महिला एवं बच्चों पर केन्द्रित होगा इस साल का विश्व हृदय दिवस

डा ऋषि सेठी, 
ह्रदय रोग विभाग, केजीएमयू
२९ सितम्बर को मनाये जाने वाले विश्व ह्रदय दिवस की इस बार की थीम कार्डियो वास्कुलर (हृदय-वाहिनी) रोग की रोकथाम और नियंत्रण पर केद्रित है---- विशेषकर महिलाओं और बच्चों के सन्दर्भ में. केजीएमयू के ह्रदय रोग विभाग के असोसिएट प्रोफ़ेसर डा ऋषि सेठी, के अनुसार, "यह एक भ्रान्ति है कि ह्रदय रोग एवं स्ट्रोक केवल अमीर और वृद्ध पुरुषों को ही होते हैं."

डॉ ऋषि सेठी ने बताया कि "वास्तविकता तो यह है कि ये रोग स्त्री एवं पुरुष दोनों को ही समान रूप से प्रभावित करते हैं, हालाँकि उनके खतरे को बहुत कम आँका जाता है. महिलाओं में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण ह्रदय रोग ही है तथा ३ में से १ महिला की मृत्यु का कारण ह्रदय रोग होता है. इसका मतलब यह हुआ कि हर मिनट एक महिला ह्रदय रोग से मरती है. अत: यह आवश्यक हो जाता है कि महिलायें कार्डियो वास्कुलर (हृदय-वाहिनी) रोग होने के खतरे को समझें तथा उचित सावधानी बरत कर स्वयं को और अपने परिवार को इस रोग से बचाएं।"

डा ऋषि सेठी का मानना है कि बच्चे भी इस रोग से सुरक्षित नहीं हैं और उनमें इस रोग का खतरा माँ के गर्भ में ही शुरू हो जाता है. फिर जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं तो अनउपयुक्त खानपान,   धूम्रपान और व्यायाम-रहित जीवनशैली के चलते यह खतरा और बढ़ जाता है. आधुनिकता की अंधाधुंध नक़ल के चक्कर में बच्चे फ़ास्ट-फ़ूड की और आकर्षित होते हैं, खेल के मैदान के बजाय कम्प्यूटर स्क्रीन खेलना पसंद करते हैं और कुछ देशों में वे परोक्ष धूम्रपान के शिकार तो होते ही हैं, साथ ही साथ तम्बाकू कंपनियों के लुभावने विज्ञापनों से आकर्षित हो कर स्वयं भी तम्बाकू के आदी हो जाते हैं.

तम्बाकू नियंत्रण को मजबूत करना कार्डियो वास्कुलर (हृदय-वाहिनी) रोगों को कम करने का एक प्रामाणिक उपाय है. जन स्वास्थ्य नीतियों में तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप के कारण स्वास्थ्य नीतियों के क्रियान्वन में बाधा पड़ती है. इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टूबेर्कुलोसिस एंड ल्ंग डिजीस के तंबाकू नियंत्रण के निदेशक डॉ0 एहसान लतीफ़ का मानना है कि गरीब देशों की सरकारें तम्बाकू कंपनियों के द्वारा दिए गए चंदे को एक उदार उपहार के रूप में गृहण करती हैं. सरकारों एवं नीति निर्धारकों को यह समझना चाहिए कि चालाक तम्बाकू उद्योग इन हथखण्डों के द्वारा स्वास्थ्य नीतियों में दखलअंदाज़ी करके अपने तम्बाकू व्यापर को बढ़ाती हैं और प्रभावकारी तम्बाकू नियंत्रण नीतियों को लागू  करने  में बाधा डालती हैं. कुछ लोगों की मदद करके वे नीतिज्ञों को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं. पर वे उन लाखों लोगों की असामयिक  मौत की ज़िम्मेदारी नहीं लेते जो उनके द्वारा बनाए व बेचे गए तम्बाकू पदार्थों के इस्तेमाल से हुईं। आवश्यकता इस बात की है कि  एशिया की सरकारें ऐसी नीतियाँ बनाएं जो डब्लू एच ओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टुबैको कंट्रोल (ऍफ़ सी टी सी)  के आर्टिकल ५.३  के अनुरूप हों. उन्हें चाहिए कि वे तम्बाकू पदार्थों पर टैक्स बढ़ा कर उस अतिरिक्त आमदनी को तम्बाकू नियंत्रण के कार्यों में लगाएं न कि उनसे दान लेकर उनके चंगुल में फँस कर तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रमों को नष्ट कर दे."

७ सितम्बर 2013 को बलरामपुर अस्पताल में  डब्लूएचओ ऍफ़सीटीसी के आर्टिकल ५.३ पर आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यशाला की रिपोर्ट को भी आज जारी किया गया. इस कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम की लखनऊ जिला एवं उप्र इकाइयों, स्वास्थ्य को वोट अभियान, सीएनएस, नेटवर्क फॉर अकाउंटबिलिटी ऑफ टुबैको ट्रांसनेशनल (एनएटीटी), हेल्थ जस्टिस और आशा परिवार के सम्मिलित तत्वाधान में किया गया था।

डॉ ऋषि सेठी ने बताया कि उप्र में 2011-2012 के दौरान 4500 एनजीओप्लास्टी और 2000 पेसमेकर जीवन रक्षक उपचार किए गए। पिछले साल की तुलना में इन हृदय रोग उपचार विधियों में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गयी है। उत्तर प्रदेश में अधिकतम हृदय रोग उपचार एसजीपीजीआई और केजीएमयू के हृदय रोग विभाग में ही किया गया है।

अपने हृदय रोग के खतरे को कम करने के लिए संतृप्त और ट्रांस-वसा, अधिक चीनी और नमक से युक्त भोजन से परहेज करें, आवश्यक शारीरिक परीश्रम और व्यायाम करें, और तंबाकू-शराब आदि से बचें।

सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
सितंबर 2013

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