लखनऊ में तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम का हो रहा है उल्लंघन: लोरेटो कॉलेज की छात्राएं

क्या (कोटपा) तथा धूम्रपान निषेध / तम्बाकू नियंत्रण नियमों का हमारे शहर लखनऊ में तत्परता से पालन हो रहा है? क्या इस शहर के नागरिक तम्बाकू एवम् सिगरेट सेवन से जुड़े हुए खतरों के बारे में सावधान हैं?

इन ज्वलंत प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए लोरेटो कॉन्वेंट इण्टर कॉलेज की  बारहवीं कक्षा की कुछ छात्राओं ने पर्यावरण प्रोजेक्ट के अंतर्गत एक सर्वेक्षण किया. उन्होंने विभिन्न आयु, शैक्षिक योग्यता एवम् आर्थिक वर्ग की ५० महिलाओं और १५० पुरुषों से इस विषय पर जानकारी हासिल करी. इन २०० प्रतिवेदियों में मजदूर वर्ग से लेकर वातानुकूलित ऑफिसों में कार्यशील पदाधिकारी शामिल थे.

इस सर्वेक्षण के दौरान, छात्राओं ने स्कूल/कॉलेजों की १०० मीटर की परिधि में स्थित तम्बाकू/सिगरेट की दुकानों के चित्र अपने कैमरे में कैद किये., तथा शैक्षिक संस्थानों में 'धूम्रपान निषेध' के साइन बोर्ड ढूँढने के असफल प्रयास किये. १८ वर्ष से कम आयु कि होने पर भी, पान/सिगरेट की दुकानों से आसानी से तम्बाकू, गुटखा और सिगरेट के पैकेट खरीदे, तथा उस पर लिखी जानकारी का विश्लेषण किया.

इस सर्वेक्षण से प्राप्त कुछ परिणाम वास्तव में चौंकाने वाले थे.

यद्यपि ९८.५% प्रतिवादियों ने किसी न से अधिक उपभोक्ता किसी संचार माध्यम के ज़रिये तम्बाकू विरोधी सन्देश सुने थे, फिर भी ७०% पुरुष एवम् ५०% महिलाओं ने स्वीकार किया कि वे  तम्बाकू/सिगरेट का सेवन करती हैं. विभिन्न आयु वर्गों में सबसे अधिक उपभोक्ता (२१%) १९ से २३ वर्ष के आयु वर्ग के थे.
तम्बाकू निषेध क़ानून सम्बन्धी लगभग सभी अधिनियमों का किसी न किसी रूप में उल्लंघन पाया गया :-
सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध: ४१% व्यक्तियों ने माना कि वे सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते हैं, परन्तु क़ानून कि अवहेलना करने वाले केवल ६% व्यक्तियों का चालान किया गया. २९% से अधिक लोगों ने बताया कि उनके कार्यस्थल पर धूम्रपान करने पर कोई रोक नहीं है.
अवस्यकों को (एवम् उनके द्वारा) तम्बाकू पदार्थों बेचने पर प्रतिबन्ध: सर्वेक्षण के ८१% अवयस्क पुरुष  एवम् ३३% महिला  प्रतिवादी तम्बाकू सेवी थे. ७६% लोगों का मानना था कि अवस्यकों के तम्बाकू बेचने पर कोई उचित रोक नहीं है तथा उनसे सिगरेट/बीड़ी/गुटखा खरीदना बहुत आसान है. ५१% तम्बाकू/सिगरेट प्रेमियों ने कभी न कभी अवयस्क से ही तम्बाकू पदार्थ खरीदे थे.

शैक्षिक संस्थानों की १०० गज की परिधि में तम्बाकू बेचने पर प्रतिबन्ध: ७८% प्रतिवादियों ने स्कूल/कॉलेजों के पास पान/तम्बाकू/सिगरेट की दुकानों को बेधड़क बिक्री करते हुए देखा था. छात्राओं ने स्वयं शहर के ३६ स्कूल/ कॉलेजों का निरीक्षण करने पर पाया कि केवल ६ स्कूलों के निकट ऎसी दुकाने नहीं थीं. बाकि ३० संस्थानों के आस पास एक या उससे भी अधिक दुकान/गुमटी इस क़ानून की खिल्ली उडाती हुई प्रतीत हुईं.

तम्बाकू पदार्थों के परोक्ष/अपरोक्ष विज्ञापन पर निषेध: सर्वेक्षण टीम ने जिन २० गुटखा/पान मसाला पैकटों का अध्ययन किया उनमे से ७ नियमित रूप से टेलीविजन,रेडियो और सिनेमा में अपने उत्पाद को विज्ञापित करते हैं. हालांकि सिगरेट की किसी भी ब्रांड का विज्ञापन संचार माध्यम से नहीं आता है.

तम्बाकू/गुटखा/पैक पर  स्वास्थ्य चेतावनी को दो भाषाओँ में लिखना अनिवार्य - एक जिसमे ब्रांड का लिखा हो तथा दूसरी पैक में इस्तेमाल करी गयी भाषा में : २० गुटखा पैकटों में केवल १३ पर यह चेतावनी अंग्रेजी एवम् हिंदी में लिखी पायी गयी. दो ब्रांडों में केवल अंग्रेजी भाषा में चेतावनी छपी थी, और एक में केवल हिंदी में. एक ब्रांड के कुछ पैकों पर केवल हिंदी तथा कुछ पर केवल अंग्रेजी का प्रयोग किया गया था. तीन ब्रांडों पर किसी भी भाषा में कोई भी लिखित स्वास्थ्य चेतावनी नहीं  छपी थी.

तम्बाकू पैकटों पर संघटकों का ब्यौरा अनिवार्य: केवल १२ पैकटों पर उत्पाद में इस्तेमाल किये गए कुछ पदार्थों का ब्यौरा लिखा था. परन्तु टार अथवा निकोटिन की मात्रा किसी में भी इंगित नही थी.

इस सर्वेक्षण को छात्राओं ने जिस धैर्य एवम् दृढ़ता से प्रतिपादित किया, वह वास्तव में सराहनीय है. उनका मानना है कि सर्वेक्षण के बाद  तम्बाकू नियंत्रण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ने के साथ साथ उनमें यह जागरूकता भी आयी कि हमें धूम्रपान एवम् तम्बाकू/गुटखा के सेवन का सामूहिक रूप से बहिष्कार करना ही होगा. यह सर्वेक्षण तो एक शुरुआत है. इस प्रकार के अनेकों ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता है.

वत्सला पन्त, करिश्मा मखीजा, ईशिता श्रीवास्तव,सुभांशी श्रीवास्तव, वाणी दीपक, दीपांशी सिंह,अनम नसीम, तानिया,अमीना फारुकी, एवम् स्वाति शर्मा का यह प्रयास वास्तव में प्रशंसनीय है.

शोभा शुक्ला
(लेखिका, थाईलैंड स्थित सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (सी.एन.एस) की संपादिका हैं, सी.एन.एस दी.एम्.आई की निदेशिका हैं, और उत्तर प्रदेश राज्य योजना इंस्टिट्यूट में भी पहले कार्यरत रही थीं. वर्तमान में, शोभा शुक्ला जी, लोरेटो कॉन्वेंट कॉलेज में वरिष्ठ शिक्षिका हैं)

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