फिल्मों द्वारा धूम्रपान की तरफ बढ़ते युवा कदम

कहा जाता है कि फिल्में समाज का आईना होती है। अर्थात जो फिल्मों में दिखाया जाता है। वह समाज में कहीं न कहीं घटित हो रहा होता है। यह तो सच है। लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अधिक फिल्म बनाने वाला बालीवुड यह भूल चुका है कि आज की युवा पीढ़ी फिल्में देखकर ही अच्छी या बुरी आदते अपनी जिंदगी में उतारने की कोशिश करती है। युवावस्था एक ऐसी स्टेज होती है। जिसमें फिल्मों का काफी रोल होता है। युवा फिल्मों में अपने पसंदीदा अभिनेता या अभिनेत्री को जैसा करते देखते है। वह उन्हीं की लाइफ स्टाइल को पसन्द करते है। और उसको बिना कुछ सोचे समझे अपनी ज़िन्दगी में शामिल करना चाहते हैं  इसमें कुछ आदतें अच्छी भी होती है। और कुछ बुरी भी।

अभी दिल्ली के 12 स्कूलों में लगभग 3,956 युवाओं पर ‘‘हेल्थ रिलेटेड इन्फोर्मेशन  डिस्सएमिनेशन  अमंगस्ट यूथ’’ (एच आर आई डी ए वाई) नामक संस्था ने एक अध्ययन कराया जिसका परिणाम यह आया कि आज का युवा जब फिल्मी पर्दे पर अपने पसंदीदा अभिनेता या अभिनेत्री को धूम्रपान करते हुए देखते है तो वह सामान्य इंसान से लगभग दोगुना धूम्रपान करते है।

इस अध्ययन की मुख्य अध्ययनकर्ता मोनिका अरोड़ा के अनुसार ‘‘किशोरों  ने करीब 59 फिल्मों 162 बार तम्बाकू का इस्तेमाल देखा, और साथ ही परिणाम यह आया है कि फिल्मों में धूम्रपान की वजह से लड़कियों की तुलना में लड़के अधिक तम्बाकू के सम्पर्क में आते है।’’

काफी समय पहले बालीवुड में धूम्रपान वाले सीन्स को पर्दे पर दिखाने को लेकर आलोचना हो चुकी है। और कहा गया था कि 2005 के बाद की फिल्मों में इसको नहीं दिखाया जायेगा लेकिन यह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है। अभी हाल ही में  आई आमिर खान प्रोडक्शन की एक फिल्म में शरू में छोटी सी चेतावनी दिखाई गई कि ‘‘धुम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’’ उसके बाद पूरी फिल्म में अभिनेता द्वारा सिगरेट के धकाधक कश दिखाए गए। यह धुम्रपान को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। तो क्या है? क्या एक बार छोटी सी चेतावनी दिखाने के बाद युवा के सामने धूम्रपान करने से उसकी समझ में आ जाएगा कि धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, और हमें इसे नही करना चाहिये। कई ऐसे अभिनेता है जो अपनी असल जिन्दगी में धूम्रपान नही करते लेकिन पर्दे पर धूम्रपान करते दिखाई देते है। युवा असली जिन्दगी नही देखते वह केवल पर्दे की चकाचौंध को ही देखते है। और वह वही करते हैं जो उनका हीरो करता है। क्या सही मायने में यह युवाओं के असली हीरो हैं जो उन्हें मौत की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

धूम्रपान को बढ़ावा देने की साजिश में केवल अभिनेता ही नहीं हैं बल्कि अभिनेत्रियाँ भी शामिल है। अभी जानी मानी अभिनेत्री विद्या बालन हैदराबाद में ‘‘डर्टी पिक्चर’’ नामक फिल्म की शूटिंग कर रही थी जिसमें एक सीन  में उनको धूम्रपान करना था जिसके उन्होंने इतने रिटेक दिये कि उन्हें 10 सिगरेट का सेवन करना पड़ा और उसके दूसरे दिन उन्हें मुंह का अल्सर हो गया। चूँकि वह सिगरेट का सेवन नही करती है। लेकिन जब पर्दे पर उस सीन को दिखाया जायेगा तो युवा पीढ़ी क्या सोचेगी यही कि जब उसकी फेवरेट हिरोइन कश लगा सकती है। तो वो क्यों नहीं? लेकिन जब इस बारे में किसी फिल्म के अभिनेता या अभिनेत्री से बात करेंगे तो वह यही कहता है कि यह तो कहानी की मांग थी।

लेकिन सोचने वाली बात यह है कि दिन प्रतिदिन फिल्मों में जितना तम्बाकू का प्रयोग बढ़ रहा है। अगर उस पर सही समय पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया तो वह दिन दूर नहीं है जब लड़कियाँ भी तम्बाकू के मामले में लड़कों से पीछे नहीं रहेंगी, साथ ही पूरी युवा पीढ़ी तम्बाकू की चपेट में आ जाएगी और इसका भयंकर परिणाम भी भुगतेगी |

नदीम सलमानी

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