विश्व स्वास्थ्य दिवस, ७ अप्रैल २०११

लखनऊ में खुली दवाओं का बिना-डाक्टरी पर्चे के अनियंत्रित विक्रय, दवाओं का ज्ञान रहित और अनुचित उपयोग, दवाओं को पूरी अवधि तक न लेना, आदि कुछ  मुद्दे हैं जो हम सब विश्व स्वास्थ्य दिवस पर उठाना  चाहते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस इस केंद्रीय विचार पर मनाया है: यदि आज कोई कदम नहीं उठाया गया, तो कल कोई इलाज न रहेगा (Antimicrobial resistance: no action today, no cure tomorrow).

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त प्रोफेसर डॉ रमा कान्त का कहना है कि "विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अगर यूँ ही दवाओं के प्रति प्रतिरोधकता बढती रही, तो दवाएं बेइलाज हो जाएँगी. अनेक बीमारियों और अवस्थाओं के लिये इलाज के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दवा प्रतिरोधकता कोई नयी समस्या नहीं है, बल्कि पुरानी समस्या है जो अब अधिक विकराल रूप ले रही है, और यदि पर्याप्त कदम न उठाये गए तो हम लोग उस युग में पहुँच जायेंगे जब एंटी-बायोटिक दवाओं का आविष्कार ही नहीं हुआ था.

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हम इस युग में रह रहे हैं जहां अक्सर दवाओं की वजह से उन बीमारियों और अवस्थाओं का इलाज मुमकिन है जो पहले घातक थीं. यदि दवा प्रतिरोधकता हो जाती है, तो ये जीवन बचाने वाली दवाएं कारगर नहीं रहती".

उदाहरण के तौर पर तपेदिक या टी.बी. में दवा प्रतिरोधकता सबसे अधिक चुनौती दे रही है जहां लगभग ५ लाख लोग दवा प्रतिरोधक तपेदिक या टी.बी. के शिकार हैं. इनमें से ५० प्रतिशत की मृत्यु हो जाती है, जिससे बचाव तभी मुमकिन है यदि तपेदिक की जांच और इलाज समय से कराया जाय..

स्वस्थ्य लखनऊ के लिये नागरिक, आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, अभिनव भारत फाउनडेशन, इंडियन सोसाइटी अगैंस्ट स्मोकिंग

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