प्रदूषकों को जलवायु परिवर्तन वार्ता से बाहर रखा जाए

[English] भारत सरकार से अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपील की है कि वे बिना विलम्ब महत्वपूर्ण कदम उठाये जिससे कि अगले सप्ताह जर्मनी में होने वाली जलवायु नियंत्रण वार्ता में जन हितैषी निर्णय हों. मेगसेसे पुरुस्कार से सम्मानित वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ संदीप पाण्डेय ने कहा कि "भारत को नाभिकीय ऊर्जा का विकल्प ढूँढना चाहिए जो इतने खर्चीले व खतरनाक न हों। पुनर्प्राप्य ऊर्जा के संसाधन, जैसे सौर, पवन, बायोमास, बायोगैस, आदि, ही समाधान प्रदान कर सकते हैं यह मान कर यूरोप व जापान तो इस क्षेत्र में गम्भीर शोध कर रहे हैं। भारत को भी चाहिए कि इन विकसित देशों के अनुभव से सीखते हुए नाभिकीय ऊर्जा के क्षेत्र में अमरीका व यूरोप की कम्पनियों का बाजार बनने के बजाए हम भी पुनर्प्राप्य ऊर्जा संसाधनों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करें। भारत को ऐसी ऊर्जा नीति अपनानी चाहिए जिसमें कार्बन उत्सर्जन न हो और परमाणु विकिरण के खतरे भी न हो।"

डॉ संदीप पाण्डेय ने बताया कि "हम लोग भारत में जलवायु परिवर्तन के सबसे भीषण प्रभाव तो झेल रहे हैं परन्तु यह करनी है अमीर देशों की. मोदी सरकार ने पर्यावरण सम्बन्धी नीतियों को कमजोर किया है बजाये इसके कि पर्यावरण संगरक्षण सशक्त हो और प्रदूषक को जिम्मेदार ठहराया जाये. यह जरुरी है कि हमारी उर्जा निति बड़े बहुराष्ट्रीय उद्योग न तय करे बल्कि स्थानीय जन समुदाय लोग तय करें. प्रदूषक उद्योगों को जिम्मेदार ठहराना और उनसे भरपाई करवाना अत्यंत आवश्यक है."

सिटीजन न्यूज़ सर्विस (सीएनएस)
१० अक्टूबर २०१५

No comments: