भारत सरकार एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रतिपादित तपेदिक निधिकरण प्रस्ताव को ग्लोबल फंड की स्वीकृति

भारत सरकार एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रतिपादित तपेदिक निधिकरण प्रस्ताव को ग्लोबल फंड की स्वीकृति


भारतीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम के इतिहास में एक निर्धारक निर्णय



'बोर्ड ऑफ ग्लोबल फंड फॉर एड्स, टुबर्कुलोसिस एंड मलेरिया' (जी.ऍफ़.ई.टी.एम.) ने भारत में तपेदिक नियंत्रण हेतु प्रस्तावित कार्यक्रम के लिए पूंजी अनुदान स्वीकृत कर दिया है, जो अब तक दिये गए अनुदानों से अधिक है। तपेदिक नियंत्रण की दिशा में यह एक अभूतपूर्व निर्णय है, विशेष कर भारत के सम्बन्ध में, जहाँ विश्व के सबसे अधिक तपेदिक पीड़ित व्यक्ति रहते हैं, तथा ‘बहु औषधि प्रतिरोधी’ (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट अर्थात ‘एम.डी.आर. टी. बी. ) के रोगी भी सबसे अधिक हैं।


भारत सरकार एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा निवेदित प्रस्ताव के तीन मुख्य प्राप्त कर्ता हैं : केन्द्र सरकार का तपेदिक प्रभाग, इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट टुबर्कुलोसिस & लंग डिसीस (यूनियन) एवं वर्ल्ड विज़न इंडिया। ये तीनों ही इस पञ्च वर्षीय योजना के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होंगें।


यूनियन के एक्सेक्युटिव डायरेक्टर डा.नील्स .ई. बिलो ने कहा, “हम इस प्रस्ताव की सफलता पर बहुत प्रसन्न हैं। विशेषकर गैर सरकारी संगठनों की बढ़ती हुयी सहभागिता, इस नयी अभिज्ञता की परिचायक है कि टी.बी. जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए, केवल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था काफी नहीं है। इसके लिए एक अधिक व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।”


इस योजना का प्रथम घटक इस बात पर केंद्रित होगा कि एम.डी.आर टी.बी. का निदान एवं उपचार सभी के लिए उपलब्ध हो। सन २०१५ तक, देश भर में ४३ निर्दिष्ट प्रयोग शालाओं में, एम.डी.आर- टी.बी. के त्वरित निदान के लिए उच्च कोटि की सुविधाएं प्राप्य होंगी। इसके अलावा, देश भर के प्रान्तों में इस रोग के प्रबंधन और देखभाल को उत्तमतर बनाने के भी प्रयास किए जायेंगें, ताकि २०१५ तक ५५,३५० अतिरिक्त रोगियों का उपचार सम्भव हो सके।


योजना का दूसरा घटक, तपेदिक की रोकथाम/देखभाल कार्यक्रमों में गैर सरकारी संस्थाओं की भागीदारी को मज़बूत करेगा। तभी भारत के ‘पुनरीक्षित राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम’ (आर.एन.सी.टी.पी.) के विस्तार,प्रत्यक्षता एवं प्रभाविता को बेहतर बना कर, देश के २३ राज्यों के ३७४ जिलों में रहने वाले ७४.४० करोड़ लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।


भारत ने टी.बी. के ‘डॉट्स ’ (वैश्विक मान्यता प्राप्त टी.बी. नियंत्रण रणनीति) कार्यक्रम को सर्व सुलभ बनाने की दिशा में प्रशंसनीय कार्य किया है। परन्तु इस योजना के द्वारा, तपेदिक नियंत्रण सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाया जा सकेगा, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में, तथा अति संवेदनशील सम्प्रदायों / जनजातियों के बीच।


इसके अतिरिक्त, आर.एन.सी.टी.पी. को जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तरों पर समर्थन देकर सुदृड़ किया जाएगा। एक साथ, समाज के इतने सारे बहु पणधारियों (निजी चिकित्सकों और गैर सरकारी संस्थाओं से लेकर तकनीकी अधिकरण और सम्प्रदाय वर्गों तक) के सहयोग से निश्चय ही अच्छे परिणाम निकलेंगें। क्रियात्मक और दीर्घकालिक नेटवर्क के माध्यम से सूचना का आदान – प्रदान सम्भव हो सकेगा, कार्यकर्ताओं का

उत्तरदायित्व बढ़ेगा, तथा तपेदिक नियंत्रण एवं देखभाल के कार्यक्रमों में जनता की भागीदारी बढ़ेगी।


ग्लोबल फंड बोर्ड ने फिलहाल इस पाँच वर्षीय योजना के प्रथम दो वर्षों के निधिकरण को स्वीकृति दी है। पूरी योजना के लिए १९.९५४ करोड़ डॉलर के अनुदान की मांग करी गयी है। अगले कुछ महीनों में, अनुदान की वास्तविक राशि निश्चित कर ली जायेगी।



बॉबी रमाकांत







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