सतत विकास के लिए आयु-अनुकूल व्यापक यौनिक शिक्षा क्यों है ज़रूरी?
सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सरकारी सेवाएँ क्यों हैं ज़रूरी?

[English] दुनियाभर में कोरोनावायरस रोग (कोविड-19) महामारी ने हम सबको यह स्पष्ट समझा दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पर्याप्त निवेश न करने और उलट निजीकरण को बढ़ावा देने के कितने भीषण परिणाम हो सकते हैं. इसीलिए इस साल के संयुक्त राष्ट्र के सरकारी सेवाओं के लिए समर्पित दिवस पर यह मांग पुरजोर उठ रही है कि सरकारी सेवाओं को पर्याप्त निवेश मिले और हर व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा मिले.
निजी अस्पताल में सरकारी पैसे से इलाज की छूट लेकिन निजी परिवहन से यात्रा करने पर सरकारी लाभ से क्यों वंचित?
पिछले तीन माह में यह स्पष्ट हो गया है कि कोरोना वायरस महामारी को रोकने में सरकार लगभग हर मोर्चे पर असफल रही है। न केवल सरकार कोरोना वायरस संक्रमण के तेजी से बढ़ते फैलाव को रोकने में असमर्थ रही है बल्कि उसके ही कारण देश के अधिकाँश लोगों को संभवतः सबसे बड़ी अमानवीय त्रासदी झेलनी पड़ी है। सरकार की असंवेदनशील, अल्प-कालिक और संकीर्ण सोच के कारण करोड़ों लोगों के मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ। सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने वैज्ञानिकों और चिकित्सकों से सलाह नहीं ली जिसके कारण उसके अनेक निर्णय, नवीनतम शोध और प्रमाण पर आधारित नहीं रहे।विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर विशेष: तम्बाकू उन्मूलन के बिना कैसे होगा तम्बाकू-जनित महामारियों का अंत?

[English] इस समय पूरे विश्व में कोरोनावायरस महामारी के कारण स्वास्थ्य-सुरक्षा की सबसे विकट परीक्षा है. यदि भारत समेत उन देशों के आंकड़ों पर नज़र डालें जहाँ कोरोनावायरस महामारी विकराल रूप लिए हुए है तो यह ज्ञात होगा कि जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह (डायबिटीज), दीर्घकालिक श्वास रोग, आदि है, उनको कोरोनावायरस संक्रमण होने पर, अति-गंभीर परिणाम होने का खतरा अत्याधिक है (जिसमें मृत्यु भी शामिल है). गौर करने की बात यह है कि तम्बाकू इन सभी रोगों का खतरा बढ़ाता है. तम्बाकू पर जब तक पूर्ण-विराम नहीं लगेगा तब तक यह मुमकिन ही नहीं है कि तम्बाकू-जनित रोगों की महामारियों पर अंकुश लग पाए, और इनमें कोरोनावायरस महामारी भी शामिल हो गयी है.
कोरोनावायरस रोग महामारी नियंत्रण में, प्रवासी श्रमिकों के साथ अमानवीयता क्यों?
दुनिया भर में अब कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 47 लाख से ऊपर पहुँच गयी है और 3.13 लाख लोग मृत हुए हैं. परन्तु जन स्वास्थ्य आपदा और महामारी नियंत्रण के प्रयासों के दौरान, श्रमिकों के साथ बर्बर अमानवीयता क्यों हो गयी?
नर्स संगठनों की है मांग कि सबके लिए हो स्वास्थ्य सुरक्षा एक समान
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क्या शराब और तम्बाकू से कोरोना वायरस रोकधाम खतरे में पड़ जायेगा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों से कोरोना वायरस रोग होने पर गंभीर परिणाम होने का खतरा बढ़ता है और मृत्यु तक हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू और शराब दोनों के सेवन की, कोई भी सुरक्षित सीमा नहीं है – यानि कि, हर रूप में और हर मात्रा में, यह हानिकारक हैं. जब देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा था और तालाबंदी हो गयी थी, तब शराब कंपनियां सरकार पर यह दबाव बनाने का प्रयास कर रही थीं कि शराब को ‘अति-आवश्यक श्रेणी’ में लाया जाए क्योंकि खाद्य सामग्री की तरह शराब ही अति-आवश्यक है. कोरोना वायरस महामारी में शायद पृथ्वी पर हर इंसान को यह समझ में आ गया है कि भोजन कितना आवश्यक है परन्तु शराब और तम्बाकू, न केवल, गैर ज़रूरी हैं बल्कि कोरोना वायरस रोग का खतरा भी बढ़ाते हैं.
कोरोना वायरस रोग महामारी पर अंकुश के लिए क्यों है ज़रूरी तम्बाकू उन्मूलन?
[English] भारत समेत जो देश इस समय कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) महामारी से जूझ रहे हैं, उनके वैज्ञानिक शोध आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जो लोग अधिक आयु के हैं और जिन्हें गैर-संक्रामक रोग हैं, उन्हें कोविड-19 के गंभीर लक्षण हो सकते हैं और मृत्यु होने की सम्भावना भी अधिक है. विश्व में गैर-संक्रामक रोग के कारण 70% मृत्यु होती है. हृदय रोग, पक्षाघात, कैंसर, मधुमेह, दीर्घकालिक श्वास रोग, आदि प्रमुख गैर-संक्रामक रोग हैं. इन सभी गैर-संक्रामक रोगों का खतरा अत्याधिक बढ़ाता है - तम्बाकू सेवन. किसी भी प्रकार के तम्बाकू सेवन करने से, जानलेवा गैर संक्रामक रोग का खतरा मंडराने लगता है और कोविड-19 होने पर भी परिणाम घातक हो सकते हैं.
कोरोना संकट ने गैर-बराबरी खत्म करने का मौका उपलब्ध कराया है
प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ संदीप पाण्डेय व बॉबी रमाकांत
9 महीने शेष हैं: क्या हम एड्स-संबंधित 2020 लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे?
यदि अन्य स्वास्थ्य मुद्दों से तुलना की जाये तो यह सही है कि एचआईवी/एड्स कार्यक्रम ने पिछले अनेक सालों में अद्वितीय सफलता हासिल की है. एचआईवी रोकधाम के लिए बेमिसाल अभियान चले, नि:शुल्क जांच और विश्व में लगभग 2 करोड़ लोगों को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवा मिली, वैज्ञानिक शोध के जरिये बेहतर दवाएं मिली, मानवाधिकार के अनेक जटिल मुद्दे उठे (जैसे कि, लिंग-जनित और यौनिक समानता), आदि. सबसे महत्वपूर्ण है कि आज यदि मानक के अनुसार जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवा और अन्य देखभाल मिले, तो एचआईवी के साथ जीवित व्यक्ति का वायरल लोड नगण्य रहेगा, वह एक सामान्य ज़िन्दगी जी सकता है, और उससे किसी को भी एचआईवी संक्रमण नहीं फैलेगा. परन्तु नए एचआईवी संक्रमण दर अभी भी अत्याधिक चिंताजनक है. एक ओर एचआईवी के साथ जीवित लोगों को स्वस्थ रखने की दिशा में सराहनीय प्रयास हुए, वहीं दूसरी ओर, विराट चुनौतियाँ अभी भी हैं.
बिक्री-दुकान पर भी नहीं तम्बाकू उत्पाद प्रदर्शित कर सकते: बोगोर की जनता ने जीता कोर्ट केस
जैसे-जैसे दुनिया भर से वैज्ञानिक शोध पर आधारित प्रमाण आते गए कि तम्बाकू सेवन जानलेवा है, सरकारों ने तम्बाकू-उद्योग के तमाम हथकंडों के बावजूद, तम्बाकू नियंत्रण के प्रयास भी किये. उदाहरण के तौर पर, तम्बाकू उत्पाद के विज्ञापन पर प्रतिबन्ध लगने लगा परन्तु तम्बाकू उद्योग ने, बिक्री-दुकान पर, विज्ञापन और उत्पाद-प्रदर्शित करना नहीं छोड़ा. इंडोनेशिया के बोगोर शहर की जनता ने कोर्ट में केस जीता कि तम्बाकू बिक्री-दुकान पर भी तम्बाकू उत्पादन का प्रदर्शन नहीं हो सकता. जनता की यह पहल अत्यंत सराहनीय है, विशेषकर इसलिए कि न सिर्फ इससे तम्बाकू नियंत्रण सशक्त होता है बल्कि अन्य शहर-देश की जनता को भी उम्मीद मिलती है कि तम्बाकू उद्योग को हराना और ज़िन्दगी को जिताना भी संभव है.
महिला समानता के बिना कैसे होगा सबका विकास?
8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला समानता केन्द्रीय बिंदु रहा. आज भी हमारे समाज में, यदि महिलाओं को बराबरी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हो तो यह विकास के ढाँचे पर भी सवाल उठाता है क्योंकि आर्थिक विकास का तात्पर्य यह नहीं है कि समाज में व्याप्त असमानताएं समाप्त हो जाएँगी. बल्कि विकास के ढाँचे बुनियादी रूप से ऐसे हैं कि अनेक प्रकार की असमानताएं और अधिक विषाक्त हो जाती हैं.
प्रजनन स्वास्थ्य सुरक्षा के बिना सतत विकास मुमकिन नहीं
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| डॉ शिवोर्ण वार, संयोजक, APCRSHR10 |
एड्स उन्मूलन का वादा पूरा करने के लिए 133 माह शेष
[English] सरकार के 2030 तक एड्स उन्मूलन के वादे को पूरा करने की दिशा में सराहनीय प्रगति तो हुई है परन्तु नए एचआईवी संक्रमण दर में वांछित गिरावट नहीं आई है जिससे कि आगामी 133 माह में एड्स उन्मूलन का स्वप्न साकार हो सके.
उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य है: नयी WHO रिपोर्ट
[English] विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नयी वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2019 के अनुसार, टीबी नियंत्रण में जो सफलता मिली है, वह सराहनीय तो है पर रोग-उन्मूलन के लिए पर्याप्त नहीं है. जब टीबी की पक्की जांच और पक्का इलाज मुमकिन है तो 2018 में क्यों 15 लाख लोग टीबी से मृत हुए और 1 करोड़ को टीबी रोग झेलना पड़ा?
2030 तक टीबी उन्मूलन के लिए ज़रूरी है कि 2020 तक टीबी के नए रोगी दर में सालाना 20% गिरावट आये और टीबी मृत्यु दर में 35% गिरावट. विश्व में सिर्फ एक छेत्र है जो 2020 टीबी नियंत्रण लक्ष्य पूरे करने की ओर अग्रसर है: यूरोप. 7 ऐसे देश हैं जहाँ टीबी का दर अत्याधिक है पर सतत प्रयास से वह भी 2020 लक्ष्य पूरे करने की ओर प्रगति कर रहे हैं: कीन्या, लिसोथो, म्यांमर, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंज़ानिया और ज़िम्बाब्वे. बाकि पूरी दुनिया 2020 लक्ष्य से फ़िलहाल बहुत पिछड़ी हुई है.
2030 तक टीबी उन्मूलन के लिए ज़रूरी है कि 2020 तक टीबी के नए रोगी दर में सालाना 20% गिरावट आये और टीबी मृत्यु दर में 35% गिरावट. विश्व में सिर्फ एक छेत्र है जो 2020 टीबी नियंत्रण लक्ष्य पूरे करने की ओर अग्रसर है: यूरोप. 7 ऐसे देश हैं जहाँ टीबी का दर अत्याधिक है पर सतत प्रयास से वह भी 2020 लक्ष्य पूरे करने की ओर प्रगति कर रहे हैं: कीन्या, लिसोथो, म्यांमर, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंज़ानिया और ज़िम्बाब्वे. बाकि पूरी दुनिया 2020 लक्ष्य से फ़िलहाल बहुत पिछड़ी हुई है.
बिना मानवाधिकार उल्लंघन के, व्यापार करे उद्योग: वैश्विक संधि की ओर प्रगति
[English] संयुक्त राष्ट्र में दुनिया भर से आए देश एक वैश्विक संधि को पारित करने के लिए एकजुट हैं जो यह सुनिश्चित करे कि जब बहुराष्ट्रीय उद्योग व्यापार करें तो किसी भी क़िस्म का मानवाधिकार उल्लंघन न हो, और दोषी को जवाबदेह ठहराया जा सके।
एजेंडा 2030: सतत विकास के लिए ज़रूरी है कार्यसाधकता
यदि सरकारें विकास को पूर्ण कार्यसाधकता के साथ न करें तो अक्सर परिणाम अपेक्षा से विपरीत रहते हैं। “कार्यसाधकता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि पूर्व में विकास कार्य पूरी ईमानदारी और निष्ठा से नहीं हुए हैं” कहना है जस्टिन किलकुल्लेन का जो सीपीडीई (सीएसओ पार्टनरशिप फ़ॉर डिवेलप्मेंट इफ़ेक्टिवनेस) के सह-अध्यक्ष हैं।
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