[English] शरीर पर अपने फैसले लेने का अधिकार, गर्भनिरोधक का विकल्प, सुरक्षित गर्भपात और मातृ स्वास्थ्य - इन मुद्दों को आमतौर पर स्वास्थ्य और मानवाधिकार के नजरिए से देखा जाता है। लेकिन "गुटमाकर इंस्टिट्यूट" की "एडिंग इट अप" रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहलू सामने रखती है: यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर 'खर्च' नहीं है, बल्कि ऐसा निवेश है जो जीवनरक्षक है, अनचाहे गर्भधारण कम कर सकता है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भविष्य का आर्थिक बोझ भी घटा सकता है।
यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश क्यों जरूरी है
[English] शरीर पर अपने फैसले लेने का अधिकार, गर्भनिरोधक का विकल्प, सुरक्षित गर्भपात और मातृ स्वास्थ्य - इन मुद्दों को आमतौर पर स्वास्थ्य और मानवाधिकार के नजरिए से देखा जाता है। लेकिन "गुटमाकर इंस्टिट्यूट" की "एडिंग इट अप" रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहलू सामने रखती है: यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर 'खर्च' नहीं है, बल्कि ऐसा निवेश है जो जीवनरक्षक है, अनचाहे गर्भधारण कम कर सकता है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भविष्य का आर्थिक बोझ भी घटा सकता है।
यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकारों के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत, सुरक्षित गर्भपात और गर्भनिरोधक सेवाओं तक पहुंच पर जोर
विशेषज्ञों ने कहा—अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहें, बजट से लेकर जमीनी स्तर पर सेवाओं की उपलब्धता तक जवाबदेही जरूरी

विश्व गर्भनिरोधक दिवस (26 सितंबर) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस (28 सितंबर) से पहले विशेषज्ञों और महिला अधिकार नारीवादी कार्यकर्ताओं ने सभी लोगों के लिए सुरक्षित, कानूनी, सुलभ और कलंक-मुक्त गर्भपात सेवाओं तथा गर्भनिरोधक विकल्पों की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
लंबी ज़िंदगी, समान अधिकार: बढ़ती उम्र में जेंडर समानता और मानवाधिकार क्यों ज़रूरी हैं
[English] अक्टूबर 2026 वृद्ध व्यक्तियों के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 1 अक्टूबर को दुनिया अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाएगी, जिसका विषय है "दीर्घायु का युग: लंबी ज़िंदगी के लिए व्यवस्थाओं पर नए सिरे से विचार"। उसी महीने बाद में, वृद्ध व्यक्तियों के मानवाधिकारों पर अंतर-सरकारी कार्य समूह, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में अपनी अगली बैठक करेगा ताकि एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि के मसौदे पर काम आगे बढ़ाया जा सके।
भेष के पीछे छिपा अधिकार-विरोध: महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई
[English] सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अब केवल 52 महीने बचे हैं। लेकिन जेंडर समानता और स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़े लक्ष्यों पर दुनिया की गति चिंताजनक रूप से धीमी है। कानूनी रूप से बाध्यकारी संधियों, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और दशकों की वैश्विक प्रतिबद्धताओं से हासिल प्रगति, अब बढ़ते और बहुरूपी अधिकार-विरोधी अभियान के निशाने पर है।
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