उचित देखभाल के द्वारा सम्भव है मधुमेह के साथ सामान्य जीवन

उचित देखभाल के द्वारा सम्भव है मधुमेह के साथ सामान्य जीवन


मधुमेह के साथ जीवित बच्चों एवं युवाओं का जीवन इस स्थिति से अत्यधिक प्रभावित होता है। उनके रक्त में शर्करा की मात्रा की नियमित जांच के साथ साथ उनकी औषधि, भोजन, और शारीरिक श्रम के बीच उचित तालमेल बनाए रखना भी आवश्यक होता है। चिकित्सकों, भोजन विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के उचित मार्गदर्शन से तथा अभिभावकों के सहयोग से, ये सभी युवा एक स्वस्थ एवं सामान्य जीवन जी सकते हैं। वे अपने अन्य सम आयु मित्रों के समान जीवकोपार्जन कर सकते हैं और खेल-कूद में भी भाग ले सकते हैं।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह दिवस के सन्दर्भ में इन्टरनेशनल डायबिटीज़ फेडेरेशन (आई.डी.ऍफ़.) के अभियान का मुख्य केन्द्र हैं मधुमेह के साथ जीवित बच्चे व युवा , जिनका जीवन वास्तव में चुनौतियों से भरा है। मधुमेह के चलते उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। किशोरावस्था में हो रहे शारीरिक/ मानसिक परिवर्तन, मानसिक तनाव, आत्म विश्वास की कमी---ऐसे अनेक कारणों से उनके शरीर की इंसुलिन प्रतिरोधकता प्रभावित होती है।

आई.डी.ऍफ़. के अनुसार, विश्व में १५ वर्ष से कम आयु के ५००,००० बच्चे टाइप-1 डायबिटीज़ से प्रभावित हैं। इनमें से लगभग २५% दक्षिण-पूर्व एशिया के वासी हैं। टाइप-२ डायबिटीज़ का प्रकोप भी विकासशील एवं विकसित देशों के बच्चों में बढ़ता ही जा रहा है। टाइप-2 डायबिटीज़ वाले लगभग ८५% बच्चों का वज़न सामान्य से अधिक पाया गया है।
युवाओं में, मधुमेह के कारण, कम उम्र में ही ह्रदय रोग की संभावना बढ़ जाती है, जिसका कुप्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। आई.डी.ऍफ़. का मानना है कि इन बच्चों को सर्वोत्तम उपचार/परिचार सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए जिससे उनके जीवन की जटिलताएं कम हो सकें। इस क्षेत्र में शोध कार्यों को भी बढ़ावा मिलना चाहिए।

टाइप-२ डायबिटीज़ से शरीर में इंसुलिन के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न हो जाती है और बीटा-सेल से स्त्राव होना बंद हो जाता है। यह अनेक कारणों से होता है, जैसे मोटापा, आरामतलब जीवन शैली, अनुवांशिकता, जन्म के समय बच्चे का वज़न कम होना, गर्भ में ही मधुमेह से प्रभावित होना अथवा लड़की होना।



आई.डी.ऍफ़. के अनुसार, विश्व भर में २५ करोड़ व्यक्तियों को मधुमेह है, जिनमें से १२ करोड़ विकासशील देशों में रहते हैं। आने वाले समय में बढ़ते हुए शहरीकरण ,बदलते हुए सामाजिक परिवेश एवं आधुनिक जीवन शैली के कारण , मधुमेह के साथ जीवित ८०% लोगों की निम्न एवं मध्यम आयु वर्ग के देशों में पाये जाने की संभावना है।

फोर्टिस हॉस्पिटल, नयी दिल्ली के मधुमेह विभाग के निदेशक डाक्टर अनूप मिश्रा के अनुसार, ‘ मधुमेह, विश्वव्यापी असंक्रामक महामारियों में से एक है। अत: आवश्यकता है ऐसी स्वास्थ्य नीतियों की जो संतुलित आहार और चैतन्य जीवन शैली को बढ़ावा दे। इससे न केवल टाइप-२ डायबिटीज़ कम होगी वरन मोटापा, ह्रदय रोग,श्वास रोग, खानपान संबन्धी कैंसर आदि रोगों की भी रोकथाम की जा सकेगी। एक सुगठित प्रणाली, केवल मधुमेह ही नहीं, वरन हर प्रकार के असंक्रामक रोगों की रोकथाम को बढ़ावा देकर हम सभी को एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित कर सकती है।’


डाक्टर मिश्रा का मानना है कि, ‘संतुलित आहार के द्वारा बच्चों/वयस्कों में मधुमेह का उचित प्रबंधन किया जा सकता है। हमारे दैनिक भोजन में फल, सब्जी,दाल, मोटे अनाज व रेशे युक्त पदार्थों का होना आवश्यक है। वसायुक्त खाद्य पदार्थ, बहुत अधिक तला-भुना भोजन एवं परिष्कृत अनाज का उपयोग कम से कम करना चाहिए। बढ़ती उम्र के बच्चों/वयस्कों को संतुलित एवं पर्याप्त भोजन के साथ साथ शारीरिक श्रम/ व्यायाम भी करना चाहिए।’

जिन परिवारों में मधुमेह अनुवांशिक है वहाँ विशेष जागरूकता की आवश्यकता है। ऐसे परिवारों के बच्चों/ वयस्कों को अपना शारीरिक वज़न सामान्य रखते हुए फल व सब्जी अधिक मात्रा में खाने चाहिए, फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए तथा नियमित रूप से आधा घंटे व्यायाम/ खेलकूद में हिस्सा लेना चाहिए।

दिल्ली निवासी डाक्टर सोनिया कक्कड़ के अनुसार, ‘ शहरों एवं गाँवों के निर्धन बच्चों /वयस्कों में मधुमेह का निदान समय से नहीं हो पाता --शायद शिक्षा की कमी या धन के अभाव के कारण, या फिर लड़की होने के कारण। मधुमेह के उपचार से अधिक उसकी रोकथाम पर ध्यान देना ज़्यादा तर्कसंगत है और सस्ता भी। इस दिशा में अब तक कुछ कदम उठाये अवश्य गए हैं पर वे काफी नहीं हैं। उन्हें और अधिक सक्षम बनाना होगा.’

एक सुनियोजित एवं सुगठित दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो टाइप-२ डायबिटीज़ के खतरों को कम कर सके। आधुनिक युग में तीव्र समाचार संचार, बेहतर टेक्नोलोजी, नवीनीकरण आदि साधनों के माध्यम से मधुमेह की समस्या से निपटने में हमें सहायता मिलेगी। भारत को अपने सीमित संसाधनों का उचित उपयोग करके एवम निजी क्षेत्र के सहयोग से मधुमेह संबंधी उपचार / परिचार कार्यक्रम सब की आर्थिक पंहुच के भीतर लाने होंगें।

शोभा शुक्ला

लेखिका सिटिज़न न्यूज़ सर्विस की संपादिका हैं ।

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