भाजपा की हार में छुपी जीत

भाजपा की हार में छुपी जीत
फादर डोमिनीक इमेन्युल

आम चुनाव के पहले, देश के अलग-अलग भागों में स्थित कई चर्चों ने श्रद्धालुओं का इस सम्बन्ध में पथ- प्रदर्शन किया था कि वे अपने मताधिकार का उपयोग कैसे करें | उनसे कहा गया था कि वे उन उम्मीदवारों को मत दें जो दलितों और गरीबों के लिए काम करें, भ्रष्ट न हों, आपराधिक चरित्र के न हों और जो धर्म के आधार पर लोगों में भेदभाव न करें | यद्यपि चर्च आने वालों से यह नहीं कहा गया था कि वे इस या उस पार्टी को वोट दें परन्तु संदेश स्पष्ट था: उन उम्मीदवारों को मत दो जो ईसाईयों के हितों की रक्षा करें |

चुनाव के नतीजे आते ही ईसाई समुदाय में ख़ुशी की लहर व्याप्त हो गई | ईसाईयों ने चैन की साँस ली कि साम्प्रदायिक ताकतों को दिल्ली में सत्ता हासिल नहीं हो सकी |

मैं भी खुश था | हमारे समुदाय के अन्य साथियों को यह संदेश भेज रहा था कि हमारी प्रार्थनाएं सफल हुई हैं और जिन लोगों ने ईसाईयों पर अत्याचार किये थे, उन्हें ईश्वर ने सबक सिखाया है | परन्तु मेरी ख़ुशी तब काफूर हो गई जब मैंने चुनाव परिणामों का गहरे से विश्लेषण किया |

भाजपा को मिली सीटों की संख्या में कमी आई है | सन् २००४ में उसे १३८ सीटें मिली थीं, इस बार ११६ मिली हैं | चुनाव विश्लेषक कह रहे हैं कि जनता ने साम्प्रदायिक ताकतों को नकारा है | क्या सचमुच ऐसा हुआ है ? मुझे डर है कि यह निष्कर्ष सही नहीं है | जिन-जिन इलाकों में भाजपा ने अल्पसंख्यकों के विरुद्ध विषवमन या हिंसा की थी, वहाँ उसे लाभ हुआ है | कंधमाल हिंसा के मुख्य आरोपियों में से एक मनोज प्रधान विधान सभा चुनाव में विजयी हुए हैं | वे जेल में हैं | यद्यपि अशोक साहू कंधमाल से लोकसभा चुनाव हार गए हैं परंतु उन्हें उन विधानसभा क्षेत्रों में अन्य उम्मीदवारों से ज्यादा वोट मिले हैं जहाँ उन्होंने ईसाई विरोधी हिंसा भड़काई थी |

कर्नाटक में मंगलौर में, जहाँ बजरंग दल के गुंडों ने ईसाईयों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर हिंसा की थी, चर्चों में मूर्तियाँ तोडी थीं और ननों की पिटाई की थी, वहाँ से भाजपा के उम्मीदवार नलिन कुमार कटील जीते हैं | हुबली में पबों पर राम सेने के पहलवानों ने हल्ला बोला और वहाँ बैठी लड़कियों को मार भगाया | हुबली के पास उडुपी जिले के एक बीच पर हिन्दुत्ववादियों ने चार्ली चैपलिन की मूर्ति इसलिए नहीं लगने दी थी क्योंकि चैपलिन ईसाई थे | हुबली से भी भाजपा उम्मीदवार डी.व्ही. सदानंद गौडा जीते हैं |

उत्तरप्रदेश के पीलीभीत के लोगों ने मुसलमानों के खिलाफ़ घोर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले वरुण गाँधी को भारी बहुमत से जिताया है | मालेगांव, जहाँ साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित ने एक मस्जिद में कथित रूप से विस्फोट कराया था, कांग्रेस का गढ़ रहा है | परंतु इस बार वहाँ से भाजपा के प्रताप सोनावने जीते हैं | आदिवासियों की घर-वापिसी का आन्दोलन चलाने वाले दिलीप सिंह जूदेव भी लोकसभा में पहुँच गए हैं | नरेन्द्र मोदी के गुजरात में-जहाँ मुसलमानों का दानवीकरण लम्बे समय से जारी है- भाजपा की एक सीट बढ़ गई है |

इन तथ्यों से स्पष्ट है कि जिन भी इलाकों में भाजपा या उसके साथी संगठनों ने अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसक अभियान चलाया, उन सभी इलाकों में उसे विजय मिली है | यह बहुत डरावना तथ्य है | क्या भाजपा अपनी विजय को अधिक व्यापक बनाने के लिए और नए -नए इलाकों में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए प्रेरित नहीं होगी ?

मुझे उम्मीद है कि भाजपा का नेतृत्व ऐसा कुछ नहीं करेगा | हो सकता है कि मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलने या ननों को पीटने से वे कुछ सीटें जीत जाएं परंतु इस रास्ते से वे सत्ता में नहीं आ पाएंगे | अगर भाजपा भारत की आत्मा के खिलाफ़ काम करेगी तो उसे कभी सफलता नहीं मिलेगी | भाजपा को समझना चाहिए कि उसका सांस्कृतिक राष्ट्रवाद हिटलर और मुसोलिनी का सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है न कि भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जो सभी धार्मिक समुदायों के मिल-जुलकर रहने पर आधारित है |

भाजपा को इन चुनावों से सकारात्मक सबक सीखने चाहिए | जिस दिन भाजपा अल्पसंख्यकों का विश्वास जीत लेगी वह भारतीय प्रजातंत्र के लिए एक शुभ दिन होगा |

फादर डोमिनीक इमेन्युल, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (सी.एन.एस) वेबसाइट: www.citizen-news.org

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