मुमकिन है. जितना राजस्व आता है उससे कई गुणा अधिक नुक्सान होता है - और लाखों लोग तम्बाकू से मृत होते हैं. हर साल विश्व में 80 लाख से अधिक लोग तम्बाकू से मृत होते हैं. तम्बाकू के अवैध व्यापार पर पूर्ण रोक लगाना जरूरी है पर हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि तम्बाकू, अवैध हो या वैध, हर रूप में घातक है.

कोविड-19 महामारी पर विराम लगाने के लिए स्थानीय नेतृत्व ज़रूरी

कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हर व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं होगी तब तक कोई भी संक्रमण-मुक्त नहीं हो सकता, भले ही वह सबसे अमीर या बड़े ओहदे पर आसीन व्यक्ति ही क्यों न हो. इस बात में भी कोई संशय नहीं रह गया कि मज़बूत अर्थव्यवस्था के लिए मज़बूत स्वास्थ्य सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है. 11 महीने पहले कोरोना वायरस का पहला संक्रमण वुहान में रिपोर्ट हुआ था। आज विश्व भर में 7.2 करोड़ व्यक्ति इससे संक्रमित हो चुके हैं.

विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर विशेष: तम्बाकू उन्मूलन के बिना कैसे होगा तम्बाकू-जनित महामारियों का अंत?


[English] इस समय पूरे विश्व में कोरोनावायरस महामारी के कारण स्वास्थ्य-सुरक्षा की सबसे विकट परीक्षा है. यदि भारत समेत उन देशों के आंकड़ों पर नज़र डालें जहाँ कोरोनावायरस महामारी विकराल रूप लिए हुए है तो यह ज्ञात होगा कि जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह (डायबिटीज), दीर्घकालिक श्वास रोग, आदि है, उनको कोरोनावायरस संक्रमण होने पर, अति-गंभीर परिणाम होने का खतरा अत्याधिक है (जिसमें मृत्यु भी शामिल है). गौर करने की बात यह है कि तम्बाकू इन सभी रोगों का खतरा बढ़ाता है. तम्बाकू पर जब तक पूर्ण-विराम नहीं लगेगा तब तक यह मुमकिन ही नहीं है कि तम्बाकू-जनित रोगों की महामारियों पर अंकुश लग पाए, और इनमें कोरोनावायरस महामारी भी शामिल हो गयी है.

क्या शराब और तम्बाकू से कोरोना वायरस रोकधाम खतरे में पड़ जायेगा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों से कोरोना वायरस रोग होने पर गंभीर परिणाम होने का खतरा बढ़ता है और मृत्यु तक हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों के सेवन की, कोई भी सुरक्षित सीमा नहीं है – यानि कि, हर रूप में और हर मात्रा में, यह हानिकारक हैं. जब देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा था और तालाबंदी हो गयी थी, तब शराब कंपनियां सरकार पर यह दबाव बनाने का प्रयास कर रही थीं कि शराब को ‘अति-आवश्यक श्रेणी’ में लाया जाए क्योंकि खाद्य सामग्री की तरह शराब ही अति-आवश्यक है. कोरोना वायरस महामारी में शायद पृथ्वी पर हर इंसान को यह समझ में आ गया है कि भोजन कितना आवश्यक है परन्तु शराब और तम्बाकू, न केवल, गैर ज़रूरी हैं बल्कि कोरोना वायरस रोग का खतरा भी बढ़ाते हैं.