शांति कार्यकत्री का उत्पीडन

मई १९,२०१०

सेवा में,

श्रीमती हेलेना इकबाल सईद,

ए.आई.जी. पुलिस स्पेशल ब्रांच


विषय: विभिन्न ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा उत्पीड़न

महोदया,

मैं लाहौर में रहने वाली एक सामाजिक और शांति कार्यकर्ता हूँ, तथा' इंस्टिट्यूट फॉर पीस एंड सेकुलर स्टडीज़' की संस्थापिका भी हूँ। अत: पिछले १५ सालों से मैं अनेकों सामाजिक कार्य कलापों से जुड़ी रही हूँ। मेरे इन कार्यों में हमारे पड़ोसी देश भारत के साथ शान्ति स्थापित करने हेतु प्रयास करना भी शामिल है। हमारे समाज में अल्पसंख्यकों, औरतों, गरीबों और दलितों के साथ जो अन्याय किया जाता है, मैं उसके खिलाफ भी अभियान चलाती हूँ।

इनमें से कोई भी काम गैरकानूनी नही है। फिर भी, पता नहीं क्यों, यहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसियां मुझे लगातार परेशां करती रही हैं। सन १९९९ में शांतिनगर में हुए जन संहार के विरुद्ध मेरा आवाज़ उठाना, भारत-पाकिस्तान के लोगों को एक दूसरे से जोड़ने की कोशिश में भारत कि यात्रा करना, कतिपय भारतीय शान्ति प्रतिनिधियों को अपने घर में ठहराना-- इन्हीं सब वजहों से शायद ख़ुफ़िया पुलिस मेरे पीछे पड़ गयी है।

मुझे परेशां करने की नीयत से कई बार पुलिस स्टेशन ले जाया गया है, लाहौर प्रेस क्लब के सामने से पकड़ कर, लाहौर ज़ू के पास स्थित ख़ुफ़िया विभाग के दफ्तर के बाहर छोड़ गिया गया है, मेरे फोन पर लगातार किसी प्राइवेट कॉलर आई.डी. से धमकियां दी जाती रही हैं, और मेरे घर आकर भी मुझे अक्सर परेशान किया जाता है। मेरी डायरी और मेरा मोबाइल फोन भी चोरी हो गया है, इससे भी अधिक दु:ख की बात यह है कि मुझसे बार बार यही प्रश्न पूछे जाते हैं कि ' आपके पति का क्या नाम है ? आपके परिवार में और कौन है ? आप भारत से शान्ति सम्बन्ध क्यों चाहती हैं, जब वह हमारा दुश्मन है ? आपको पैसा कहाँ से मिलता है ?

मैं क़ानून की इज्ज़त करने वाली पाकिस्तान की एक नागरिक हूँ, और मेरा किसी भी धार्मिक संस्था अथवा राजनैतिक पार्टी से कोई सम्बन्ध नहीं है। मैं तो केवल जन साधारण की भलाई के लिए, कानून की हद में रह कर कार्य करती हूँ, और छुप कर कोई भी काम नहीं करती। यदि फिर भी ख़ुफ़िया विभाग को मुझसे कोई परेशानी है, तो मैं आपसे यह इल्तिजा करती हूँ कि आप उन्हें यह आदेश दें कि वे औपचारिक रूप से जांच पड़ताल करें, जिसमें मुझे भी सारे आरोपों के जवाब देने का मौका दिया जाय। यह मेरा मौलिक अधिकार है, और मैं आपसे यह अनुरोध करती हूँ कि मुझे इस अधिकार से वंचित न किया जाय।
पिछले कुछ हफ़्तों से ख़ुफ़िया विभाग के कर्मचारी मेरे घर के बाहर डेरा जमाये हुए हैं। कई बार उन्होंने मेरे घर के अन्दर भी घुसने की कोशिश करी, पर मैंने उन्हें बिना उचित परिचय-पत्र के अन्दर नहीं आने दिया। तीन अधिकारियों ने मुझे अपने पहचान पत्र दिखाए जो अनुमानत : आई.एस.आई., आई.बी. और स्पेशल ब्रांच द्वारा जारी किये गए थे, पर उन अधिकारियों के बात करने का तरीका बहुत ही अभद्रतापूर्ण, डरावना और धमकाने वाला रहा है।

मैं आपसे निम्न लिखित बातों पर विचार करने का निवेदन करती हूँ:-

  • क्या ये अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशानुसार परेशान कर रहे हैं, या फिर
  • उच्च अधिकारियों को इस बात का इल्म तक नहीं है कि एक अमन परस्त और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली औरत पर इस कदर ज़ुल्म ढाए जा रहे हैं।

मैं आपसे अपील करती हूँ कि मेरी शिकायत पर ध्यान दिया जाय, और इन अधिकारियों को मेरे साथ दुर्व्यवहार करने से रोका जाय। यदि इन्होनें अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है तो उन्हें इस गलती की वाजिब सजा मिलनी ही चाहिए। यदि इन अफसरों ने मुझे परेशान करना बंद नहीं किया तो मुझे उच्च न्यायालयों का दरवाज़ा खटखटाना पड़ेगा।

मुझे इस हद तक परेशान किया जा चुका है, कि न केवल मुझे अपनी जान का खतरा है, बल्कि मेरे बच्चों की जान भी खतरे में है। अत: मैंने अपनी याचिका की प्रतिलिपियाँ अपने वकील और मानवाधिकार संस्थाओं के पास भी सुरक्षित रखवा दी हैं, ताकि यदि कोई अनहोनी होती है तो उचित कारवाही की जा सके।
मैं आशा करती हूँ कि मेरी प्रार्थना पर आप शीघ्र ही सहानुभूति पूर्ण निर्णय लेंगी।

भवदीया,

सईदा दीप,

९१-जी जोहर टाउन, लाहौर

०३००-८४४-५०७२


प्रतिलिपि निम्न को प्रेषित:

राष्ट्रपति, पाकिस्तान

प्रधान मंत्री, पाकिस्तान

मुख्य मंत्री, पंजाब

गवर्नर, पंजाब

डी.जी. आई.एस.आई.

डी.जी. आई.बी.

डी.जी. ऍफ़.आई.ए.

डी.जी. एम.आई.

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