इंडियन जस्टिस पार्टी के उम्मीदवार बहादुर सोनकर की राजनैतिक हत्या

इंडियन जस्टिस पार्टी के उम्मीदवार बहादुर सोनकर की राजनैतिक हत्या
उदित राज

जाति, अपराध, साम्प्रदायिकता एवं कालाधन भारतीय राजनीति को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं | अपराधी काले धन के सहारे चुनाव लड़ रहे हैं और जातीय एवं साम्प्रदायिक भावनाओं को भुनाने में भी पीछे नहीं हैं | बहादुर सोनकर, जो जौनपुर से इंडियन जस्टिस पार्टी के लोक सभा के प्रत्याशी थे, की हत्या कर दी गयी | दुर्भाग्यवश उ.प्र. की सरकार ने इसे आत्महत्या करार दिया |


श्री बहादुर सोनकर की लटकी लाश का छायाचित्र एवं परिस्थितियों का विवरण संलग्न किया जा रहा है | वे ८ अप्रैल,२००९ से अपनी जान की रक्षा के लिए प्रशासन से गुहार लगाते रहे, सुरक्षा नहीं मिली और अंत में १३ अप्रैल,२००९ को मारकर बबूल के पेड़ से लटका दिया गया | इन परिस्थितियों में हमारे सामने विकल्प सीमित थे और जहाँ भी अपराधी लड़ रहे थे, उनके खिलाफ समर्थन दिया और बसपा के अपराधियों को हराने के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का पुरजोर समर्थन | ऐसे में हमने स्वयं का प्रचार करने के बजाय गुंडों को हराना उचित समझा | सबसे ज्यादा दुःख की बात यह है की एडिशनल डीजी सीबीसीआईडी के नेतृत्व में जाँच की गयी और हत्या को आत्महत्या करार दिया गया | जनतंत्र के लिए यह काला धब्बा है | जब से हम लोग सीबीआई से जाँच की मांग कर रहे हैं, लगातार प्रदेश अध्यक्ष, श्री कालीचरण और प्रदेश महासचिव मो. इसरार उल्ला सिद्दीकी सहित मुझे धमकियाँ मिल रही हैं कि जो हस्र श्री बहादुर सोनकर का हुआ, वही हम लोगों का होगा | अब हम लोगों ने तय कर लिया है कि अंजाम जो भी कुछ हो अपराधीकरण के खिलाफ लडाई लड़ना है | यह एक अवसर है, जहाँ से अपराधीकरण के खिलाफ लडाई लड़ी जा सकती है | आपसे आग्रह है कि जिस स्तर पर आप सहयोग दे सकते हैं दें, ताकि सीबीआई से जाँच होने के साथ-साथ हमारी राजनीति अपराधमुक्त हो जाए | पिछली राष्ट्रीय एकता परिषद् की बैठक में हमने जो वक्तव्य दिया था, उसकी भी प्रति संलग्न कर रहा हूँ | हमने सावधान किया था कि राजनीति का जातीयकरण देश की एकता व अखंडता के लिए बहुत खतरनाक है |

जौनपुर लोक सभा क्षेत्र से इंडियन जस्टिस पार्टी के उम्मीदवार बहादुर सोनकर की राजनैतिक हत्या की परिस्थितियों का संक्षिप्त विवरण

१३ अप्रैल को इंडियन जस्टिस पार्टी के जौनपुर लोकसभा के प्रत्याशी श्री बहादुर सोनकर की हत्या कर दी गयी थी | ८ अप्रैल को सीओ , एसओ, एवं चौकी इंचार्ज ने फोन करके दबाव बनाया था कि सोनकर नामांकन वापस ले लें | इस बात की शिकायत सोनकर ने ९ अप्रैल को जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं चुनाव पर्यवेक्षकों की बैठक में की थी | उसके बाद लगातार १०,११, व १२ अप्रैल को प्रशासन को बताया जाता रहा | मीडिया में भी खबरें छपती रहीं | १३ अप्रैल की सुबह लगभग ३ बजे जब बहादुर सोनकर के घरवालों ने उन्हें सोता हुआ न पाया तो उन्हें खोजने का प्रयास किया और पुलिस को भी खबर दी |

उ.प्र. सरकार ने इस मामले की जाँच एडिशनल डीजी, सीबीसीआईडी, को सौंपी और उन्होंने १९ अप्रैल को अंतरिम रिपोर्ट देते हुए कहा कि यह आत्महत्या का मामला है | निम्न तथ्यों से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह आत्म हत्या नहीं, हत्या का मामला है-


1. अगर श्री सोनकर को आत्म हत्या करनी होती तो वे पहले से आत्म रक्षा की गुहार क्यों लगाते ?
2. उनकी चप्पल वहीं पाई गई जहाँ वे सो रहे थे और बिस्तर दूर रास्ते में पाया गया | इससे स्पष्ट हो जाता है कि उनका गला या तो वहीं घोट दिया गया था या उनका मुंह दबाकर ले जाया गया |
3. उस दिन रात को इनके घर की बिजली काट दी गयी |
4. १२ अप्रैल की रात में ११:२९ बजे मो. संख्या ९६९६२४८५५६ से बहादुर सोनकर के भाई के मो. नंबर. ९३३६५२२००७ पर फोन आया कि ट्रक से सामान उतरवा लो | बहादुर सोनकर सब्जी और फल का काम करते थे और उस दिन ट्रक आने की कोई आशा नहीं थी | इसलिए उनके भाई घर से बाहर नहीं गए, साजिश यह थी कि भाई बाहर चले जाएँ तो उन्हें घर में ही मार दिया जाए |
5. वे घर से लगभग ७०० मीटर दूर स्थित ऐसे बबूल के पेड़ पर लटके पाए गए, जिस पर चढ़ना असंभव है | इससे जाहिर होता है कि उन्हें मारकर सीढ़ी से लटकाया गया था |
6. पोस्टमार्टम में बहादुर सोनकर के सिर पर चोट, गर्दन के पीछे की हड्डी टूटी और पेट में भी चोट पाई गई है | जिससे स्पष्ट है कि उन्हें लटकाने से पहले मारा गया है |
7. यदि बहादुर सोनकर को आत्म हत्या ही करनी होती तो वे घर में कर सकते थे या नदी में कूदकर | उन्हें दूर जाकर बबूल के पेड़ पर करने की क्या जरुरत थी, जिस पर चढ़ना लगभग असंभव था |
8. श्री बहादुर सोनकर के पैरों में मिटटी लगी थी | यदि वे पेड़ पर चढ़कर गए होते तो ऐसा नहीं होता |
9. जिस गमछे से उनको लटकाया गया था, वह उनका नहीं था |
10. हत्या के दिन ही उ.प्र.सरकार के मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने कहा कि इसमें सपा की साजिश है | अगर ऐसा है तो सरकार को सीबीआई से जाँच कराने में हिचक क्यों है ?
11. बहादुर सोनकर की हत्या के कारण दलितों विशेषकर खटीकों में आक्रोश है, अगर सरकार के दामन साफ़ हैं तो सीबीआई से जाँच कराकर दाग क्यों नहीं छुडा लेती ?
12. १९ अप्रैल को प्रेस वार्ता में डीजी पुलिस ने कहा कि पुलिस वालों ने चुनाव में बैठक की सूचना के सम्बन्ध में फोन किया था | डीजी शायद यह नहीं जानते कि यह काम पुलिस का नहीं, बल्कि चुनाव करने वाली एजेंसी/ रिटर्निंग ऑफिस का है | उन्होंने कहा कि पुलिस ने ९ अप्रैल को फोन किया था | यह झूठ है, फोन ८ अप्रैल को ही किया गया था |
13. २३ अप्रैल की सुबह ९:११ बजे फिर मो.संख्या ९६९६२४८५५६ से बहादुर सोनकर के भाई के मो. न०. ९३३६५२२००७ पर फोन आया और उस व्यक्ति ने धमकाया | जब प्रदेश महासचिव, मो० इसरार उल्ला सिद्दीकी ने इस नम्बर पर फोन करके जानना चाहा कि किसका नम्बर है तो उन्हें भी धमकी मिली | इसकी सूचना बहादुर सोनकर के घर वालों ने सीबीसीआईडी को जाँच के समय दे दी थी | मैंने २३ अप्रैल को जौनपुर के पुलिस अधीक्षक को फोन करके घटना से अवगत कराया और इसरार उल्ला सिद्दीकी ने हुसैनगंज थाना, लखनऊ, को लिखित रूप से शिकायत दी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई |

१६ अप्रैल की रात में इंजपा के प्रदेश अध्यक्ष कालीचरन के निवास पर असलहाधारी लोगों ने हमला करने का प्रयास किया | अब अपराधी श्री कालीचरन व मेरी भी हत्या करने की फिराक में हैं | उपयुक्त सुरक्षा यदि नहीं प्रदान होती तो ये लोग हमारी हत्या कर देंगे और उसे भी दुर्घटना या आत्म हत्या का जामा पहना देंगे | उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट हो जाता है कि उ।प्र.सरकार किसी भी तरह मामले को रफा-दफा करने पर तुली हुई है |

महोदय, इस समय उ.प्र. में इंडियन जस्टिस पार्टी के प्रमुख नेताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है | उ.प्र.में बसपा अपनी हार का कारण हमें भी मानती है | अपराधी तभी पकड़े

जा सकते हैं, जब इस घटना की जाँच न्यायिक या सीबीआई से करायी जाए |


उदित राज

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