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लखनऊ में भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल बिल मसौदे पर खुली चर्चा

[English] अप्रैल २०११ के आरंभ में अन्ना हजारे के नेत्रित्व में भ्रष्टाचार विरोधी ऐतिहासिक क्रांति की लहर दौड़ी थी. जबसे भारत सरकार ने लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने की समिति में भ्रष्टाचार विरोधी जन-अभियान के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया है, तब से इन लोगों के प्रति आरोपों का हमला शुरू हो गया है. अरविन्द केजरीवाल और स्वामी अग्निवेश, जो लोकपाल बिल के मसौदे को तैयार करने वाली समिति के सदस्य हैं, वें उत्तर प्रदेश में लोगों से लोकपाल बिल से सम्बंधित सुझाव लेने आये. 

 १ मई २०११ को भ्रष्टाचार विरोधी जन-अभियान लखनऊ के संत फ्रांसिस कॉलेज में पहुंचा. युवा कार्यकर्ता एवं मग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि "कई लोगों को लगता था कि यह भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चार दिन की चांदनी है जो मीडिया की वजह से प्रचलित हुआ है - और दिल्ली में कुछ मीडिया ने यह कहा कि इस आन्दोलन की जड़ें गहरी नहीं है. पर जब हम लोग उत्तर प्रदेश में आये तो लोग गाँव-गाँव से भरी मात्रा में निकल कर आये हैं. ऐसा लगता है कि जनता के अन्दर जो रोष था वो इस कार्यक्रम के जरिये उमड़ पड़ा है. जिस तरह से लोग उमड़ कर आये हैं लगता है कि कोई प्राकृतिक शक्ति है जो इस सामाजिक बदलाव को समर्थन दे रही है. जिस तरह से मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया, जिस तरह से हमारी टीम को तोड़ने की कोशिश की गयी, जिस तरह से कुछ मीडिया में गलत समाचार 'प्लांट' किये गए, मुझे लगता है कि कोई प्राकृतिक शक्ति है जो हमें सही रास्ते की ओर ले जा रही है और जिस तरह से जन समर्थन उमड़ रहा है कुछ सकारात्मक नतीजा जरूर निकलना चाहिए. हमारे पास सिर्फ हमारी सच्चाई और ईमानदारी है." 

अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि "लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने के लिए जिस समिति का गठन हुआ है हम नहीं चाहते कि बंद कमरे में इसको तैयार किया जाए. हम लोगों ने तो यह प्रस्तावित किया था कि इसकी विडियो रेकॉर्डिंग होनी चाहिए जिससे कि जनता को यह पता चले कि अन्दर क्या बातें हो रही हैं. हम लोग शहर-शहर जा कर जनता से पूछ रहे हैं कि आपके इसके बारे में क्या विचार हैं. www.indiaagainstcorruption.org वेबसाइट के जरिये भी लोग हमको सुझाव दे सकते हैं और जितने भी सुझाव हमारे पास आयेंगे हम लोकपाल बिल का मसौदा तैयार करने वाली समिति की बैठक में ले के जायेंगे."

अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार पर प्रभावकारी ढंग से अंकुश लगाने के लिये लोकपाल बिल आवश्यक है। लोकपाल बिल जो शिकायत पर संवैधानिक रूप से समय-अवधि के अन्दर ही सजा दिलाने की वादा करता है - उसको पारित होने के लिये अरविन्द केजरीवाल ने जन आन्दोलन को सशक्त करने की मांग की। बिना लोकपाल बिल जैसी नीतियों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना मुश्किल है - और - भ्रष्ट अधिकारियों एवं जन-प्रतिनिधियों को सजा दिलवाना भी बहुत जटिल कार्य है।

आखिर भ्रष्टाचार को कैसे रोका जाए? केजरीवाल ने संगीन प्रश्न खड़े किये कि जो संस्थाएं भ्रष्टाचार को रोकने के लिये हैं, उदाहरण के तौर पर जैसे कि सेंट्रल विजिलेंस कमिटी (सी०वि०सि०) सिर्फ सरकार को सलाह दे सकती है, और कोई भी कारवाई नहीं कर सकती। केजरीवाल ने भूतपूर्व सी0वि0सि० से साक्षात्कार के बारे में बताया कि पिछले ५ सालों में उस सी०वि०सि० ने जिन सरकारी अधिकारियों को निलंबित से ले के जेल तक भेजने की 'सलाह' दी उन सबको सरकार ने सिर्फ 'चेतावनी' दे कर छोड़ दिया है। इसी तरह सी०बी०आई० भी कोई जांच तब तक नहीं कर सकती है जब तक सरकार की सहमती न प्राप्त हो।

यदि मजबूत लोकपाल बिल संसद से पारित हो गया तो इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा. प्रस्तावित है कि यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी. कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर पायेगा.

अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि इस बिल की मांग है कि भ्रष्टाचारियो  के खिलाफ किसी भी मामले की जांच एक साल के भीतर पूरी की जाये. परीक्षण एक साल के अन्दर पूरा होगा और दो साल के अन्दर ही भ्रष्ट नेता व आधिकारियो को सजा सुनाई जायेगी . इसी के साथ ही भ्रष्टाचारियो का अपराध सिद्ध होते ही उनसे सरकर को हुए घाटे की वसूली भी की जाये. यह बिल एक आम नागरिक के लिए मददगार जरूर साबित होगा, क्यूंकि यदि किसी नागरिक का काम तय समय में नहीं होता तो लोकपाल बिल दोषी अफसर पर जुरमाना लगाएगा और वह जुरमाना शिकायत कर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा. इसी के साथ अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती है तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकेंगे. आप किसी भी तरह के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते है जैसे कि सरकारी राशन में काला बाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी,  या फिर पंचायत निधि का  दुरूपयोग.

अभी लोकपाल बिल का मसौदा तैयार होने की प्रक्रिया चल रही है - उसके पश्चात् इस मसौदे को संसद से बिना-कमजोर कराये पारित करना भी एक चुनौती होगी. 


बाबी रमाकांत - सी.एन.एस.

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