पाईल्स (बवासीर) चिकित्सकीय मानक दिशानिर्देशों को सभी स्वास्थ्यकर्मी अपनाएं

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त आपरेशन-कक्ष में
[वेबिनार रिकॉर्डिंग] ५० वर्ष से अधिक लोगों में ५०% से अधिक को कम-से-कम एक बार पाईल्स या बवासीर सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद भी पाईल्स या बवासीर चिकित्सकीय प्रबंधन के मानक दिशानिर्देश नहीं हैं कि सभी चिकित्सकीय विशेषताओं के स्वास्थ्यकर्मी वैज्ञानिक रूप से स्थापित मानकों से ही पाईल्स या बवासीर का इलाज करें. हर सर्जन या फिजिशियन अपने संज्ञान से उत्तम इलाज करता है. पाईल्स या बवासीर के उपचार सम्बन्धी मानक दिशानिर्देश आवश्यक हैं" कहना है किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त का, जो वर्त्तमान में पाईल्स तो स्माइल्स के संस्थापक-निर्देशक हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार से सम्मानित प्रो० रमा कान्त ने बताया कि "पाईल्स का मानकों के हिसाब से इलाज और भी अधिक जटिल हो जाता है क्योंकि पाईल्स से जुड़े मुद्दों पर शर्म, चुप्पी, और हिचकिचाहट की मोटी चादर है. इस मुद्दे पर वार्ता और चर्चा होनी जरुरी है जिससे कि लोग इसकी सही जांच बिना-विलम्ब करा पायें, और सही इलाज भी प्राप्त कर सकें."

प्रो० रमा कान्त ने बताया कि बवासीर दोनों पुरुषों और महिलाओं में आम है. चिरकालिक कब्ज़, बार-बार होने वाले दस्त, मोटापा, व्यायाम या शारीरिक परिश्रम न करना, शौच के दौरान जोर लगाना और लम्बे समय तक बैठे रहना, आदि कुछ कारण हैं जिसके वजह से पाईल्स या बवासीर होने की सम्भावना अधिक बढ़ जाती है. ५० साल से ऊपर लगभग ५०% लोगों को कम से कम एक बार ऐसी समस्या हो चुकी होती है और ७० वर्ष से ऊपर लगभग ८५% लोगों को बवासीर से जूझना पड़ता है."

प्रो० रमा कान्त ने कहा कि "बवासीर के नवीन विधि डीजीएचएएल और आरएआर द्वारा उपचार में रोगी कुछ ही घंटे अस्पताल में रह कर, दूसरे दिन से ही सामान्य रूप से कार्य कर सकता है।" बगैर चीरा लगाए, एक अत्याधुनिक विधि के द्वारा बवासीर का इलाज करने में सिद्धहस्त, प्रो० (डॉ) रमा कान्त कई सालों से नवीन विधियों ‘डी0जी0एच0ए0एल0 और आर0ए0आर0 से बवासीर या पाइल्स का उपचार कर रहे हैं। वें आस्ट्रिया एवं तुर्की के विश्व-विख्यात बवासीर उपचार एवं शोध केन्द्रों में प्रशिक्षित भी हैं।

बवासीर के नवीन विधि डीजीएचएएल और आरएआर से प्रो० रमा कान्त ३५०० से अधिक रोगियों का उपचार कर चुके हैं. इन मरीजों के आंकड़ें देखें तो इलाज उपरान्त २.८ दिन में यह अपने कार्य पर वापस जा पाए थे. बवासीर के नवीन विधि डीजीएचएएल और आरएआर द्वारा न केवल रोगी को पाईल्स से आराम मिलता है बल्कि अधिक संगीन बीमारियों के होने का खतरा भी टलता है.

प्रो० रमा कान्त ने विश्व पाईल्स दिवस के पहले अपील की कि हम लोग स्वस्थ जीवन शैली चुने, इससे सिर्फ पाईल्स ही नहीं अत्यधिक लाभकारी परिणाम होंगे. उदहारण के तौर पर, भोजन में अधिक फाइबर, फल और पानी का पर्याप्त सेवन करें, नियमित व्यायाम और शारीरिक परिश्रम करें, यदि कोई भी पाईल्स होने का लक्षण हो तो चिकित्सक को दिखाए जरूर जिससे कि बिना विलम्ब जांच और सही इलाज हो सके.

सिटीजन न्यूज़ सर्विस (सीएनएस)
१५ नवम्बर २०१५

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