लंबी ज़िंदगी, समान अधिकार: बढ़ती उम्र में जेंडर समानता और मानवाधिकार क्यों ज़रूरी हैं

[English] अक्टूबर 2026 वृद्ध व्यक्तियों के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 1 अक्टूबर को दुनिया अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाएगी, जिसका विषय है "दीर्घायु का युग: लंबी ज़िंदगी के लिए व्यवस्थाओं पर नए सिरे से विचार"। उसी महीने बाद में, वृद्ध व्यक्तियों के मानवाधिकारों पर अंतर-सरकारी कार्य समूह, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपनी अगली बैठक करेगा ताकि एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि के मसौदे पर काम आगे बढ़ाया जा सके।

भेष के पीछे छिपा अधिकार-विरोध: महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई

[English] सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अब केवल 52 महीने बचे हैं। लेकिन जेंडर समानता और स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़े लक्ष्यों पर दुनिया की गति चिंताजनक रूप से धीमी है। कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियों, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और दशकों की वैश्विक प्रतिबद्धताओं से हासिल प्रगति, अब बढ़ते और बहुरूपी अधिकार-विरोधी अभियान के निशाने पर है।

"जस्टिस अनबाउंड" पुस्तक वैश्विक स्तर पर जेंडर और स्वास्थ्य अधिकारों के प्रतिगामी दबाव के खिलाफ चेतावनी है

मोल्डोवा की एलिवा प्रेस ने आज “जस्टिस अनबाउंड: फेमिनिस्ट वॉयसेज ऑन जेंडर इक्वेलिटी, हेल्थ राइट्स, एंड इंक्लूसिव फ्यूचर्स” पुस्तक का विमोचन किया है। यह लखनऊ की वरिष्ठ नारीवादी, स्वास्थ्य, विकास और न्याय पर कार्यरत शोभा शुक्ला द्वारा लिखी गई 14 प्रभावशाली रिपोर्टों का विशेष संकलन है।

भारत की सर्वोच्च अदालत का ऐतिहासिक निर्णय: गृहिणी के अवैतनिक देखभाल एवं घरेलू श्रम के आर्थिक मूल्य को मान्यता

[English] यह प्रकरण 25 नवंबर 2001 को भारत के पंजाब राज्य में हुई एक सड़क दुर्घटना से शुरू हुआ, जिसमें तीन बच्चों की माँ और गृहिणी रेशमा की मृत्यु हो गई। संयोग से 25 नवंबर को विश्व स्तर पर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

क्या आप जानते हैं कि महिलाओं को रोगाणुरोधी प्रतिरोध का अधिक है खतरा

पुरुष हो या महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति, यदि उसको दवा-प्रतिरोधक संक्रमण हो जाए तो सामान्य दवाएँ कार्य नहीं करेंगी। यह बात पशु या पौधों पर भी लागू होती है यदि उनको ऐसा संक्रमण हो जो दवा-प्रतिरोधक हो - सामान्य दवाएं कार्य नहीं करेंगी।

तमाम वादों के बावज़ूद हम जेंडर समानता पर क्यों पिछड़ रहे हैं?

[English] दुनिया की सभी सरकारों ने 2030 तक जेंडर समानता का वादा किया था (5वाँ सतत विकास लक्ष्य)। 2030 के इन वादों को पूरा करने के लिए सिर्फ़ 5 साल से कम समय शेष है परंतु सभी देश इन लक्ष्यों से बहुत दूर हैं।