मलेरिया उन्मूलन क्षेत्रीय एशिया-पैसिफिक नेटवर्क से अब भारत भी जुड़ा

भारत अब क्षेत्रीय एशिया पैसिफिक मलेरिया उन्मूलन नेटवर्क से जुड़ गया है जिसमें अभी तक 16 देश प्रतिभागी थे। भारत ने भी मलेरिया उन्मूलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। क्षेत्रीय मलेरिया उन्मूलन नेटवर्क के सदस्य के रूप में भारत पहली बार 24 मार्च को वियतनाम में होने वाली 7वीं सालाना बैठक में भाग लेगा। एशिया पैसिफिक क्षेत्र में मलेरिया पीड़ित लोगों के आंकड़े देखते हुए भारत दूसरे नंबर पर है जो अत्यंत चिंताजनक है। क्षेत्रीय नेटवर्क से जुडने से भारत ने भी 2030 तक मलेरिया समाप्त करने के लिए समर्पित है।

डॉ एसी धारीवाल जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के निदेशक हैं, उन्होने कहा कि भारत अन्य क्षेत्रीय मलेरिया उन्मूलन नेटवर्क के 16 देशों के साथ, समन्वयित मलेरिया उन्मूलन नीति को दिशा देगा।

भारतीय सीमा पर मलेरिया अनुपात में गिरावट लाने के साथ-साथ भारत 2017 तक उन्मूलन की ओर मलेरिया कार्यक्रम सक्रिय करेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में मलेरिया अनुपात 2000 की तुलना में आधा हो गया है। परंतु 2014 में इसके बावजूद 10,70,514 लोगों को मलेरिया हुआ और 578 लोग मलेरिया के कारण मृत हुए।

मलेरिया उन्मूलन के लिए, भारत मलेरिया जांच, मलेरिया की दवा प्रतिरोधकता को नियंत्रित करना, मच्छर रोकधाम, दवा छिड़काव, आदि पर ज़ोर देगा।

भारत ने मलेरिया उन्मूलन के प्रति समर्पण सही समय पर दिया है क्योंकि म्यांमार-भारत सीमा के बहुत निकट, दवा-प्रतिरोधक मलेरिया की रिपोर्ट आई है - जो अत्यंत चिंताजनक है और मलेरिया उन्मूलन प्रयासों को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
१९ मार्च २०१५

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