सड़क-दुर्घटना-मृत्यु दर 2020 तक आधा करने के वादे के बावजूद थाईलैंड में 'सोंगक्रान' त्यौहार में दर बढ़ा!

थाईलैंड के सोंगक्रान त्यौहार में सड़क-दुर्घटनाएं और सम्बंधित मृत्यु दर, पिछले साल की तुलना में, बढ़ गए हैं (समाचार). यह बेहद चिंताजनक है क्योंकि थाईलैंड का सरकारी वादा तो है 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर को आधा करने का! थाईलैंड सरकार जब तक ठोस और कड़े कदम नहीं उठाएगी तब तक यह वादा कैसे पूरा होगा? सामाजिक न्याय की दृष्टि से भी यह अत्यंत पीड़ाजनक है क्योंकि सुरक्षित सड़क और यातायात व्यवस्था तो सभी नागरिकों को मिलनी ही चाहिए.

2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जरुरी है स्वास्थ्य एवं गैर-स्वास्थ्य वर्गों में साझेदारी

अब इसमें कोई संदेह नहीं कि टीबी मुक्त भारत का सपना सिर्फ स्वास्थ्य कार्यक्रम के ज़रिए नहीं पूरा किया जा सकता है. टीबी होने का खतरा अनेक कारणों से बढ़ता है जिनमें से कुछ स्वास्थ्य विभाग की परिधि से बाहर हैं. उसी तरह टीबी के इलाज पूरा करने में जो बाधाएं हैं वे अक्सर सिर्फ स्वास्थ्य कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर हो ही नहीं सकतीं - उदहारण के तौर पर - गरीबी, कुपोषण, आदि. इसीलिए टीबी मुक्त भारत का सपना, सभी स्वास्थ्य और ग़ैर-स्वास्थ्य वर्गों के एकजुट होने पर ही पूरा हो सकता है. इसी केंद्रीय विचार से प्रेरित हो कर, विश्व स्वास्थ्य दिवस 2017 के उपलक्ष्य में, हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित, हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) के परिसर में, टीबी मुक्त भारत सम्मेलन का आयोजन हुआ.

"टीबी हारेगा, देश जीतेगा" जब हम सब एकजुट होकर टीबी उन्मूलन के लिए कार्य करेंगे!

[English] टीबी (ट्यूबरक्लोसिस या तपेदिक) रोग से बचाव मुमकिन है, दशकों से देश भर में पक्की जांच और पक्का इलाज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नि:शुल्क उपलब्ध है, पर इसके बावजूद टीबी जन स्वास्थ्य के लिए एक विकराल चुनौती बना हुआ है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट देखें तो भारत में 2015 में, 28 लाख नए टीबी रोगी रिपोर्ट हुए (2014 में 22 लाख थे), 4.8 लाख टीबी मृत्यु हुईं (2014 में 2.2 लाख मृत्यु हुईं थीं), और 79,000 दवा प्रतिरोधक टीबी (मल्टी-ड्रग रेसिस्टेंट टीबी या MDR-TB) के रोगी रिपोर्ट हुए (2015 में 11% वृद्धि). "टीबी उन्मूलन संभव है पर अभी 'लड़ाई' जटिल और लम्बी प्रतीत होती है" कहना है शोभा शुक्ला का जो सीएनएस (सिटीजन न्यूज़ सर्विस) का संपादन कर रही हैं और टीबी उन्मूलन आन्दोलन से दशकों से जुड़ीं हुई हैं.

यदि सतत विकास लक्ष्य हासिल करने हैं तो कार्यसधाकता जरुरी

वैश्विक स्तर पर भारत समेत 190 देशों ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने का वादा तो किया है पर यदि राष्ट्रीय स्तर पर नीतियों, कार्यक्रमों और आँकड़ों को देखें तो संशय होना निश्चित है कि यह वादे कैसे होंगे पूरे? एक ओर सैन्य बजट में बढ़ोतरी तो दूसरी ओर सतत-विकास बजट में कटौती.