फिलिप मौरिस की भारतीय सुब्सिदिअरी ने तम्बाकू नियांतरणअधिनियम का उलंघन किया

फिलिप मौरिस की भारतीय सुब्सिदिअरी ने तम्बाकू नियांतरणअधिनियम का उलंघन किया

ोया में विश्व की सबसे बड़ी तम्बाकू कंपनी फिलिप मौरिस की भारतीय सुब्सिदिअरी ने तम्बाकू उत्पादनों के ऐसे विज्ञापन लगाएं हैं जो भारतीय तम्बाकू नियांतरण अधिनियम का खुला उलंघन करते हैं.

तम्बाकू कम्पनियाँ अनेकों देशों में जन-स्वास्थ्य वाले अधिनियमों को नकार रही हैं” कहना है डॉ डगलस बेत्चेर का, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के तोबक्को-फ्री इनितिअतिवे या ‘तम्बाकू मुक्ति के लिए पहल’ कार्यक्राम के निदेशक हैं.

भारत में सिगारेत्ते एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम २००३की रूलिंग जो तम्बाकू के विज्ञापन पर रोक लगाती है, १ जनवरी २००६ से लागू हो चुके है. इसके अनुसार यदि कोई उलंघन हो, तो भारत सरकार को एवं प्रदेश सरकार को बिना विलम्ब और सख्त करवायी करनी चाहिऐ.

एन रूल्स के अनुसार, तम्बाकू के हर उत्पादनों पर पूरे भारत वर्ष में रोक लग चुकी है. सिर्फ एक जगह तम्बाकू का सिग्न-बोर्ड लग सकता है, और वह है जहाँ तम्बाकू का विक्रय होता है, और उसका भी साइज़ निर्धारित कर दिया गया है और ये भी स्पष्ट किया गया है कि सिग्न-बोर्ड पर क्या लिखा जा सख्त है.

तम्बाकू की दुकान पर सिग्न-बोर्ड का साइज़ तय है, और उस पर चेतावनी के स्साथ सिर्फ ये लिखा जा सकता है कि किस प्रकार की तम्बाकू दुकान में बिकत है. इस सिग्न-बोर्ड पर न तो कोई भी तम्बाकू का ब्रांड-नेम, या कोई भी स्लोगन आदि जैसा संदेश या कोई अन्य तस्वीर लगाने की अनुमति नही है.

परन्तु गोया में फिलिप मौरिस के विज्ञापन इस रूलिंग का खुला उलंघन करते हैं.”ये हमारे कानून का खुला उलंघन है” कहना है वरिष्ट तम्बाकू नियांतरण कार्यकर्ता और नोट इंडिया (तम्बाकू उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय संगठन) के महा-सचिव डॉ शेखर सलकर का.

भारतीय तम्बाकू नियांतरण अधिनियम के अनुसार तम्बाकू के विक्रय स्थान पर सिग्न-बोर्ड पर कोई भी तस्वीर लगाने की अनुमति नही , परन्तु पणजी गोया में मुनिसिपल गार्डन के सामने होटल लुच्क्य के पास जो तम्बाकू के विज्ञापन लगे हैं उनपर तस्वीर भी है. ऐसा ही उलंघन हो रह है उन विज्ञापनों से जो दव तालौलिकार हॉस्पिटल, खलाप मेंसिओं, वास्को, गोया में लगे हैं. इस कानून के मुताबिक तम्बाकू की दुकान पर सिर्फ ये लिखा जा सकता है कि यह सिगारेत्ते बिकती है” कहना है डॉ सलकर का.

विश्व-व्यापी तम्बाकू नियांतरण त्रेअटी को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती दे रही हैं बड़ी तम्बाकू कम्पनियाँ जो जन-स्वास्थ्य नीतियों में हस्त-छेप करती हैं. फिलिप मौरिस या अल्त्रिया, ब्रिटिश अमेरिकन तोबक्को (बात) और जापान तोबक्को (जत) तम्बाकू नियांतरण प्रयासों को कम्जूर, स्थगित और नकार करने में अपना राजनितिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं” ऐसा कहना है कार्पोरेट अच्कोउन्ताबिलिटी इंटरनेशनल (विश्व में उद्योगों को जवाबदेह ठहराने लिए संगठन) के कथ्य मुल्वेय का.

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सिगारेत्ते एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम २००३ की इस रूलिंग क इक भाग का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है (त्रुटियों के लिए छमा):

१) पुराने तम्बाकू उत्पादनों के सारे विज्ञापन बोर्ड जो तम्बाकू की दुकान पर लगे हैं, उनको हटना होगा

२) तम्बाकू के विक्रिये स्थान पर जो विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति है, उसका साइज़ आकार निर्धारित है जो इस प्रकार है: बोर्ड ६० सेंटीमीटर क्ष ४५ सेंटीमीटर से बड़ा नही होना चाहिऐ. हर बोर्ड पर उपयुक्त चेतावनी होनी चाहिऐ, जो बोर्ड के उपरी भाग में लिखी गयी हो, और २० सेंटीमीटर क्ष १५ सेंटीमीटर साइज़ में हो. इस बोर्ड पर सिर्फ ये लिखा होना चाहिऐ कि किस प्रकार की तम्बाकू का विक्रय होता है और कोई भी ब्रांड नेम का लिखना, तस्वीर लगना या अन्य कोई भी संदेश लिखना वर्जित है.

३) तम्बाकू के विक्रय स्थल पर कोई भी तम्बाकू उत्पाद प्रदर्शित नही होना चाहिऐ.

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अभी जनता पूरी तरह भारत के तम्बाकू नियांतरण अधिनियम के बारे में जागरूक नही है, और तम्बाकू से होने वाले जान लेवा कु-प्रभावों को भी अक्सर नज़र-अंदाज़ करती है. अव्शय्कता है सामाजिक संगठनों को सरकार के साथ मिल कर जिम्मेदारी लेना का कि वे सतर्कता के साथ तम्बाकू कंपनियों पर नज़र रखेंगी कि वो उलंघन करें, और यदि ऐसा हो, तो डॉ सलकर की तरह, चुस्ती से सरकार के साथ मिलकर तम्बाकू कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया जाये और कानून के तहत उचित करवायी की जाये कहा प्रोफेस्सर डॉ राम कान्त ने जो एक लंबे अरसे से तम्बाकू नियांतरण पर कार्यरत हैं और नोट इंडिया के साथ भी जुडे रहे हैं.

वर्त्तमान कानून के मुताबिक भारत सरकार को एवं प्रदेश सरकार को ‘बिना विलम्ब और सख्त’ करवाई करनी चाहिऐ.

ये तो समय ही बताएगा कि भारत सरकार जन-स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है या तम्बाकू कंपनियों के मुनाफे की राजनीती को?

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