मधुमेह और तपेदिक (टीबी) स्वास्थ्य कार्यक्रमों में समन्वयन जरूरी

अनेक मजबूत शोध और आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि मधुमेह (डाइबिटीस) और तपेदिक (टीबी) सह-रोगों में सीधा संबंध है। मधुमेह और टीबी सह-रोगों से जूझ रहे लोगों की संख्या इतनी है कि यह जरूरी हो गया है कि मधुमेह और टीबी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी आवश्यक समन्वयन हो। इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टीबी अँड लंग डीसीज (द यूनियन) के वरिष्ठ सलाहकार प्रोफेसर (डॉ) एंथनी हैरिस ने कहा कि जैसे एच0आई0वी0 और टीबी सह-संक्रमण एक चुनौती है उसी तरह से यदि पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो मधुमेह से भी टीबी महामारी में बढ़ोतरी हो सकती है।  डॉ हैरिस, सी-ब्लॉक चौराहा, इन्दिरा नगर स्थित प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त केंद्र पर वेबिनार द्वारा मीडिया संवाद को संबोधित कर रहे थे। इस मीडिया संवाद को स्वास्थ्य को वोट अभियान, आशा परिवार, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय ने आयोजित किया था।


सीएनएस संपादिका और लोरेटो कान्वेंट की पूर्व वरिष्ठ शिक्षिका शोभा शुक्ला ने कहा कि भारत में लगभग 6.13 करोड़ लोग मधुमेह के साथ जीवित हैं और करीब 10 लाख लोग मधुमेह के कारण प्रति वर्ष मृत होते हैं। भारत में प्रति वर्ष 19.8 लाख लोगों को टीबी रोग ग्रसित करता है और उनमें से 3 लाख लोग मृत होते हैं।

शोध के अनुसार मधुमेह होने पर टीबी रोग के होने का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है, और यदि व्यक्ति तंबाकू सेवन या धूम्रपान करता हो, तो टीबी रोग होने का खतरा 5 गुना तक बढ़ जाता है। टीबी रोग मधुमेहियों में अधिक गंभीर भी होता है। मधुमेहियों को टीबी होने से उनमें शुगर नियंत्रित करना भी मुश्किल हो जाता है।

केजीएमसी के पलमोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर (डॉ) सूर्य कान्त ने कहा कि उनके टीबी रोगियों में लगभग 3-4% ऐसे रोगी होते  हैं जिनको मधुमेह होती है पर जांच नहीं हुई होती है। चिकित्सकों को 40 साल से अधिक के टीबी रोगियों में, जिनको वज़न गिरने, भूख या प्यास बढ़ने की शिकायत हो, यह निश्चित कर लेना चाहिए कि मधुमेह सह-रोग नहीं है। उसी तरह जिस टीबी रोगी में टीबी उपचार 2-4 हफ्ते में नतीजा न दे रहा हो उसकी मधुमेह की जांच करनी चाहिए”।

‘द यूनियन’ के दक्षिण पूर्वी एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के शोध फ़ेलो डॉ एस श्रीनाथ ने बताया कि ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं द यूनियन की संयुक्त रूप से प्रकाशित मधुमेह-टीबी नियंत्रण के लिए ‘फ्रेमवर्क’ के एक अंश को भारत के विभिन्न राज्यों में परखा जा रहा है’। इस शोधकार्य की पहली मूल्यांकन बैठक एस माह के अंत में है। उम्मीद है कि भारत सरकार इन शोध और आंकड़ों के आधार पर मधुमेह-टीबी सह-रोग से निबटने के लिए उचित स्वास्थ्य एवं विकास कार्यक्रमों में आपसी समन्वयन बढ़ाएगी।

इस मीडिया संवाद को प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त, डॉ संदीप पाण्डेय, शोभा शुक्ला, राहुल द्विवेदी, रितेश आर्या, किरण जैसवार और बाबी रमाकांत का समर्थन प्राप्त था।

सीएनएस

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