यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश क्यों जरूरी है


[English] शरीर पर अपने फैसले लेने का अधिकार, गर्भनिरोधक का विकल्प, सुरक्षित गर्भपात और मातृ स्वास्थ्य - इन मुद्दों को आमतौर पर स्वास्थ्य और मानवाधिकार के नजरिए से देखा जाता है। लेकिन "गुटमाकर इंस्टिट्यूट" की "एडिंग इट अप" रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहलू सामने रखती है: यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर 'खर्च' नहीं है, बल्कि ऐसा निवेश है जो जीवनरक्षक है, अनचाहे गर्भधारण कम कर सकता है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भविष्य का आर्थिक बोझ भी घटा सकता है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय शोध निदेशक डॉ एलिज़ाबेथ ए. सली ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस से पहले "शी & राइट्स" सत्र में साझा किए। रिपोर्ट 128 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में गर्भनिरोधक सेवाओं, मातृ एवं नवजात देखभाल, गर्भपात सेवाओं और प्रमुख उपचार योग्य यौन संचारित संक्रमणों के इलाज की जरूरत, प्रभाव और लागत का आकलन करती है।

इस विश्लेषण का मूल संदेश सीधा है: अगर लोगों को वे यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिलें जिनकी उन्हें जरूरत है, तो स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होंगे और कई मामलों में स्वास्थ्य व्यवस्था का खर्च भी कम हो सकता है।

‘अपूर्ण जरूरत’ से ‘अपूर्ण मांग’ तक


गर्भनिरोधक सेवाओं की जरूरत को मापना जितना सरल दिखाई देता है, वास्तव में उतना है नहीं।

एशिया में प्रजनन आयु की लगभग 12.9 करोड़ महिलाओं को आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों की “अपूर्ण जरूरत” वाली श्रेणी में रखा जाता है। लेकिन इस आंकड़े में ऐसी महिलाएँ भी शामिल हो सकती हैं जो पारंपरिक गर्भनिरोधक तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं और उनसे संतुष्ट हैं। जरूरी नहीं कि वे आधुनिक तरीकों पर जाना चाहती हों।

इसीलिए डॉ सली ने "अपूर्ण माँग" पर जोर दिया है। इसमें उन महिलाओं को देखा जाता है जो गर्भधारण से बचना चाहती हैं, फिलहाल गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं और भविष्य में परिवार नियोजन की किसी विधि को अपनाने के लिए तैयार हैं।

यह बदलाव केवल शब्दावली का नहीं है। यह परिवार नियोजन को लोगों की वास्तविक पसंद और जरूरत के करीब लाता है।

अधिकार-आधारित परिवार नियोजन का मतलब लोगों को किसी खास गर्भनिरोधक तरीके को अपनाने के लिए मनाना नहीं है। इसका मतलब है कि जो व्यक्ति गर्भधारण से बचना चाहता है, उसे अपने लिए फैसला करने की स्वतंत्रता और उस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी सेवाएँ उपलब्ध हों।

इस पैमाने पर देखें तो एशिया के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में करीब 3.6 करोड़ महिलाओं में गर्भनिरोधक सेवाओं की अपूर्ण मांग है।

एशिया में लगभग हर दो में से एक गर्भधारण अनचाहा


एशिया में हर साल करीब 5.7 करोड़ अनचाहे गर्भधारण होते हैं। यह क्षेत्र में होने वाले कुल गर्भधारण का लगभग 47 प्रतिशत है।

डॉ सली के विश्लेषण के मुताबिक इनमें से 72 प्रतिशत गर्भधारण गर्भपात में, 17 प्रतिशत अनियोजित जन्म में और 11 प्रतिशत मृत-जन्म या स्वतः गर्भपात में समाप्त होते हैं।

अगर महिलाओं की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी सभी जरूरी सेवाएँ उपलब्ध करा दी जाएं, तो एशिया में अनचाहे गर्भधारण को 26 प्रतिशत तक और असुरक्षित गर्भपात को 25 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

इसका असर केवल गर्भधारण और गर्भपात के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। अनुमान के मुताबिक मातृ मृत्यु में 65 प्रतिशत, नवजात मृत्यु में 62 प्रतिशत और शिशुओं में नए HIV संक्रमण में 93 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।

यानी गर्भनिरोधक और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं केवल गर्भधारण रोकने का माध्यम नहीं हैं। वे मातृ और शिशु स्वास्थ्य की व्यापक तस्वीर को भी प्रभावित करती हैं।

एशिया में डॉलर 12.4 अरब की अतिरिक्त जरूरत


रिपोर्ट के अनुसार एशिया के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की सभी जरूरतें पूरी करने के लिए सालाना करीब अमेरिकी डॉलर 38.8 अरब की जरूरत होगी।

मौजूदा खर्च और पूरी जरूरत के बीच लगभग डॉलर 12.4 अरब का सालाना अंतर है।

इस अतिरिक्त राशि से गर्भनिरोधक सेवाओं, मातृ एवं नवजात देखभाल, गर्भपात सेवाओं और चार प्रमुख उपचार योग्य यौन संचारित संक्रमणों के इलाज को पूरी तरह वित्त पोषित किया जा सकता है।

प्रति व्यक्ति देखें तो इसका मतलब सालाना खर्च में लगभग डॉलर 2.74 की अतिरिक्त राशि जोड़ना है।

यह रकम अपने आप में छोटी या बड़ी है, इस पर बहस हो सकती है। लेकिन रिपोर्ट इसका एक दूसरा पहलू भी सामने रखती है: परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक सेवाओं में लगाया गया हर अतिरिक्त 1 डॉलर, अनचाहे गर्भधारण कम होने के कारण गर्भावस्था और नवजात देखभाल की लागत में अनुमानतः 1.97 डॉलर की बचत कर सकता है।

इसलिए सवाल केवल यह नहीं रह जाता कि स्वास्थ्य व्यवस्था को कितना खर्च करना होगा। सवाल यह भी है कि निवेश न करने की कीमत क्या होगी।

अफ्रीका की तस्वीर भी यही कहानी बताती है


अफ्रीका के निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हर साल अनुमानतः 2.9 करोड़ अनचाहे गर्भधारण होते हैं—कुल गर्भधारण का करीब 43 प्रतिशत।

यदि यौन और प्रजनन स्वास्थ्य की सभी जरूरतें पूरी की जाएं, तो मातृ मृत्यु में 67 प्रतिशत, नवजात मृत्यु में 70 प्रतिशत और छह सप्ताह तक की उम्र के शिशुओं में नए HIV संक्रमण में 87 प्रतिशत तक कमी संभव है।

इसके लिए व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं के पैकेज में सालाना अतिरिक्त 40.1 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी—यानी प्रति व्यक्ति लगभग 26.83 डॉलर।

लेकिन यहां भी निवेश और बचत के बीच स्पष्ट संबंध दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, गर्भनिरोधक सेवाओं में लगाया गया हर अतिरिक्त 1 डॉलर, मातृ, नवजात और गर्भपात संबंधी देखभाल की लागत में करीब 2.49 डॉलर की बचत कर सकता है।

एशिया और अफ्रीका की परिस्थितियां थोड़ी सी अलग हैं, लेकिन दोनों क्षेत्रों में एक बात समान है: प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश का असर स्वास्थ्य व्यवस्था के कई दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है।

गर्भनिरोधक सेवाएं अनचाहे गर्भधारण को कम करती हैं। इससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं, जटिल प्रसव, असुरक्षित गर्भपात और बाद की महंगी स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत भी घट सकती है।

इस अर्थ में गर्भनिरोधक स्वास्थ्य बजट की कोई अलग-थलग मद नहीं है। इसका संबंध मातृ स्वास्थ्य, नवजात स्वास्थ्य और पूरे स्वास्थ्य तंत्र की लागत से है।

आंकड़ों को नीति में बदलने की कोशिश


गुटमाकर इंस्टिट्यूट  ने अपने शोध को दो ऑनलाइन टूल्स के जरिए उपयोगी बनाने की कोशिश की है।

1) परिवार नियोजन निवेश प्रभाव कैलकुलेटर के जरिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि किसी देश या क्षेत्र में परिवार नियोजन में एक निश्चित राशि का निवेश करने से कितने लोगों तक आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाएं पहुंच सकती हैं, कितने अनचाहे गर्भधारण और असुरक्षित गर्भपात रोके जा सकते हैं, कितनी जानें बचाई जा सकती हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था को कितनी संभावित बचत हो सकती है।

2) सुरक्षित गर्भपात कैलकुलेटर, सुरक्षित गर्भपात सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों का अनुमान लगाता है।

उदाहरण के तौर पर, फिलीपींस देश में गर्भनिरोधक सेवाओं पर 10 लाख डॉलर के निवेश का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाया गया कि करीब 84,000 महिलाओं और दंपतियों तक आधुनिक गर्भनिरोधक सेवाएं पहुंच सकती हैं, 18,000 से अधिक अनचाहे गर्भधारण रोके जा सकते हैं और लगभग 4,000 असुरक्षित गर्भपात टाले जा सकते हैं।

बांग्लादेश के मामले में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं की उपलब्धता को मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने पर कुल लागत में अनुमानतः 57.5 प्रतिशत की कमी और करीब 2.7 करोड़ डॉलर की बचत का अनुमान सामने आया।

ऐसे निःशुल्क और ऑनलाइन टूल्स की उपयोगिता खास तौर पर तब बढ़ जाती है जब स्वास्थ्य बजट सीमित हों और विकास सहायता घट रही हो। वे चर्चा को अमूर्त अपील से निकालकर ठोस सवालों तक ले आते हैं: 

अगर किसी देश में अतिरिक्त पैसा लगाया जाए तो उससे क्या बदलेगा? कितने अनचाहे गर्भधारण रोके जा सकते हैं? कितनी जानें बचाई जा सकती हैं? और स्वास्थ्य व्यवस्था को कितनी बचत हो सकती है?


गुटमाकर इंस्टिट्यूट के अनुसार, ऐसे निवेश के प्रभावों का अनुमान देश और क्षेत्र के स्तर पर लगाया जा सकता है; हालांकि ये मॉडल-आधारित अनुमान हैं, न कि वास्तविक दुनिया में पहले से घट चुकी घटनाओं की गिनती।

वादे से बजट तक का सफर


एशियन-पसिफ़िक रिसोर्स एंड रिसर्च सेंटर (एरो) की कार्यक्रम अधिकारी रिजु ढकाल ने एक अहम सवाल उठाया है: क्या यौन और प्रजनन स्वास्थ्य तथा अधिकार को लेकर सरकारों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं वास्तव में राष्ट्रीय बजट में भी दिखाई देती हैं?

भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंडोनेशिया और मालदीव समेत 12 देशों में साझेदारों के साथ मिलकर "एरो" इस बात की पड़ताल कर रही है कि यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एवं अधिकार के लिए कितना वित्त उपलब्ध कराया जा रहा है और सरकारें निवेश तथा उसके प्रभाव को लेकर क्या कदम उठा रही हैं।

यहां केवल बजट घोषणा देखना पर्याप्त नहीं है।

यह देखना भी जरूरी है कि पैसा बजट में शामिल हुआ या नहीं, जारी हुआ या नहीं और अंततः स्वास्थ्य सेवाओं तथा समुदायों तक पहुंचा या नहीं।

यानी प्रतिबद्धता की असली परीक्षा घोषणा के समय नहीं, बल्कि उस समय होती है जब संसाधन वास्तव में स्वास्थ्य केंद्र और लोगों तक पहुंचते हैं।

गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी केवल महिलाओं की क्यों?


यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश की चर्चा एक दूसरी असमानता की ओर भी ध्यान दिलाती है—गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी का असमान बंटवारा।

व्यवस्था ऐसी होना चाहिए जहां लोगों के पास विकल्प हों और वे अपने प्रजनन संबंधी फैसले खुद ले सकें।

इसके बावजूद गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी आज भी मुख्यतः महिलाओं पर पड़ती है। दुनिया भर में गर्भनिरोधक इस्तेमाल में महिला नसबंदी की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है, जबकि पुरुष नसबंदी की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत है।

यह अंतर इस सवाल को सामने लाता है कि गर्भनिरोधक को सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी मानने के बजाय क्या इसे यौन साझेदारों की साझी जिम्मेदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

साथ ही, साझा जिम्मेदारी का मतलब महिलाओं के अपने शरीर और स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों पर उनकी स्वायत्तता को कम करना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखना होना चाहिए।

सुरक्षित गर्भपात भी स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा है


सुरक्षित गर्भपात को व्यापक यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसका संबंध स्वास्थ्य के अधिकार, प्रजनन संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता और लैंगिक समानता से भी है।

इसीलिए स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि: “प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना खर्च आएगा?”

उतना ही महत्वपूर्ण सवाल है: “अगर ये सेवाएँ उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो उसकी कीमत कितनी होगी?”

उस कीमत को केवल बजट की रकम में नहीं मापा जा सकता। वह अनचाहे गर्भधारण, असुरक्षित गर्भपात, रोकी जा सकने वाली बीमारियों, मातृ और नवजात मौतों तथा महिलाओं के खोए हुए अवसरों के रूप में सामने आती है।

आखिरकार सवाल चुनाव का है


यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश का अर्थ केवल अधिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना नहीं है। इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि लोगों के पास यह तय करने की वास्तविक क्षमता हो कि वे गर्भधारण करना चाहते हैं या नहीं, कब करना चाहते हैं और कितने बच्चे चाहते हैं।

इसमें गर्भनिरोधक तक पहुंच, गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएँ, सुरक्षित प्रसव, नवजात देखभाल और सुरक्षित गर्भपात जैसी सेवाएं शामिल हैं।

प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की कीमत डॉलर में गिनी जा सकती है। लेकिन इन सेवाओं में निवेश न करने की कीमत कहीं अधिक शर्मनाक है - अनचाहे गर्भधारण, रोकी जा सकने वाली बीमारी, असुरक्षित गर्भपात, असामयिक मृत हुए लोग, और महिलाओं के जीवन में छिन गए अवसर।

इसलिए परिवार नियोजन को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी मानने वाली पुरानी धारणाओं से आगे बढ़ने की जरूरत है। गर्भनिरोधक साझा जिम्मेदारी है; लेकिन अपने शरीर से जुड़े अंतिम फैसले लेने का अधिकार व्यक्ति की स्वायत्तता से जुड़ा है।

आखिरकार, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में निवेश का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है: क्या हम केवल स्वास्थ्य सेवाओं की लागत देख रहे हैं—या उन सेवाओं के न होने की कीमत भी गिन रहे हैं?

शोभा शुक्ला - सीएनएस

(सिटीज़न न्यूज़ सर्विस)
26 सितंबर 2026

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