घरेलू वायु प्रदूषण भी खतरा है फेफड़े के स्वास्थ्य के लिए

घर के बाहर के प्रदूषण के खतरे से तो हम लोग चेते हुए हैं पर घर के भीतर वायु प्रदूषण हमारे फेफड़े के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसकी जागरूकता कम है। डॉ सूर्य कान्त, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, पलमोनरी मेडिसिन विभाग, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने बताया कि: “परोक्ष तंबाकू धूम्रपान से और लकड़ी आदि के चूल्हे के धुए से हमारे फेफड़े के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है। टूबेर्कुलोसिस (क्षय रोग) होने का खतरा बढ़ता है, अस्थमा या दमा बिगड़ने की संभावना बढ़ती है। इसीलिए तंबाकू सेवन न करें, और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और स्वच्छ चूल्हों का ही उपयोग करें”।

स्वास्थ्य को वोट अभियान, आशा परिवार, सीएनएस, द्वारा आयोजित मीडिया संवाद में डॉ कुयाण गान, जो इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टूबेर्कुलोसिस अँड लंग डीजीस से संबन्धित हैं, ने वेब-कास्ट में कहा कि घर के भीतर धूम्रपान नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका कुप्रभाव और भीषण फेफड़े स्वास्थ्य परिणाम बच्चों और महिलाओं को झेलने पड़ते हैं।

इंडियन चेस्ट सोसाइटी के उपाध्यक्ष डॉ सूर्य कान्त ने बताया कि घरेलू वायु प्रदूषण से क्रोनिक ब्रंकाइटिस, अस्थमा, टीबी और लंग कैंसर तक हो सकता है। बच्चों में बाल निमोनिया का भी यह एक बड़ा कारण है।

विश्व में घरेलू वायु प्रदूषण महिलाओं में दूसरा सबसे बड़ा मृत्यु का कारण है। डॉ ऋषि सेठी, केजीएमयू हृदय रोग विभाग के एसोशिएट प्रोफेसर के अनुसार, 15% इश्चेमिक हृदय रोग से होने वाली असमय मृत्यु घरेलू वायु प्रदूषण (जैसे कि तंबाकू धुए) के कारण होती है (आधी महिलाओं में)।

राहुल द्विवेदी - सीएनएस 

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