साइकल ट्रैक बड़ी उपलब्धि है या फिर सुपर-ऐक्स्प्रेसवे?

एक्सप्रेसवे से नज़ारा कुछ और पर नाले पर
रहने वालों की हकीकत कुछ और (सीएनएस फोटो)
वर्त्तमान में अधिकांश आबादी साइकल, पैदल और सार्वजनिक यातायात साधन से चलती है, पर हमारे नेता हमें बताते हैं कि बड़ी चौड़ी सड़कें इक्स्प्रेसवे जिसपर मोटोरगाड़ी दौड़ेंगी वो बड़ी उपलब्धि है. पैदल चलने वालों और साइकिल आदि चलाने वालों के लिए यह बड़ी-चौड़ी सड़कें खतरनाक और असुरक्षित भी हो रही हैं. हो सकता है यही हमें भी लगने लगा हो कि बड़ी चौड़ी सड़कें ही विकास का मापक हैं. पर सच्चा सतत विकास उसे ही कहा जाएगा जिसमें सभी लोग सम्मान से समानता के साथ जीवन यापन कर सकें. हमारी सरकार की नीतियों को अधिकांश आबादी की ज़रूरतों को प्राथमिकता के साथ पूरा करना चाहिए.

यदि सतत विकास के प्रति सरकार सच्चे मायने में वचनबद्ध है तो जरा सोचिये कि ऐसी व्यवस्था संभव ही नहीं है जहाँ सभी लोग बड़ी-बड़ी कारें चलायें पर ऐसी व्यवस्था संभव है कि अमीर-गरीब सभी आरामदायक और सुरक्षित सार्वजनिक यातायात साधन पर चलें. सिंगापुर, लन्दन, अमरीका, जापान, आदि में यह आम बात है कि अमीर-गरीब सभी सार्वजनिक यातायात साधन पर चल रहे हों. पर्यावरण की दृष्टि से भी तेल/ इंधन के कुँए सीमित हैं और वो दिन दूर नहीं जब तेल के कुँए सूख चुके होंगे. पर्यावरण प्रदूषण भी मोटर-कार से अधिक होता है. इसलिए कार-वाली व्यवस्था सतत हो ही नहीं सकती और हमको वैकल्पिक व्यवस्था, जो पर्यावरण को नुक्सान न पहुंचाए और सबके सतत विकास का परिचायक हो, वैसी बनानी पड़ेगी.

जनता के पैसे से बनी सड़कें सबकी हैं - अमीर ग़रीब सभी उसका उपयोग करते हैं पर हम सब को मालूम है कि "जिसकी गाड़ी जितनी बड़ी" वो उतना ही कानून को ताक पर रख कर ऐसे चलता है जैसे कि सड़क उनकी निजी सम्पत्ति है!

यह भी सोचिए कि सरकारी गाड़ीचालक कैसे सड़कों पर गाड़ियाँ चलाते हैं? हम आमजन को पता है कि सरकारी गाड़ियों में बच्चे स्कूल जाते दिख जाते हैं, घर परिवार के लोग बाज़ार जाते दिख जाते हैं, और सरकारी गाड़ियाँ सड़क जाम करते हुए बेपरवाह हो कर पार्क रहती हैं, रेल्वे स्टेशन और ऐयरपोर्ट पर सरकारी गाड़ियाँ बिना पार्किंग का पैसा दिए गेट के सबसे क़रीबी वीआईपी जगह पर खड़ी होती हैं, आदि। सबसे पहले यह आवश्यक है कि इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारी गाड़ियाँ तो कम से कम यातायात नियमों का पालन करें!

साइकिल ट्रैक कैसे बड़ी उपलब्धि?

अखिलेश यादव सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है कि कम-से-कम लखनऊ में साइकल ट्रैक कुछ प्रमुख सड़कों पर बन गया। मैं लगभग रोज़ाना इन साइकल ट्रैक का उपयोग करते हुए साइकल से या पैदल निकलता हूँ। 2015 अगस्त में मैंने अपनी कार बेच दी थी. जून 2015 से मैं साइकल, पैदल, सार्वजनिक यातायात साधन, और ज़रूरत पड़ने पर घर या निकट लोगों की कार माँग कर चलाता भी हूँ.

यह सच बात है कि कभी-कभी साइकल ट्रैक पर मोटरसाइकल खड़ी रहती हैं या लोग दुकान लगाए हैं या बैठे हैं या साइकल ट्रैक ऐसी हालत में है कि न पैदल ओर और न ही साइकल से इस्तेमाल किया जा सके, इत्यादि. पर अनेक जगह साइकिल ट्रैक उपयोग करने जैसी हालत में भी है.

साइकल ट्रैक जब उपयोग करने की सूरत में होता है तो जो लोग पैदल या साइकल से चलते हैं वो ही सबसे पहले बुलंदी से बताए कि साइकल ट्रैक उपलब्धि है या नहीं? मोटर गाड़ियों से सड़कों पर चलने वाले लोगों की टिप्पणी खोखली है तब तक जब तक वे पैदल या साइकल से साइकल ट्रैक का उपयोग न करे। जो लोग रोज़ाना साइकल चलाते हैं और जीवन यापन के लिए पैदल चलते हैं और सार्वजनिक यातायात का उपयोग करते हैं और जिनकी जनसंख्या कार में सवारी करने वालों की तुलना में सैंकड़ों गुना अधिक है, वे ही निर्णय करें कि यातायात व्यवस्था सिर्फ़ कार वालों के लिए हो या सबके लिए?

जहाँ-जहाँ साइकिल ट्रैक उपयोग की हालत में नहीं है वहाँ इसके लिए जिम्मेदार हैं वो लोग जो अधिकाँश आबादी की जरूरतों के प्रति असंवेदनशील हैं और सिर्फ चंद मोटर-कार वाली गाड़ियों के लिए ही यातायात व्यवस्था सुविधाजनक बनाना चाहते हैं. गौर करें कि जो मोटर साइकिल को साइकिल-ट्रैक पर खड़ी करते हैं वो दबंगी करते हैं और अपनी ही असंवेदनशीलता और गैर-जिम्मेदारी वाला रवैया उजागर करते हैं.

यह मूलभूत विरोधाभास मिटाना अतिआवश्यक है. सड़कों पर यातायात व्यवस्था ऐसी चाहिए जिसमें अधिकांश जनता सुरक्षित और सुविधाजनक तरीक़े से चल सके. चंद मोटर-गाड़ी वालों को तकलीफ़ हो तो हो पर करोड़ों लोगों को तो सुविधा होगी!

यातायात दुर्घटनाएँ असमय-मृत्यु का एक बड़ा कारण  

यातायात दुर्घटनाएँ असमय मृत्यु का एक बड़ा कारण हैं. भारत सरकार ने 190 से अधिक देशों की सरकारों के साथ संयुक्त राष्ट्र 2015 महासभा में यह वादा किया है कि सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals/ SDGs), 2030 तक पूरे करेंगे। इनमें से एक लक्ष्य है कि सड़क दुर्घटनाएँ और इनमें होने वाली मृत्यु 50% 2020 तक कम करेंगे। बिना सड़कें अधिकांश आबादी के लिए सुरक्षित किए यह लक्ष्य कैसे पूरे करेंगे?

आधी सड़क हो मोटर-रहित वाहन और पैदल चलने वालों के लिए: डॉ संदीप पाण्डेय

मग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता और सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ संदीप पाण्डेय ने सिटीजन न्यूज़ सर्विस (सीएनएस) से कहा कि सरकार को आधी सड़क सिर्फ बिना-मोटर के वाहन (साइकिल, साइकिल रिक्शा, ठेला आदि) और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए और बाकि बची आधी सड़क पर एक कतार में सीमित गति से बिना-हॉर्न बजाये मोटर वाहन चलें.

अखिलेश यादव सरकार के साइकल ट्रैक ने लखनऊ में पैदल और साइकल पर चलने वालों को सुरक्षा और सुकून दिया है जो प्रशंसनीय है. पर अभी शहर की सभी सड़कों पर साइकिल ट्रैक बनना शेष है.

बाबी रमाकांत, सीएनएस (सिटीजन न्यूज़ सर्विस)  
12 फरवरी 2017

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