धुआं-रहित तम्बाकू भी उतनी घातक है जितना धूम्रपान

[English] धुआं-रहित तम्बाकू (गुटखा, खैनी आदि) भी जान-लेवा बीमारियों, विकृतियों और मृत्यु का जनक है, तम्बाकू किसी भी रूप में ली जाए, धुआं-रहित या धूम्रपान हो - स्वास्थ्य के लिये घातक हो सकती है. अखिल भारतीय सर्जनों के संगठन के निर्वाचित अध्यक्ष एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक द्वारा पुरुस्कृत प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त, डी-ब्लाक इंदिरा नगर स्थित डैफ़ोडिल्स कॉन्वेंट इंटर कॉलेज में मुख्य-वक्ता थे और छात्रों एवं शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे.

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त, छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय के भूतपूर्व मुख्य-चिकित्सा अधीक्षक एवं सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष रहे हैं एवं वर्तमान में 'पाइल्स तो स्माइल्स केंद्र' और सिप्स अस्पताल के निदेशक हैं.

डैफ़ोडिल्स कॉन्वेंट इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पियूष मिश्रा के साथ प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने छात्रों एवं शिक्षकों को किसी भी रूप में तम्बाकू का सेवन न करने की शपथ दिलवाई.

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने बताया कि "अमरीका की सी.डी.सी. के अनुसार धुआं रहित तम्बाकू में भी २८ कैंसर पैदा करने वाले तत्व होते हैं और धुआं-रहित तम्बाकू कैंसर का एक जनक है, खासतौर पर मुहं का कैंसर होने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है."

पुरुस्कृत पुस्तक "राख के ढेर पर" के लेखक प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "धुआं-रहित तम्बाकू से ल्यूकोप्लेकिया (कैंसर से पहले वाली स्थिति जिसमें गाल के अन्दर की त्वचा सख्त और सफ़ेद धब्बे युक्त हो जाती है) होने का खतरा सर्वाधिक है. जबड़ों और दाँतों के अन्य रोग भी इसी से होते है."

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने बताया कि "धुआं-रहित तम्बाकू से भी गर्भावस्था में कु-प्रभाव पड़ता है - जैसे कि प्रे-क्लैम्पसिया (उच्च रक्त चाप, सूजन आदि), समय से पहले ही बच्चे का जन्म, और जन्म से समय बच्चे का वजन कम होना आदि शामिल हैं."

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "पुरुषों में धुआं रहित तम्बाकू से भी वीर्य-संख्या का कम होना आदि कुप्रभाव शामिल हैं."

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने बताया कि "जो बच्चे और युवा धुआं-रहित तम्बाकू का सेवन करते हैं उनकी धूम्रपान करने की सम्भावना अधिक होती है. तम्बाकू कर रूप में घातक है, इससे दूर रहे और जो लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं वो इसको बिना विलम्ब त्यागें जिससे कि स्वास्थ्य पर तम्बाकू जनित  कुप्रभावों का असर कम-से-कम हो सके."

इस कार्यक्रम में लखनऊ के अन्य जाने-माने लोग उपस्थित थे जिनमें राहुल कुमार द्विवेदी, शोभा शुक्ला, रितेश आर्य, आनंद पाठक, प्रमुख थे. इस कार्यक्रम को नागरिकों का स्वस्थ लखनऊ अभियान, इंडियन सोसाइटी अगेंस्ट स्मोकिंग, अभिनव भारत फाउनडेशन, और आशा परिवार ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था.

सी.एन.एस. 

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