यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकारों के लिए निवेश बढ़ाने की जरूरत, सुरक्षित गर्भपात और गर्भनिरोधक सेवाओं तक पहुंच पर जोर

विशेषज्ञों ने कहा—अधिकार केवल कागजों तक सीमित न रहें, बजट से लेकर जमीनी स्तर पर सेवाओं की उपलब्धता तक जवाबदेही जरूरी


विश्व गर्भनिरोधक दिवस (26 सितंबर) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस (28 सितंबर) से पहले विशेषज्ञों और महिला अधिकार नारीवादी कार्यकर्ताओं ने सभी लोगों के लिए सुरक्षित, कानूनी, सुलभ और कलंक-मुक्त गर्भपात सेवाओं तथा गर्भनिरोधक विकल्पों की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

SHE & Rights की समन्वयक नारीवादी कार्यकर्ता शोभा शुक्ला ने कहा कि सुरक्षित गर्भपात केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि जीवनरक्षक स्वास्थ्य सुविधा और मौलिक मानव अधिकार भी है। उन्होंने कहा कि प्रजनन संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता, जेंडर समानता और स्वास्थ्य के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक पहुंच बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में जेंडर समानता और स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अब केवल 51 महीने बचे हैं। इसके बावजूद दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता, जेंडर समानता और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों पर दबाव बढ़ रहा है।

शुक्ला ने कहा, “महिलाओं के शरीर, उनकी शारीरिक स्वायत्तता और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े अधिकार लंबे समय से पितृसत्तात्मक व्यवस्था के संघर्ष का मैदान बने हुए हैं। ऐसे में अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं में पर्याप्त निवेश भी जरूरी है।”

स्वास्थ्य में निवेश के साथ आर्थिक लाभ भी


Guttmacher Institute की “Adding It Up 2024” रिपोर्ट के अनुसार, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों में निवेश केवल स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर होने वाले खर्च में बचत के साथ व्यापक आर्थिक लाभ भी मिल सकते हैं।

128 निम्न और मध्यम आय वाले देशों के अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट में गर्भनिरोधक सेवाओं, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य देखभाल, गर्भपात सेवाओं और चार उपचार योग्य यौन संचारित संक्रमणों के इलाज की जरूरत तथा इन सेवाओं के लिए आवश्यक निवेश का आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इन सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रति व्यक्ति सालाना खर्च को 5.87 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 8.61 डॉलर करना होगा। यानी प्रति व्यक्ति अतिरिक्त 2.74 डॉलर या कुल करीब 12.4 अरब डॉलर सालाना के अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक सेवाओं में लगाया गया हर अतिरिक्त एक डॉलर गर्भावस्था और नवजात देखभाल से जुड़े खर्च में करीब 1.97 डॉलर की बचत कर सकता है।

निवेश बढ़े तो मातृ और नवजात मौतों में बड़ी कमी संभव


अध्ययन के मुताबिक, पूरे एशिया में यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करने से अनपेक्षित गर्भधारण में 26 फीसदी, मातृ मृत्यु में 65 फीसदी और नवजात मृत्यु में 62 फीसदी तक कमी आ सकती है।

गर्भनिरोधक सेवाओं के विस्तार से स्वास्थ्य लाभ के अलावा आर्थिक फायदे भी हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गर्भनिरोधक साधनों तक बेहतर पहुंच महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने और उनकी आय तथा बचत पर नियंत्रण मजबूत करने में मदद कर सकती है।

Guttmacher Institute की अंतरराष्ट्रीय शोध निदेशक डॉ. एलिजाबेथ ए. सुली ने 2026 के गर्भनिरोधक दिवस और सुरक्षित गर्भपात दिवस से पहले आयोजित SHE & Rights के एक सत्र में रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए। कार्यक्रम का आयोजन Global Center for Health Diplomacy and Inclusion (CeHDI), Guttmacher Institute, ARROW, International Planned Parenthood Federation, CNS और सहयोगी संगठनों ने किया।

‘अपूर्ण जरूरत’ से आगे, महिलाओं की पसंद को भी मिले महत्व


विशेषज्ञों ने गर्भनिरोधक जरूरतों को मापने के पारंपरिक तरीके पर भी सवाल उठाया है। Guttmacher Institute की रिपोर्ट में गर्भनिरोधक जरूरतों को आंकने के लिए अधिक व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई है, जिसमें महिलाओं की पसंद, अधिकार और अपनी प्रजनन क्षमता से जुड़े निर्णय लेने की स्वतंत्रता को केंद्र में रखा गया है।

एशिया में प्रजनन आयु की करीब 12.9 करोड़ महिलाओं के बारे में अनुमान है कि उन्हें आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों की जरूरत है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। हालांकि, इस आंकड़े में ऐसी महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं जो पारंपरिक गर्भनिरोधक विधियों का इस्तेमाल कर रही हैं और आधुनिक साधनों पर जाना नहीं चाहतीं।

इसी वजह से रिपोर्ट “unmet demand” यानी अपूर्ण मांग की अवधारणा पर भी ध्यान देती है। इसमें उन महिलाओं को शामिल किया जाता है जो गर्भधारण से बचना चाहती हैं, फिलहाल गर्भनिरोधक साधन का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं और भविष्य में परिवार नियोजन की इच्छा रखती हैं।

इस आधार पर निम्न और मध्यम आय वाले एशियाई देशों में करीब 3.6 करोड़ महिलाओं की गर्भनिरोधक सेवाओं के लिए अपूर्ण मांग होने का अनुमान है।

एशिया में हर साल 12 करोड़ से ज्यादा गर्भधारण


डॉ. सुली के अनुसार, एशिया में हर साल करीब 12.06 करोड़ गर्भधारण होते हैं। इनमें लगभग 63 फीसदी का परिणाम जीवित जन्म के रूप में होता है। करीब 19.4 फीसदी गर्भधारण सुरक्षित गर्भपात, 21.3 फीसदी असुरक्षित गर्भपात और 16.7 फीसदी गर्भपात (miscarriage) या मृतजन्म (stillbirth) में समाप्त होते हैं।

Guttmacher Institute ने परिवार नियोजन और सुरक्षित गर्भपात में निवेश के संभावित प्रभावों को समझने के लिए दो ऑनलाइन उपकरण भी विकसित किए हैं।

Family Planning Investment Impact Calculator किसी देश और निवेश की राशि के आधार पर यह अनुमान लगाने में मदद करता है कि कितनी महिलाओं और दंपतियों तक गर्भनिरोधक सेवाएं पहुंच सकती हैं, कितने अनपेक्षित गर्भधारण रोके जा सकते हैं, कितने असुरक्षित गर्भपात टाले जा सकते हैं और स्वास्थ्य प्रणाली के खर्च में कितनी बचत हो सकती है।

Safe Abortion Calculator सुरक्षित और असुरक्षित गर्भपात से जुड़ी लागत और स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन करने में मदद करता है। इसके जरिए सुरक्षित गर्भपात सेवाओं का विस्तार होने पर स्वास्थ्य लाभ और गर्भपात के बाद की देखभाल की जरूरत में संभावित कमी का अनुमान लगाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय वादों से आगे बढ़कर राष्ट्रीय बजट में दिखे निवेश


Asian-Pacific Resource and Research Centre for Women (ARROW) की प्रोग्राम अधिकारी रिजू धकाल ने सवाल उठाया कि यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए वादे क्या वास्तव में देशों के स्वीकृत बजट में दिखाई देते हैं।

ARROW भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मालदीव समेत 12 देशों में साझेदार संगठनों के साथ काम कर रहा है। इसका उद्देश्य इन देशों में यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए वित्तपोषण की स्थिति का अध्ययन करना और सरकारों के साथ निवेश तथा उसके प्रभाव को लेकर संवाद करना है।

धकाल ने कहा कि विकास सहायता में कमी के मौजूदा दौर में यह और जरूरी हो गया है कि सरकारों की घोषणाओं और वास्तविक बजट आवंटन के बीच अंतर को देखा जाए। उनके मुताबिक 2024 से 2026 के बीच यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए आधिकारिक विकास सहायता में 46 फीसदी की कमी आई है।

उन्होंने Guttmacher Institute के दोनों कैलकुलेटरों का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर आंकड़ों को समझने, सरकारी प्रतिबद्धताओं को ट्रैक करने और यह जांचने की जरूरत बताई कि किए गए वित्तीय वादे वास्तव में राष्ट्रीय बजट में शामिल हुए या नहीं।

उन्होंने कहा कि केवल बजट में राशि घोषित होना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि पैसा जारी हुआ या नहीं और अंततः स्वास्थ्य सेवाओं तथा समुदायों तक पहुंचा या नहीं।

केन्या में कानून और जमीनी हकीकत के बीच अंतर


Reproductive Health Network Kenya की एसोसिएट डायरेक्टर (Advocacy and Partnerships) जेन न्यानजोम ने कहा कि International Safe Abortion Day और World Contraception Day जैसे अवसरों को महिलाओं और लड़कियों की रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़कर देखना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि कानूनी रूप से बाध्यकारी Maputo Protocol प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों, गर्भनिरोधक सेवाओं और चिकित्सीय गर्भपात तक पहुंच को मान्यता देता है। लेकिन कानून में अधिकार होने भर से सेवाएं स्वतः उपलब्ध नहीं हो जातीं। इसके लिए कानून, नीतियों, वित्तपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच प्रभावी तालमेल जरूरी है।

न्यानजोम ने केन्या में गर्भनिरोधक सामग्री की कमी, खासकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए, चिंता का विषय बताया। उन्होंने युवाओं के अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं, सही जानकारी, प्रभावी रेफरल प्रणाली और सूचित निर्णय लेने के अधिकार की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि गर्भपात को लेकर कानूनी प्रावधान और महिलाओं को वास्तविक रूप से उपलब्ध सेवाओं के बीच अंतर अभी भी एक बड़ी चुनौती है। केवल गर्भपात के बाद की देखभाल उपलब्ध होना इस बात की गारंटी नहीं है कि महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक भी प्रभावी पहुंच हासिल है।

उनके मुताबिक, कागज पर दर्ज अधिकारों को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, पर्याप्त वित्तपोषण, आवश्यक सामग्री, रेफरल व्यवस्था और जमीनी स्तर पर सुलभ सेवाओं के रूप में लागू करना होगा।

सुरक्षित गर्भपात के रास्ते में कई बाधाएं


Women's Global Network for Reproductive Rights (WGNRR) की कार्यकारी निदेशक और International Safe Abortion Day के वैश्विक अभियान का समन्वय करने वाली नावमी नाज़ चौधरी ने कहा कि “प्रजनन अधिकारों का वास्तविक अर्थ तभी है जब वे वास्तविक सेवाओं तक पहुंच में बदलें।”

उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए परामर्शों में गर्भपात सेवाओं तक पहुंच में कई बाधाओं की पहचान हुई है। इनमें राजनीतिक और अधिकार-विरोधी माहौल, संघर्ष एवं मानवीय संकट, विस्थापन, नागरिक समाज और वित्तपोषण के लिए सीमित होता स्थान, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और दवाओं की कमी, कमजोर रेफरल व्यवस्था, प्रशासनिक अड़चनें, उपचार की लागत, भौगोलिक दूरी, सामाजिक कलंक और गलत जानकारी शामिल हैं।

चौधरी के अनुसार, Guttmacher Institute के दोनों कैलकुलेटरों की मदद से स्थानीय संगठनों और समुदायों के अनुभवों को देश-विशिष्ट आर्थिक एवं स्वास्थ्य आंकड़ों के साथ जोड़ा जा सकता है। इससे नीति निर्माण और बजट संबंधी मांगों को स्थानीय वास्तविकताओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

कमजोर आबादी तक पहुंचे स्वास्थ्य व्यवस्था


इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय में निदेशक डॉ. इमरान पंबुडी ने कहा कि किसी स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती इस बात से भी तय होती है कि वह उन आबादी समूहों की कितनी प्रभावी ढंग से सेवा और सुरक्षा करती है जिन्हें अतिरिक्त सहायता की जरूरत होती है।

इनमें दिव्यांग व्यक्ति, दूरदराज के द्वीपों में रहने वाली आबादी, हिंसा से बचे लोग, बुजुर्ग तथा हाशिए पर रहने वाली महिलाएं और किशोर-किशोरियां शामिल हैं।

उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को शामिल करने, व्यक्ति-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने, मरीज की गरिमा की रक्षा करने, स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने तथा दवाओं और रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

केवल पैसा नहीं, प्रभावी और अधिकार-आधारित सेवाएं भी जरूरी


SHE & Rights के विशेषज्ञों ने कहा कि यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए केवल बजट बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सेवाएं सुलभ, किफायती, पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों से लैस और लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों।

विशेष रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाली आबादी तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिकार-आधारित और व्यक्ति-केंद्रित बनाना होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब वे पर्याप्त बजट, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, आवश्यक दवाओं और सामग्री तथा जमीनी स्तर पर उपलब्ध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में बदलें।

सीएनएस (सिटीज़न न्यूज़ सर्विस)

24 सितंबर 2026