ग्राम स्वराज पर यकीन रखने वाले प्रत्याशियों का चुनावी घोषणा पत्र

अभी कुछ महीनों पहले, हरियाणा के बेवल गांव से एक ३४ वर्षीय स्वामी संजय ब्रह्मचारी प्रधानी का चुनाव जीते। सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले इस स्वामी ने चुनावी प्रचार के दौरान जनता से वादा किया था, ''अगर मैं जीता तो सभी निर्णय खुले में सारे गाँव की जनता के साथ ग्राम सभा में लिया करूंगा।'' जीतने के बाद उन्होंने ऐलान किया कि पिछले प्रधान से चार्ज वह सारे गाँव के सामने खुले में लेंगे। उनके इस ऐलान ने सारे प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। अगर स्वामी जी खुले में चार्ज लेंगे तो पुरानी सारी चोरियों का भंडाफोड़ हो जाएगा। एक दिन जब कुछ अधिकारी चार्ज देने आये तो गाँव के लोग सारे बही खाते लेकर बैठ गये। कुछ घंटों में ही ढेरों गडबडिया सामने आ गई।

- अगर मैं जीता तो मैं भी शपथ लेता हूँ कि हरियाणा के स्वामी जी महाराज की तरह मैं भी सभी निर्णय जनता के सामने, जनता के साथ मिलकर, सारे गाँव की खुली बैठक में ही लिया करूंगा। मैं वचन देता हूँ कि अपने से कोई निर्णय नहीं लूंगा।
- सबसे पहले मैं हरियाणा के स्वामी जी महाराज की तरह पुराने प्रधान से चार्ज सारे गाँव के सामने लूंगा।
- कानूनन साल में चार बार गाँव की खुली बैठक होनी चाहिए । मैं कम से कम हर महीने में एक बार जरुर गाँव की खुली बैठक बुलाऊंगा । जरूरत पड़ने पर महीने में अधिक बैठक भी बुलाऊंगा।
- पंचायत के सारे रिकार्ड और कागजात जनता के लिये हमेशा खुले रहेंगें। कभी भी किसी भी दिन जनता का कोई भी व्यक्ति पंचायत के सारे रिकार्ड देखकर उनकी प्रतियाँ ले सकता है। आपको सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ये आपके रिकार्ड हैं। मेरा इन पर कोई अधिकार नहीं है । जनता मालिक है। मालिक कभी भी आकर अपने रिकार्ड देख सकता है।
- गाँव में वही काम और वही कार्यक्रम चलाए जायेंगे जो जनता मालिक खुली बैठकों में तय करेगी । ये जनता की देख-रेख और संचालन में चलाए जायेंगें।
- सभी सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची केवल और केवल खुली बैठकों में ही बनेगी।
-यदि कोई सरकारी अधिकारी गाँव के संबंध में पैसा या कार्य मंजूर करने के लिए रिश्वत मांगेगा, तो मैं यह बात सारे गाँव की खुली बैठक बुलाकर सबके सामने रख दूंगा। गाँव वालों से चंदा इकट्ठा करके रिश्वत के पैसों का जिला क्लैक्टर के नाम डिमांड डाट बनवा कर उन्हें भिजवाया जाएगा और उनसे निवेदन किया जाएगा कि वे अपने उस अधिकारी कों रिश्वत के पैसे भिजवा दें और हमारा काम करवा दें। यह बात सभी स्थानीय अखबारों में छपवा दी जाएगी । मुझे उम्मीद है कि इसके बाद किसी की गाँव वालों से रिश्वत मांगने की हिम्मत नहीं होगी

देश
की पार्टियों ने देश को जाती और मजहब के नाम पर बाँट कर रोटियाँ सेकी। हमें गाँव को इकट्ठा करना होगा। अब हमारे गाँव को गाँव की ग्राम सभा चलाएगी। इस सभा में सभी जाति और धर्म के लोग बैठेंगे। औरत और मर्द बैठेंगे। जवान और बूढ़े बैठेंगे । १८ वर्ष की आयु से बड़ा हर व्यक्ति वहाँ बैठेगा ? ऐसा नहीं कि गाँव सभा में विवाद नहीं होंगे। बिल्कुल होंगे। हम लड़ेंगे, झगड़ेंगे पर अंत में निर्णय भी होंगे। हमारे गाँव कों हम चलायेंगे। बाहर के अफसरों और नेताओं का हमारे गाँव में हस्तक्षेप बिल्कुल बंद हो। देश, प्रांत, जिला और गाँव की राजनीति दूषित हो चुकी है। इसे तुरन्त नहीं सुधारा गया तो न गाँव बचेगा न देश। राजनैतिक शुद्धिकरण की दिशा में मैं आपका सहयोग चाहता हूँ।

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