लखनऊ में तंबाकू, अन्य स्वास्थ्य एवं विकास नीतियों के परिपालन पर युवाओं ने जारी किया रिपोर्ट कार्ड

[English][हिन्दी रिपोर्ट कार्ड][English report card] इन्दिरा नगर सी-ब्लॉक चौराहा स्थित प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त केंद्र पर चल रहे अधिकार एवं दायित्व ग्रीष्म-प्रशिक्षण शिविर के 15 युवा प्रतिभागियों ने शहर में तंबाकू, अन्य स्वास्थ्य और विकास नीतियों के परिपालन पर एक रपट कार्ड जारी किया है। 

यह रिपोर्ट कार्ड चार मुख्य बिन्दुओं पर केन्द्रित है: 1) तंबाकू नियंत्रण कानून, 2) शराब विज्ञापन, 3) साफ-सफाई, स्वच्छता और कूड़ा-कचरा प्रबंधन 4) च्विंग गम

इस शिविर के 15 युवा प्रतिभागी हैं: अभिषेक चौधरी, अंकुर वर्मा, दीपक कुमार मिश्रा, दिया पांडे, हितेश पांडे, राकेश, रूपेश वर्मा, संजय कुमार वर्मा, शिखर अगरवाल, शिखा श्रीवास्तव, सर्वेश शुक्ल, सत्यम तिवारी, शुभाम द्विवेदी, सौम्या अरोरा, और उदिता चंद्रा। इस शिविर के प्रशिक्षणकर्ता हैं: प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त, डॉ संदीप पांडे, शोभा शुक्ला, डॉ शिवानी शर्मा, प्रोफेसर (डॉ) गौरदास चौधुरी, बीजू मोहन, राहुल द्विवेदी, एवं बाबी रमाकांत।

इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टूबेर्कुलोसिस अँड लाँग डीसीज के अनुसार विश्व व्यापी तंबाकू नियंत्रण संधि (फ्रमेवोर्क कन्वेन्शन ऑन तोबको कंट्रोल) को 174 देशों ने पारित किया है, परंतु मात्र 11 प्रतिशत दुनिया की आबादी ऐसे देशों में रहती है जहां व्यापक तंबाकू नियंत्रण लागू हो। 

लखनऊ युवाओं ने इस रपट के जरिये चंद सुझाव दिये है जिससे कि तंबाकू नियंत्रण और अन्य स्वास्थ्य कानून सख्ती से लागू किए जा सकें।

इस रिपोर्ट कार्ड में मुख्य सुझाव हैं: 
चूँकि अधिकाँश तम्बाकू सेवन १८ साल से पहले आरंभ होता है, यह अतिआवश्यक है कि १८ साल से कम उम्र के बच्चे और युवाओं को तम्बाकू न तो बेचनी चाहिए और न ही खरीदनी. इस कानून को सख्ती से लागू करने पर जो बच्चे और युवा तम्बाकू सेवन आरंभ कर रहे हैं उनकी संख्या में भारी गिरावट आ सकती है जो जन-हितैषी रहेगी. दूसरा सवाल यह है कि शिक्षा अधिकार अधिनियम के युग में १८ साल से कम उम्र के बच्चे और युवा क्यों तम्बाकू बेचने पर विवश हैं? वें शिक्षा क्यों नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं? बहुत कम तम्बाकू दुकानों पर यह बोर्ड लगा है कि १८ साल से कम उम्र के बच्चे और युवाओं का तम्बाकू खरीदना प्रतिबंधित है.

किसी भी शैक्षिक संस्थान के १०० गज के भीतर तम्बाकू विक्रय प्रतिबंधित है - इसको सख्ती से परिपालित करना चाहिए.

जो विदेशी सिगरेट लखनऊ में बिक रही है, जैसे कि गुदंग गरम (इंडोनेसिया), मार्लबोरो (अमरीका), ब्लाक (इंडोनेशिया), आदि, उनमें से कुछ पर कोई भी चित्रमय चेतावनी क्यों नहीं है? यदि वो कानूनन रूप से आयात की गयी हैं तो उनको भारतीय कानून का अनुपालन करना चाहिए और यदि वो कानूनन रूप से आयात नहीं की गयी हैं तो न केवल भारत के लोगों के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ रहा है बल्कि भारत को (और जिस देश वो बन रही है उसको) राजस्व का भी नुक्सान हो रहा है. क्या यह तम्बाकू तस्करी है? यदि है तो इसके खिलाफ सख्त कारवाई होनी चाहिए। इसकी जांच अधिकारियों – प्रशासन को करनी चाहिए और उचित कदम उठाने चाहिए। 

हम लोगों को अधिक सख्त कानून चाहिए जिससे कि जिन तंबाकू वाले गुटखे और उनके सादे पान मसाले का एक ही ब्रांड नाम है, उनके विज्ञापन पर प्रतिबंध लगे। गौर करने की बात यह है कि जब कोई व्यक्ति ब्रांड नाम देखता है तो किस उत्पाद से उसे जोड़ता है (तंबाकू या गैर-तंबाकू)?

हम लोगों को अधिक सख्त कानून चाहिए जिससे कि जिन शराब और गैर-शराब उत्पादों का एक ही ब्रांड नाम है, उनके विज्ञापन पर प्रतिबंध लगे। गौर करने की बात यह है कि जब कोई व्यक्ति ब्रांड नाम देखता है तो किस उत्पाद से उसे जोड़ता है (शराब या गैर शराब)?

च्विंग गम पर साफ, बड़े नाप या आकार से, पढ़ने में आसान रंग से, महत्वपूर्ण जानकारी लिखी होनी चाहिए। यह जानकारी स्थानीय भाषा में भी छपी होनी चाहिए। 

कूड़े-कचरे का नियमित प्रबंधन वैज्ञानिक और प्रमाणित ढंग से शहर के हर आवासीय क्षेत्र में ऐसे होना चाहिए कि न तो पर्यावरण और न ही जन स्वास्थ्य पर कोई कुप्रभाव पड़े।

अधिकार एवं दायित्व ग्रीष्म-प्रशिक्षण शिविर को संयुक्त रूप से आयोजित किया है: स्वास्थ्य को वोट अभियान, आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, द मूवमेंट ऑफ इंडिया, सच्ची मुच्ची और सीएनएस (www.citizen-news.org) 

यह रिपोर्ट कार्ड ऑनलाइन है और इस वैबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है: www.citizen-news.org

सीएनएस

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