उत्तर प्रदेश सरकार गुटखा प्रतिबंधित कर एफ़.एस.एस.ए. अधिनियम का पालन करे

[English] उत्तर प्रदेश सरकार को गुटखा प्रतिबंधित करना चाहिए क्योंकि गुटखा को खाद्य उत्पाद माना गया है और खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 (एफ़.एस.एस.ए.) के अनुसार किसी भी खाद्य उत्पाद में तंबाकू या निकोटीन नहीं हो सकती है। यह सीएनएस मीडिया संवाद का केंद्रीय संदेश था जो इन्दिरा नगर सी-ब्लॉक चौराहा स्थित प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त केंद्र में आयोजित हुआ था।


विश्व स्वास्थ्य संगठन अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार विजेता सर्जन प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि “एफ़.एस.एस.ए. के रेग्युलेशन 2.4.3 के अनुसार जो 5 अगस्त 2011 को भारत सरकार द्वारा जारी किया गया था – किसी भी खाद्य उत्पाद में तंबाकू या निकोटीन नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि पान मसाला, गुटखा या सुपारी चूंकि स्वाद के लिए ग्रहण की जाती हैं इसीलिए इनको खाद्य उत्पाद माना जाये”।

ऊ.प्र. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अहमद हसन ने प्रोफेसर डॉ रमा कान्त को लिखे पत्र में कहा कि: “भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भी तम्बाकू उत्पादों की अत्यधिक खपत के कारण प्रदेश की जनता कैंसर, हृदय रोग, श्वास  संबधी बीमारी एवं अन्य कई असाध्य रोगों की शिकार हो रही है। अत: इस सबंध में सरकार के स्तर पर अविलंब कार्यवाई की आवश्यकता है ताकि मूल्यवान मानव जीवन को बचाया जा सके”।

लोरेटो कान्वेंट की पूर्व वरिष्ठ शिक्षिका और सीएनएस संपादिका शोभा शुक्ला ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार ऊ.प्र. राज्य में 49% पुरुष और 17% महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। धूम्रपान (सिगरेट/ बीड़ी) करने वाली महिलाओं (4.6%) की तुलना में तीन गुना अधिक महिलाएं चबाने वाली तंबाकू (जैसे कि गुटखा) का सेवन (13.7%) करती हैं। धूम्रपान करने वाले पुरुष (23.9%) की तुलना में डेढ़ गुना अधिक पुरुष चबाने वाली तंबाकू (गुटखा आदि) का सेवन (35.4%) करते हैं।

भारत के अनेक राज्यों ने गुटखा प्रतिबंधित कर दिया है: मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, गोआ, हरयाणा, पंजाब, और गुजरात; और समाचार के अनुसार दिल्ली में गुटखा प्रतिबंद जल्दी ही लगने को है।

हमारा मानना है कि तंबाकू के सभी प्रकार के उत्पादनों पर प्रतिबंध लगना चाहिए क्योंकि यह स्थापित है कि तंबाकू ही जान लेवा रोगों का जनक है जैसे कि हृदय रोग, स्ट्रोक या पक्षघात, कैंसर, श्वास संबंधी रोग, मधुमेह आदि।

इस कार्यक्रम में अन्य लोग जो वक्ता थे उनमें डॉ संदीप पांडे, शोभा शुक्ला, राहुल कुमार द्विवेदी, रितेश आर्या, किरण जाइसवार, एवं बाबी रमाकांत प्रमुख थे। इसको जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, आशा परिवार, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस, द मूवमेंट ऑफ इंडिया, सच्ची मुच्ची, इंडियन सोसाइटी अगेन्स्ट स्मोकिंग और स्वास्थ्य को वोट अभियान ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था।

सीएनएस

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