कोसी से बाढ़ ग्रस्त बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज ब्लाक में गयी टीम की रपट

कोसी से बाढ़ ग्रस्त बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज ब्लाक में गयी टीम की रपट

बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज ब्लाक में पिछले २ महीनों से महेंद्र यादव और उनकी टीम बाढ़ से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए कार्यरत है. कटिहार रेलवे स्टेशन से मुरलीगंज लगभग ८० किलोमीटर की दूरी पर है.

१० नवम्बर २००८ को महेंद्र भाई ने और उनके साथियों ने ६००-७०० लोगों के साथ एक खुली मूल्यांकन बैठक आयोजित की जिससे निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट हुए:

१) बाढ़ से विस्थापित लोगों को जबरन राहत शिविर से बाहर किया जा रहा है क्योंकि सरकार इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती है. जब तक लोग राहत शिविर में हैं, सरकार को उनके भोजन, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा आदि की पूरी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है.

२) जिन खेतों से बाढ़ का पानी अब वापस जा रहा है, वहाँ पर खेत बालू से ढंके हुए हैं. जब तक इस बालू को नहीं हटाया जाता, यह खेत उपजाऊ नहीं हैं. वहीँ दूसरी ओर, कई स्थानों पर तेज़ पानी से गहरे गढढे हो गए हैं जिनको भरने और धरती को पुन: खेती योग्य होने में १-२ साल तक लग सकते हैं.

३) किसानों को खेती-बाड़ी के लिए बीज, खाद, और अन्य औजार चाहिए जिससे कि वोह अपनी खेती पुन: कायम कर सकें. उसी तरह जिन लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है परन्तु वोह कृषि में महत्त्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं, उनके मुआवजा के लिए भी विचार करना होगा. अन्य कारीगरों को भी उपयुक्त औजार चाहिए और
मुआवजा भी.

४) लोगों को उनके मृत या खोये हुए गाय/बैल और अन्य जानवर आदि के लिए भी
मुआवजा चाहिए. जिन लोगों के पास अपनी गाय/बैल या अन्य जानवर हैं, उनकी हालत ख़राब है क्योंकि नियमित रूप से पोषण नहीं मिल पाता है. सरकार से जो भूसा प्राप्त होता है वोह गीला है और भ्रष्टाचार के कारण नियमित रूप से प्राप्त भी नहीं होता है.

५) स्वास्थ्य व्यवस्था बिलकुल चरमरा गयी है. लोगों के पास निजी चिकित्सकों के पास जाने के अलावा कोई चारा ही नहीं है.

६) सभी शिक्षा के कार्यक्रमों में विघिन्न आ गया है, और इनको पुन: सक्रिय रूप से चालू करना की आवश्यकता है

७) रुपया २,२५० का
मुआवजा और एक कुंतल खाद्य-उत्पादन इमानदारी से नहीं वितरित किए जा रहे हैं. कई स्थानों पर सिर्फ़ ५०-७० किलो ही खाद्य-उत्पादन दिया जा रहा है. यदि किसी का नाम ऐ.पी.एल या बी.पी.एल सूची में नहीं है, तो उसको राहत सामग्री नहीं दी जा रही है

८) लोगों को सूचना के अधिकार का उपयोग करना चाहिए जिससे कि सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी मिल सके और लोगों को लाभ भी.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिक कीजिये

अधिक जानकारी के लिए, संपर्क करें:

डॉ संदीप पाण्डेय
आशा परिवार और
जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय
[नेशनल अलायंस ऑफ़ पीपुलस मूवमेंट्स (NAPM)]
फ़ोन: ०५२२ २३४७३६५
ईमेल: ashaashram@yahoo.com

मेरी ख़बर में प्रकाशित

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