सामाजिक संगठनों ने हिंदुस्तान टाईम्स पर पुलिस के हमले की निंदा की: बच्ची के लिये न्याय की मांग

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, आशा परिवार और लोक राजनीति मंच के कार्यकर्ताओं ने कानपुर के हिंदुस्तान टाईम्स कार्यालय पर पुलिस के हमले की निंदा की, और कानपुर में दस-वर्षीया बच्ची के साथ हुए यौनिक शोषण और अंतत: मृत्यु के लिये जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ करवाई करने में ढिलाई की भी आलोचना की. दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई करने के बजाय पुलिस हिंदुस्तान टाईम्स जैसे अख़बारों पर हमला बोल रही है जिन्होंने निडर हो कर जिम्मेदारी से पत्रकारिता के जरिये बच्ची के लिये न्याय की मांग की.

अख़बारों और कानपुर के निवासियों से जो पता चला है, उससे ये साफ़ ज़ाहिर है कि बच्ची के साथ यौनिक हिंसा और उसकी हत्या के मामले में पुलिस इमानदारी से जांच नहीं कर रही है. रपट है कि बच्ची के परिवारजनों तक को परेशान कर रही है और पुलिस का कथन बच्ची के हुए चिकत्सकीय परीक्षण की रपट से बिलकुल भिन्न है. जब अख़बारों जैसे कि हिंदुस्तान टाईम्स और दैनिक हिंदुस्तान ने इन तथ्यों को जागरूक किया और बच्ची के लिये न्याय की मांग की, तब पुलिस ने उनके कार्यालय पर धावा बोल दिया.

कानपुर पुलिस के इस रवैये से हम सब बेहद चिंतित हैं - और प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि जो लोग बच्ची के साथ इस जघन्य कृत्य के लिये जिम्मेदार हैं, उनको पुलिस के कार्य में दखलंदाज़ी नहीं करने दी जाए, और उनके खिलाफ सख्त कारवाई हो.
डॉ संदीप पाण्डेय, अरुंधती धुरु, एस.आर.दारापुरी, किरण जैसवार, देवेश, आशीष श्रीवास्तव, अरविन्द मूर्ति, राजीव यादव, शाहनवाज़ आलम, केशव चाँद, महेश कुमार पाण्डेय, नन्दलाल, बाबी रमाकांत, एवं अन्य लोग जो आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय एवं लोक राजनीति मंच से जुड़े हैं.
फ़ोन: २३४७३६५, ९४१५०२२७७२ (अरुंधती धुरु/ डॉ संदीप पाण्डेय), ९८३९० ७३३५५ (बाबी)
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