कोरोनावायरस रोग महामारी नियंत्रण में, प्रवासी श्रमिकों के साथ अमानवीयता क्यों?


दुनिया भर में अब कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 47 लाख से ऊपर पहुँच गयी है और 3.13 लाख लोग मृत हुए हैं. परन्तु जन स्वास्थ्य आपदा और महामारी नियंत्रण के प्रयासों के दौरान, श्रमिकों के साथ बर्बर अमानवीयता क्यों हो गयी?

नर्स संगठनों की है मांग कि सबके लिए हो स्वास्थ्य सुरक्षा एक समान


[English] फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (12 मई) के रूप में मनाया जाता है. इस साल, फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म को 200 साल हो रहे हैं और इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरे वर्ष 2020 को, नर्स और दाई के सम्मान में, समर्पित कर दिया है.

क्या शराब और तम्बाकू से कोरोना वायरस रोकधाम खतरे में पड़ जायेगा?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों से कोरोना वायरस रोग होने पर गंभीर परिणाम होने का खतरा बढ़ता है और मृत्यु तक हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों के सेवन की, कोई भी सुरक्षित सीमा नहीं है – यानि कि, हर रूप में और हर मात्रा में, यह हानिकारक हैं. जब देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा था और तालाबंदी हो गयी थी, तब शराब कंपनियां सरकार पर यह दबाव बनाने का प्रयास कर रही थीं कि शराब को ‘अति-आवश्यक श्रेणी’ में लाया जाए क्योंकि खाद्य सामग्री की तरह शराब ही अति-आवश्यक है. कोरोना वायरस महामारी में शायद पृथ्वी पर हर इंसान को यह समझ में आ गया है कि भोजन कितना आवश्यक है परन्तु शराब और तम्बाकू, न केवल, गैर ज़रूरी हैं बल्कि कोरोना वायरस रोग का खतरा भी बढ़ाते हैं.

कोरोना वायरस रोग महामारी पर अंकुश के लिए क्यों है ज़रूरी तम्बाकू उन्मूलन?

[English] भारत समेत जो देश इस समय कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) महामारी से जूझ रहे हैं, उनके वैज्ञानिक शोध आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जो लोग अधिक आयु के हैं और जिन्हें गैर-संक्रामक रोग हैं, उन्हें कोविड-19 के गंभीर लक्षण हो सकते हैं और मृत्यु होने की सम्भावना भी अधिक है. विश्व में गैर-संक्रामक रोग के कारण 70% मृत्यु होती है. हृदय रोग, पक्षाघात, कैंसर, मधुमेह, दीर्घकालिक श्वास रोग, आदि प्रमुख गैर-संक्रामक रोग हैं. इन सभी गैर-संक्रामक रोगों का खतरा अत्याधिक बढ़ाता है - तम्बाकू सेवन. किसी भी प्रकार के तम्बाकू सेवन करने से, जानलेवा गैर संक्रामक रोग का खतरा मंडराने लगता है और कोविड-19 होने पर भी परिणाम घातक हो सकते हैं.

कोरोना संकट ने गैर-बराबरी खत्म करने का मौका उपलब्ध कराया है

प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ संदीप पाण्डेयबॉबी रमाकांत
विश्व में कोरोना वायरस रोग कोविड-19 से दसियों लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं हलांकि मरने वालों की संख्या अभी लाख से कम है। कोरोना वायरस चीन के वुहान क्षेत्र में पहली बार 31 दिसम्बर को चिन्हित हुआ और 30 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उसे वैश्विक जन स्वास्थ्य आपदा घोषित किया, इसी दिन भारत में पहला मामला केरल में प्रकाश में आया और अब तक भारत में हजारों लोग संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या सौ पार कर गई है।

9 महीने शेष हैं: क्या हम एड्स-संबंधित 2020 लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे?

यदि अन्य स्वास्थ्य मुद्दों से तुलना की जाये तो यह सही है कि एचआईवी/एड्स कार्यक्रम ने पिछले अनेक सालों में अद्वितीय सफलता हासिल की है. एचआईवी रोकधाम के लिए बेमिसाल अभियान चले, नि:शुल्क जांच और विश्व में लगभग 2 करोड़ लोगों को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवा मिली, वैज्ञानिक शोध के जरिये बेहतर दवाएं मिली, मानवाधिकार के अनेक जटिल मुद्दे उठे (जैसे कि, लिंग-जनित और यौनिक समानता), आदि. सबसे महत्वपूर्ण है कि आज यदि मानक के अनुसार जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवा और अन्य देखभाल मिले, तो एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति का वायरल लोड नगण्य रहेगा, वह एक सामान्य ज़िन्दगी जी सकता है, और उससे किसी को भी एचआईवी संक्रमण नहीं फैलेगा. परन्तु नए एचआईवी संक्रमण दर अभी भी अत्याधिक चिंताजनक है. एक ओर एचआईवी के साथ जीवित लोगों को स्वस्थ रखने की दिशा में सराहनीय प्रयास हुए, वहीं दूसरी ओर, विराट चुनौतियाँ अभी भी हैं.

बिक्री-दुकान पर भी नहीं तम्बाकू उत्पाद प्रदर्शित कर सकते: बोगोर की जनता ने जीता कोर्ट केस

जैसे-जैसे दुनिया भर से वैज्ञानिक शोध पर आधारित प्रमाण आते गए कि तम्बाकू सेवन जानलेवा है, सरकारों ने तम्बाकू-उद्योग के तमाम हथकंडों के बावजूद, तम्बाकू नियंत्रण के प्रयास भी किये. उदाहरण के तौर पर, तम्बाकू उत्पाद के विज्ञापन पर प्रतिबन्ध लगने लगा परन्तु तम्बाकू उद्योग ने, बिक्री-दुकान पर, विज्ञापन और उत्पाद-प्रदर्शित करना नहीं छोड़ा. इंडोनेशिया के बोगोर शहर की जनता ने कोर्ट में केस जीता कि तम्बाकू बिक्री-दुकान पर भी तम्बाकू उत्पादन का प्रदर्शन नहीं हो सकता. जनता की यह पहल अत्यंत सराहनीय है, विशेषकर इसलिए कि न सिर्फ इससे तम्बाकू नियंत्रण सशक्त होता है बल्कि अन्य शहर-देश की जनता को भी उम्मीद मिलती है कि तम्बाकू उद्योग को हराना और ज़िन्दगी को जिताना भी संभव है.

महिला समानता के बिना कैसे होगा सबका विकास?

8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला समानता केन्द्रीय बिंदु रहा. आज भी हमारे समाज में, यदि महिलाओं को बराबरी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हो तो यह विकास के ढाँचे पर भी सवाल उठाता है क्योंकि आर्थिक विकास का तात्पर्य यह नहीं है कि समाज में व्याप्त असमानताएं समाप्त हो जाएँगी. बल्कि विकास के ढाँचे बुनियादी रूप से ऐसे हैं कि अनेक प्रकार की असमानताएं और अधिक विषाक्त हो जाती हैं.

प्रजनन स्वास्थ्य सुरक्षा के बिना सतत विकास मुमकिन नहीं

डॉ शिवोर्ण वार, संयोजक, APCRSHR10
[English] सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र में ही प्रगति से स्वास्थ्य-सुरक्षा नहीं मिल सकती, विशेषकर कि उनको, जो सबसे अधिक ज़रूरतमंद हैं. स्वास्थ्य सेवा में सुधार के साथ-साथ, अन्य क्षेत्र में भी सुधार आवश्यक है जिससे कि समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए जीवन बेहतर हो सके. मूलभूत सेवाएँ, आर्थिक प्रगति, गरीबी उन्मूलन आदि से भी, हमारा स्वास्थ्य और संभावित जीवन-काल दोनों ही प्रभावित होता है, जिसमें प्रजनन और यौन स्वास्थ्य भी शामिल है.