शांति एवं लोकतंत्र पर होगा भारत-पाकिस्तान संयुक्त लोकमंच का इलाहाबाद अधिवेशन

[English] शांति एवं लोकतंत्र के लिये पाकिस्तान-भारत लोकमंच का आठवें संयुक्त अधिवेशन इलाहाबाद में २९-३१ दिसम्बर २०११ के दौरान आयोजित होना तय हुआ है जिसमें दोनों देशों से अनेक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं शांति और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले नागरिक भाग लेंगे. शांति एवं लोकतंत्र के लिये पाक-भारत लोकमंच (उ0प्र0) के उपाध्यक्ष, श्री इरफ़ान अहमद, ने कहा कि इस अधिवेशन के माध्यम से यह सन्देश जायेगा कि दक्षिण एशिया के नागरिकों को और सरकारों को यह कदम उठाने चाहिए:

१. दक्षिण एशिया के देशों के बीच दोस्ती और सहयोग में सुधार हो और मेल बढ़े. इसके लिये इन देशों को वीसा-मुक्त होना चाहिए जिससे कि इस छेत्र के लोग पूरी स्वतंत्रता के साथ एक दुसरे से मिल सकें, और इस छेत्र की मिलीजुली सांस्कृतिक धरोहर की जड़ें मजबूत हों, और व्यापर बढ़े.

२. इन देशों में लोकतान्त्रिक एवं मानवीय मूल्यों को सशक्त किया जाए और समाज के हाशिये पर रह रहे वर्गों के लिये सामाजिक एवं कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए, जिनमें महिलाएं, दलित, और अन्य धार्मिक और प्रजातीय अल्प-संख्यक वर्ग शामिल हैं. हमारा मानना है कि सक्रियता से इन वर्गों का शोषण करने वाले कानूनों और सामाजिक प्रथाओं को ख़त्म किया जाये.

३. भारत और पाकिस्तान को एक निश्चित समय-काल में अपने परमाणु अस्त्र-शास्त्र को ख़त्म करना आरंभ करना चाहिए जिससे कि दोनों देश मिल कर परमाणु मुक्त दक्षिण एशिया छेत्र स्थापित करने में पहल ले सकें.

४. जापान में घटित परमाणु आपदा के बाद तो यह और भी स्पष्ट हो गया है कि परमाणु शक्ति का सैन्य या ऊर्जा दोनों में ही इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.

५. लोकतान्त्रिक मूल्य और शासन प्रणाली सम्पूर्ण दक्षिण एशिया छेत्र में कायम होनी चाहिए.

६. दक्षिण एशिया छेत्र की सभी सरकारों द्वारा बिना-विलम्ब सैन्यकरण को रोकने के लिये कदम उठाये जाने चाहिए और सैन्य बजट को पारदर्शी तरीकों से जन-हितैषी कार्यक्रमों में निवेश करना चाहिए जैसे कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य.

७. चूँकि इस छेत्र की सांस्कृतिक धरोहर मिलीजुली है, सक्रियता के साथ हमें शांति और आपसी सौहार्द बढ़ाने के लिये सांप्रदायिक ताकतों पर अंकुश लगाना चाहिए.

८. हमारा मानना है कि इस छेत्र के सभी सरकारों को कदम उठाने चाहिए कि प्राकृतिक संसाधन जैसे कि जल, जंगल और जमीन, पर स्थानीय लोगों का ही अधिकार कायम रहे, और गैर-कानूनी और विध्वंसकारी तरीकों से जल,जंगल और जमीन को वैश्वीकरण ताकतों से बचाना चाहिए क्योंकि यह जन-हितैषी नहीं है.

बाबी रमाकांत - सी.एन.एस.

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