सुनियोजित एवं समन्वयित मलेरिया कार्यक्रम आवश्यक

[English] विश्व स्वास्थ्य संगठन की नयी 2012 मलेरिया रिपोर्ट जारी करते हुए रोल बैक मलेरिया संगठन ने मलेरिया का विकास और स्वास्थ्य प्रणाली से संबंध पर प्रकाश डाला। मलेरिया से मृत्यु तक हो सकती है यदि समोचित इलाज न मिले। हर साल सिर्फ भारत समेत एशिया में 2 अरब लोग मलेरिया इस प्रभावित होते हैं। इस 2012 मलेरिया रिपोर्ट पर मीडिया संवाद में चर्चा आयोजित हुई थी। इस मीडिया संवाद को स्वास्थ्य को वोट अभियान, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (सीएनएस), हेल्थ राइटर्स, आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। आरबीएम की फिल्म का भी चित्रण किया गया।


सीएनएस संपादिका और लोरेटों कान्वेंट की पूर्व शिक्षिका शोभा शुक्ला ने कहा कि यह पहली मलेरिया रिपोर्ट है जो भारत समेत एशिया के अन्य देशों में मलेरिया पर प्रकाशबिंदु डालती है। 21.6 करोड़ लोग विश्व में मलेरिया से जूझते हैं और 6.5 लाख लोग मलेरिया के कारणवश मृत होते हैं जिनमें अधिकांश 5 साल से कम उम्र के बच्चे हैं।

मलेरिया का इलाज यूं तो 48 घंटे में हो जाना चाहिए परंतु यह घातक भी हो सकती है यदि जांच और इलाज में देरी हो जाये। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया को नंबर 1 का संक्रामक घातक रोग माना है।

भारत और एशिया के अन्य देशों में मलेरिया
एशिया के 20 देशों में मलेरिया महामारी का रूप धारण किए हुए है। एशिया के देशों में 3 करोड़ लोग प्रति वर्ष मलेरिया से जूझते हैं और 42,000 लोग मृत होते हैं। भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बर्मा, पापा न्यू गिनी, आदि में मलेरिया का अनुपात सर्वाधिक है।  2000 और 2010 के दरमियान भारत में अस्पताल में मलेरिया के कारण भर्ती और मृत्यु के दर में 25% गिरावट आई है। 20% से भी कम लोग भारत में मलेरिया-नाशक दवा युक्त मच्छरदानी का प्रयोग कर पाते हैं और 70% जनता मलेरिया के खतरे से जूझती है। मलेरिया के कारण मृत्यु दर को कम करने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान मलेरिया नाशक दवा युक्त मच्छरदानी और आर्टीमिसिनीन-मिश्रित मलेरिया उपचार की दवा का रहा है। 2008-सितंबर 2011 तक भारत में 1.37 करोड़ मलेरिया नाशक दवा युक्त मच्छरदानी वितरित की गयी थीं।

रोल बैक मलेरिया के निदेशक डॉ फताऊमाता नफ़ों-त्राओरे का कहना है कि एशिया में विश्व में दूसरी सबसे बड़ी मलेरिया महामारी पनप रही है। आर्थिक तंगी और अन्य विकास से जुड़े कारणों से मलेरिया को बढ़ावा मिलता है। मलेरिया नियंत्रण को सशक्त राजनैतिक बल और आर्थिक निवेश की भी आवश्यकता है।

मलेरिया दवा प्रतिरोधकता
सिर्फ आर्टीमिसिनीन से मलेरिया उपचार करना सही नहीं है और इससे दवा प्रतिरोधकता पनपती है। इसीलिए अकेली आर्टीमिसिनीन के बजाय आर्टीमिसिनीन मिश्रित मलेरिया उपचार की दवा को ही सही माना गया है। यदि मलेरिया रोगियों को आर्टीमिसिनीन से दवा प्रतिरोधकता हो गयी तो किस दवा से उनका उपचार करेंगे? इसीलिए मलेरिया दवा प्रतिरोधकता को नियंत्रित करना अति-अवश्यक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मलेरिया कार्यक्रम के निदेशक डॉ रोबर्ट न्यूमैन ने कहा कि आर्टीमिसिनीन दवा प्रतिरोधकता को कम करने की प्रभावकारी ढंग से योजना को लागू करना चाहिए। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अकेली आर्टीमिसिनीन दवा की क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगाया था। परंतु भारत में सबसे अधिक यह अकेली आर्टीमिसिनीन दवा बनती है। इसपर कब प्रतिबंध लगेगा?

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेटरिक्स एंड इवैल्यूएशन के अनुसार 1980 और 2010 के बीच 12 लाख लोग विश्व में मलेरिया से मृत हुए। यह संख्या अन्य आंकड़ों से दोगुनी है क्योंकि सिर्फ 5 साल से कम बच्चों की मलेरिया द्वारा मृत्यु को ही गिना गया था। इंस्टीट्यूट ने पाया कि 5.5 लाख लोग जो 5 साल से अधिक आयु के हैं, उनकी भी मृत्यु मलेरिया के कारण हुई।

समन्वयित मलेरिया कार्यक्रम
मलेरिया नाशक दवा युक्त मच्छरदानी और आर्टीमिसिनीन-मिश्रित मलेरिया के उपचार की दवा के अलावा सरकार से हमारी अपील है कि अन्य विकास से जुड़े उन समस्याओं को भी ध्यान दे जिनके कारणवश लोग मलेरिया का शिकार होते हैं – जैसे कि अकेली आर्टीमिसिनीन दवा का क्रय-विक्रय, मच्छर नियंत्रण, आदि।

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त, डॉ संदीप पांडे, शोभा शुक्ला, राहुल द्विवेदी, रितेश आर्या, किरण जाइसवार, एवं बाबी रमाकांत ने इस मीडिया संवाद में सक्रीय भाग लिया। इस मीडिया संवाद को, स्वास्थ्य को वोट अभियान, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (सीएनएस), हेल्थ राइटर्स, आशा परिवार, और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय ने संयुक्त रूप से आयोजित  था।

सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस 

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