टीबी से बचाव और टीबी के इलाज में है सीधा नाता

टीबी फैलने से रोकना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2015 में 28 लाख टीबी के नए रोगी चिन्हित हुए, जो 2014 की तुलना में 6 लाख अधिक है. भारत में 2015 में 480000 टीबी मृत्यु हुईं जो 2014 की तुलना में लगभग दोगुनी हैं. टीबी का इलाज भी सभी जरुरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है. एक ओर भारत सरकार का दावा है कि टीबी 2025 तक समाप्त हो जाएगी और दूसरी तरफ यह आकड़ें जो अत्यंत संगीन स्थिति का संकेत दे रहे हैं. हर टीबी रोगी को पक्की जांच और असरकारी दवा नहीं मिलेगी तो टीबी फैलने से कैसे रुकेगी?

संयुक्त राष्ट्र में भारत सरकार ने अन्य 194 सरकारों के साथ वचन लिया कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals/ SDGs) को हासिल किया जायेगा जिनमें से एक है 2030 तक टीबी समाप्त करना. विश्व स्वास्थ्य असेंबली 2014 में भारत सरकार ने अन्य सरकारों के साथ 'WHO End TB Strategy' (विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीबी उन्मूलन की निति को पारित किया. मार्च 2017 में स्वास्थ्य मंत्रियों के एक सम्मलेन में भारत के जेपी नद्दा (केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री) ने दक्षिण पूर्वी एशिया देशों के अन्य स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ 2025 तक टीबी के उन्मूलन के प्रति वचनबद्धता व्यक्त की.

हम लोग टीबी के फैलने तक पर प्रभावकारी अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं जो बेहद खेद का विषय है.

टीबी से बचाव और टीबी के इलाज में है सीधा नाता

सीएनएस (सिटीजन न्यूज़ सर्विस) की निदेशिका शोभा शुक्ला ने बताया कि टीबी से बचाव और इलाज दोनों में ही है सीधा नाता. कल्पना करें कि सभी टीबी रोगियों को चिन्हित किया गया और सभी को प्रभावकारी दवाओं से इलाज प्राप्त करवाया गया तो टीबी फैलने में स्वत: ही विराम लग जायेगा. जब तक हर टीबी रोगी को प्रभावकारी इलाज नहीं प्राप्त होगा, तब तक टीबी फैलने का खतरा मंडराता रहेगा. हकीकत यह है कि एक-तिहाई टीबी रोगियों के बारे में सरकारी टीबी कार्यक्रम को कोई ठोस जानकारी तक नहीं है.

न केवल अस्पताल या स्वास्थ्य केन्द्र में संक्रमण नियंत्रण प्रणाली मज़बूती से लागू हो बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर और घर में भी इसको लागू करना आवश्यक है। असंतोषजनक संक्रमण नियंत्रण के कारण टीबी जैसे संक्रामक रोग फैलते हैं। ज़रा सोचिए कि नवजात शिशु या बहुत छोटे बच्चे को टीबी कैसे हो जाती है? जाहिर है किसी निकट व्यसक से ही संक्रमण फैला होगा।

दक्षिण अफ़्रीका में शोध से हाल ही में यह ज्ञात हुआ कि 69% अति-दवा प्रतिरोधक टीबी (XDR-TB) लोगों को असंतोषजनक संक्रमण नियंत्रण के कारण किसी अन्य रोगी से संक्रमित होकर हुई। इस शोध के पहले हम सब यही मानते थे कि अधिकांश अति-दवा प्रतिरोधक टीबी, दवाओं के दुरुपयोग और अनुचित इस्तेमाल से उत्पन्न होती है - जो सही बात है - पर इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि यदि संक्रमण नियंत्रण संतोषजनक हो तो 69% अति-दवा प्रतिरोधक टीबी को फैलने से रोकना सम्भव है। बाकि के 31% अति-दवा प्रतिरोधक टीबी को भी रोकना सम्भव है यदि दवाओं का दुरुपयोग न हो और अनुचित इस्तेमाल न हो।

इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरक्लोसिस एंड लंग डिजीज के निति निदेशक पॉल जेन्सेन ने बताया कि संक्रमण नियंत्रण को नज़रंदाज़ करना न केवल राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम के लिए अहितकारी है बल्कि अन्य संक्रामक रोगों के नियंत्रण को भी निष्फल करता है.अस्पताल हो या सामुदायिक जगह या घर, संक्रमण नियंत्रण को बड़ी प्राथमिकता देनी चाहिए.


बाबी रमाकांत, सीएनएस (सिटीजन न्यूज़ सर्विस)
24 मार्च 2017

No comments: