मायावती जी, हमारे लिए घर के बदले बुलडोज़र क्यों?

मायावती जी, हमारे लिए घर के बदले बुलडोज़र क्यों?
दलित
हितैषी सरकार ने दलितों-गरीबों को बेघर किया


१९ फ़रवरी को बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा के इशारे पर स्थानीय प्रशासन ने बर्बरतापूर्वक लखनऊ के डालीगंज छेत्र में गोमती नदी के तट पर नदवा बस्ती को तोड़ गिराया।

यह घटना प्रदेश सरकार एवं केंद्रीय सरकार दोनों की ही हर-गरीब-को-घर देने की नीति पर सवाल खड़े कर देती है.
बिना वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए हुए जिस बर्बरता एवं संवेदनहीनता के साथ प्रशासन ने बुलडोज़रों से घरों को तोड़ गिराया है, यह अमानवीय है। इन घरों को तोड़ने का और सैकड़ों लोगों को विस्थापित करने का जो कारण बताया जा रहा है कि गोमती नदी के तट पर निजी कंपनी द्वारा ‘विकास’ एवं सुन्दरीकरण आदि का कार्य कराया जाएगा, जिससे निजी कंपनियों को और पूंजीपतियों को ही लाभ मिलेगा, यह विकास का तरीका हमें स्वीकार नहीं है।


इसी के विरोध में विस्थापित लोगों ने एवं शहर के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने विधान सभा के सामने धरना प्रदर्शन किया है. इनकी मांग है कि विस्थापित लोगों को घर प्रदान किए जाएँ और इस तरह के 'विकास' को रोका जाए जिससे गरीब लोग विस्थापित होते हैं और सिर्फ़ पूंजीपतियों को ही लाभ मिलता हो।

डॉ संदीप पाण्डेय, एस आर दारापुरी, अरुंधती धुरु, चुन्नी लाल, एवं आशा परिवार और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के अन्य लोग

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