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चर्नोबिल दिवस: भारत अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे और खुली जांच करे

चर्नोबिल दिवस: २६ अप्रैल
[English] [फोटो] आज २६ अप्रैल २०११ को चर्नोबिल परमाणु दुर्घटना हुए २५ साल हो गए हैं. चर्नोबिल दिवस के उपलक्ष्य में आज, जहांगीराबाद मीडिया इंस्टीटयूट, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, आशा परिवार और नागरिकों का स्वस्थ लखनऊ अभियान ने वृत्तचित्र प्रदर्शनी एवं परिचर्चा आयोजित की.

शांति एवं विकास के लिये भारतीय चिकित्सक संघ के अध्यक्ष और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार विजेता प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त और मग्सेसे पुरुस्कार विजेता डॉ संदीप पाण्डेय इस परिचर्चा के मुख्य वक्ता थे.

अखिल भारतीय सर्जनों के संघ के नव-निर्वाचित अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "परमाणु रेडियोधर्मिता से कैंसर, विशेषकर खून का कैंसर, आनुवांशिक परिवर्तन, आदि हो जाता है. क्या हमारी चिकित्सकीय व्यवस्था परमाणु आपात स्थिति से निबटने के लिये तैयार है?".

डॉ संदीप पाण्डेय ने कहा कि "जापान में हुई परमाणु आपात स्थिति के बाद तो इस बात पर किसी संदेह का प्रश्न ही नहीं उठता है कि दुनिया में सभी परमाणु कार्यक्रमों को, चाहे वो सैन्य या उर्जा के लिये हों, उनको जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी बंद करना होगा."

डॉ संदीप पाण्डेय ने कहा कि "पर्यावरण के लिए लाभकारी तरीकों से उर्जा बनाने के बजाय भारत परमाणु जैसे अत्यंत खतरनाक और नुकसानदायक ऊर्जा उत्पन्न करने के तरीकों को अपना रहा है. विकसित देशों में परमाणु ऊर्जा एक असफल प्रयास रहा है. विश्व में अभी तक परमाणु कचरे को नष्ट करने का सुरक्षित विकल्प नही मिल पाया है, और यह एक बड़ा कारण है कि विकसित देशों में परमाणु ऊर्जा के प्रोजेक्ट ठंडे पड़े हुए हैं. भारत सरकार क्यों भारत-अमरीका परमाणु समझौते को इतनी अति-विशिष्ठ प्राथमिकता दे रही है और इरान-पाकिस्तान-भारत तक की गैस पाइपलाइन को नकार रही है, यह समझ के बाहर है."

डॉ संदीप पाण्डेय ने कहा कि "किसी भी देश क लिए ऊर्जा सुरक्षा के मायने यह हैं कि वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति इस तरीके से हो कि सभी लोग ऊर्जा से लाभान्वित हो सकें, पर्यावरण पर कोई कु-प्रभाव न पड़े, और यह तरीका स्थायी हो, न कि लघुकालीन. इस तरह की ऊर्जा नीति अनेकों वैकल्पिक ऊर्जा का मिश्रण हो सकती है जैसे कि, सूर्य ऊर्जा, पवन ऊर्जा, छोटे पानी के बाँध आदि, गोबर गैस इत्यादि."
परमाणु दुर्घटनाओं की त्रासदी संभवत: कई पीढ़ियों को झेलनी पड़ती है जैसे कि भोपाल गैस काण्ड और हिरोशिमा नागासाकी त्रसिदियों को लोगों ने इतने बरस तक झेला. हमारी मांग है कि भारत बिना-देरी शांति के प्रति सच्ची आस्था का परिचय दे और सभी परमाणु कार्यक्रमों को बंद करे.

बाबी रमाकांत - सी.एन.एस.

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