इल्म की इबादत गाह है, मदरसे

‘‘आज के मौजूदा दौर में मदरसों में क्या और कैसे पढ़ाया जाता हैं। और मदरसों की शिक्षा प्रणाली क्या है ? यह सब आम लोगों को ठीक से मालूम नहीं है। और मदरसों को बुरा बताने वालो में ज्यादातर का मानना है कि चूंकि मदरसे इस्लामिक संस्थाएं है और वे अपने छात्रों को जेहाद के बारे में ही पढ़ाते होगें। आये दिन खबरों में इस तरह की खबर और कुछ संगठनों के बयान आते ही रहते हैं। इससे लगता है कि मदरसों के बारे में जानकारी [सच्चाई] कम और भ्रांतियां ज्यादा है। और आज के इस आयोजन का एक उदेश्य यह भी है कि लोगों के मन से ऐसी भ्रांतियों को दूर किया जाए।’’ उक्त बातें मदरसा दारूओलूम गर्ल्स कालेज-मऊ में मदरसा शिक्षकों के लिये 27 जून 2010 को आयोजित ‘‘गणित-विज्ञान’’ की एक दिवसीय कार्यशाला में ‘‘इल्म हासिल करने में मदरसों की भूमिका’’ विषय पर विचार करते हुए सच्ची-मुच्ची के सम्पादक और इस कार्यक्रम के संयोजक श्री अरविंद मूर्ति ने कही। उन्होंने कहा कि दुनिया का पहला मदरसा पवित्र पैग्म्बर ने अपनी मस्जिद में स्थापित किया था, संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के बतौर बोलते हुए श्री राकेश, जिलाधिकारी मऊ ने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि आप लोगों ने एक ऐसे विषय पर संगोष्ठी आयोजित की है जिसकी आज नितांत जरूरत है। और समाज यह जान सकेगा कि मदरसों की स्थापना का मूल उदेश्य क्या है ?

यह बड़ी विडम्बना है कि मदरसा का नाम आते ही मान लिया जाता है दीनी तालीम, बुनियाद परस्तीकी की तालीम, तरक्की की मुखालफत, जब कि मदरसो का मजहब से कोई लेना देना नहीं है। मदरसा एक अरबी भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है शिक्षा का स्थान अंग्रेजों के भारत में आने के बाद हालात बदले हैं, और भाषा ने यह बंटवारा पैदा किया है। पाठशाला शब्द पुराने लोगों की जुबान पर चढ़ता ही नहीं था। लोग मदरसा ही बोलते थे। दुनिया में ज्ञान-विज्ञान को बढ़ाने में मदरसों की ऐतिहासिक भूमिका रही है। मदरसों में तार्किक विज्ञान, भौतिकी, खगोल शास्त्र आदि पढ़ाये जाते है। यूरोप और यूनान में भी ज्ञान-विज्ञान मदरसों से फैला है। उन्होंनें कहा कि मदरसों की शिक्षा सिर्फ मजहबी शिक्षा नहीं है, और दीनी तालीम कोई बुरी चीज नहीं है। कोई भी दीन इंसानियत से मुहब्बत की ही तालीम देता है। और मदरसे इल्म की इबादत गाह हैं ।

संगोष्ठी को कार्यशाला के प्रशिक्षक दिल्ली आई.आई.टी.के प्रो. विपीन त्रिपाठी ने कहा कि ‘‘मैं सिर्फ एक उदाहरण आप के सामने रखूगां जिससे आप खुद अन्दाजा लगा सकते है कि मदरसों की शिक्षा कितनी तकनीकी और वैज्ञानिक है। आज दुनिया का जो आश्चर्यजनक इमारत, ताजमहल है, उसका नक्शा और निमार्ण कार्य मदरसा शिक्षकों और छात्रों ने कराया था। उस दौर में पूरी दुनिया में कोई भी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं थे। आज भी शिक्षा के क्षेत्र में मदरसों की बड़ी भूमिका है। पूरे देश में आई.ए.एस. परीक्षा टाप करने वाले डॉक्टर शाह फैसल की शुरूआती पढ़ाई भी मदरसे में ही हुई है। ’’


नसीम अख्तर

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