एक दूसरे पर विश्वास करने से ही शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है: दीप


"यदि दो देशों के लोगों के बीच संपर्क नहीं रहेगा तो उनके राजनैतिक सम्बन्ध भी अधिक लम्बे नहीं टिकेंगे. लोगों के एक दूसरे के साथ संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापार, आपस में भरोसे और आपसी समझ पर आधारित रिश्तों से ही दो देशों के बीच सम्बन्ध मजबूत होते हैं", यह कहना है सईदा दीप का, जो पाकिस्तान की वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और लाहौर-स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस एंड सेक्युलर स्टडीस की अध्यक्षा भी हैं.

बी-ब्लाक इंदिरा नगर स्थित स्प्रिंग डेल कॉलेज और डी-ब्लाक इंदिरा नगर स्थित डैफोडील्स कॉन्वेंट इंटर कॉलेज में सईदा दीप छात्रों एवं शिक्षकों के साथ दोनों देशों के लोगों के बीच शान्ति और दोस्ती बढ़ाने पर संवाद कर रही थी. इस परिचर्चा में डैफोडील्स के प्रधानाचार्य पियूष मिश्रा, आशा परिवार की सामाजिक कार्यकर्ता शोभा शुक्ला, एवं स्प्रिंग डेल की प्रधानाचार्य श्रीमती खन्ना उपस्थित थीं.

दीप ने कहा कि "यदि हम चाहते हैं कि राजनैतिक स्तर पर हो रहे शांति प्रयास सफल हों, तो हमें आम लोगों को इस प्रक्रिया से जोड़ना होगा. लोगों में आपसी विश्वास और समझ को प्रोत्साहित करना होगा".
दीप अनेकों भारत-पाकिस्तान लोगों को जोड़ते हुए शांति प्रयासों में शामिल रही हैं जिनमें अमन के बढ़ते कदम (२०१०), भारत पाकिस्तान शांति पदयात्रा (२००५), वीसा-मुक्त और शांत दक्षिण एशिया सम्मलेन आदि प्रमुख हैं.

दीप ने लखनऊ शहर में 'लेसन्स फ्रॉम जापान २०११' (जापान से सीख २०११) अभियान भी जारी किया जो लखनऊ नागरिकों द्वारा ६ अगस्त तक युवाओं को जोड़ने के लिये चलाया जायेगा. ६ अगस्त, हिरोशिमा डे, पर, डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस में एक सेमिनार के रूप में इस अभियान का समापन होगा. यह 'जापान से सीख २०११' अभियान, आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय एवं 'नागरिकों का स्वस्थ लखनऊ' अभियान के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है.

'जापान से सीख २०११' अभियान का मानना है कि जापान में घटित परमाणु आपदा के बाद तो यह और भी स्पष्ट हो गया है कि परमाणु शक्ति का सैन्य या ऊर्जा दोनों में ही इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. जो देश परमाणु ऊर्जा बनाने में सबसे आगे थे, जैसे कि जापान और जर्मनी, उन  देशों ने परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को बंद करने की भूमिका ली है और वायु, सूर्य ऊर्जा आदि के उपयोग को बढ़ाने का फैसला लिया है. जर्मनी ने २०२२ तक सभी परमाणु ऊर्जा घरों को बंद करने की घोषणा की है. जर्मनी में एक आधा बना हुआ परमाणु ऊर्जा घर अब मनोरंजन पार्क बना दिया गया है. हमारा मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगे परमाणु ऊर्जा घर, और भारत के अन्य राज्यों में लगे हुए १९ परमाणु ऊर्जा घर जल्द-से-जल्द निश्चित समय-अवधि के भीतर बंद करना चाहिए.

'जापान से सीख २०११' अभियान का मानना है कि सही मायनों में किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मायने यह हैं कि वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति इस तरीके से हो कि सभी लोग ऊर्जा से लाभान्वित हो सकें, पर्यावरण पर कोई कु-प्रभाव न पड़े, और यह तरीका स्थायी हो, न कि लघुकालीन. इस तरह की ऊर्जा नीति अनेकों वैकल्पिक ऊर्जा का मिश्रण हो सकती है जैसे कि, सूर्य ऊर्जा, पवन ऊर्जा, छोटे पानी के बाँध आदि, गोबर गैस इत्यादि.

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