सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने पूर्वांचल से बनाया जन आंदोलनों के नेताओं को उम्मीदवार

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), जो गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में विश्वास करती है ने पूर्वांचल की दो सीटों से लोक सभा चुनाव हेतु उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सोशलिस्ट पार्टी के कुलदीप नैयर, न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर, गिरीश कुमार पाण्डेय, ओंकार सिंह, संदीप पाण्डेय, एवं बॉबी रमाकांत ने बताया कि कुशीनगर सीट से मैत्रेय परियोजना के खिलाफ किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले जुझारु नेता गोवर्द्धन प्रसाद गोंड़ को उम्मीदवार बनाया है।

ज्ञात हो कि मैत्रेय परियोजना के तहत किसानों की उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। ज्यादातर किसान जिनकी जमीनें इस परियोजना में जा रही हैं इसका विरोध कर रहे हैं। सिर्फ गौतम बुद्ध की एक प्र्रतिमा स्थापित किए जाने का कोई औचित्य आम जनता को समझ नहीं आ रहा। हलांकि परियोजना में अस्पताल वगैरह भी स्थापित करने की बात है किंतु परियोजना की लागत का बड़ा हिस्सा मूर्ति पर ही खर्च होना है। इस परियोजना से स्थानीय लोगों का कोई भला नहीं होने वाला। विदेशी पर्यटकों को ध्यान में रख कर यह बनाई जा रही है। दिसम्बर 2013 में उ.प्र. के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने जा कर परियोजना का शिलान्यास भी कर दिया है। गोवर्द्धन गोंड़ को उस दिन गिरफ्तार कर गोरखपुर सर्किट हाऊस में रखा गया।

गोवर्द्धन गोंड़ ने बड़ी बहादुरी से सिर्फ एक वक्त भोजन ग्रहण कर लम्बा उपवास रखा है। वे किसानों के आंदोलन के प्रतीक बने हैं। उनकी वजह से ही किसानों की मुआवजा राशि भी सरकार ने बढ़ाई।

इसके पहले गोवर्द्धन गोंड़ गोंड़ जाति को अनुसूचित जाति से अनुसूचित जन जाति में शामिल किए जाने हेतु भी संघर्ष कर चुके हैं।

बलिया से सोशलिस्ट पार्टी ने भूतपूर्व ग्राम प्रधान सिंहाचवर चिंता देवी को उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया है जिनकी ग्राम पंचायत में स्थित एक कोका कोला संयंत्र के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर चिंता देवी ने इस कारखाने को बंद करवाया। इस कारखाने की वजह से भूगर्भ जल स्तर के नीचे जाने का और प्रदूषण की वजह से आस-पास के पर्यावरण एवं  जीव-जंतुओं को खतरा था। कुछ मछलियों के मरने की भी पुष्टि हुई थी। इसके अलावा कम्पनी ग्राम सभा की जमीन पर भी कब्जा किए हुई थी और और भूमि पर उसकी ललचाई नजर लगी हुई थी। 1 जनवरी 2006 को ग्राम वासियों ने श्रमदान कर कोका कोला को ग्राम सभा के एक चक मार्ग पर कब्जा करने से रोका।

चिंता देवी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व नव उदारवादी पूंजीवादी नीतियों के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक हैं।

सोशलिस्ट पार्टी अपना सौभाग्य समझती है इस किस्म के जमीनी जन आंदोलनों के नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्र से उसका उम्मीदवार बनने का फैसला लिया है।
 
सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
मार्च 2014

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