विश्व तपेदिक दिवस: २४ मार्च २०११


प्रोजेक्ट अक्षय: ७४४ मिलियन लोगों तक तपेदिक नियंत्रण सेवाएँ विभिन्न कार्यछेत्रों एवं कड़ियों में मिलजुल कर कार्य करने से पहुंचेंगी


नयी दिल्ली: २२ मार्च २०११:  भारत की १.२ अरब जनसंख्या की सेवा करने हेतु जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ बड़ी संख्या के बारे में ही सोचने के आदि है. बड़े स्तर पर लागू हो रहे 'अक्षय प्रोजेक्ट' (अक्षय के मायने हैं तपेदिक या टी.बी. रहित) की योजना रचने वाले भी इससे भिन्न नहीं हैं. अक्षय प्रोजेक्ट की योजना रचनाकर्ताओं के पास कोई विकल्प भी नहीं है क्योंकि विश्व-स्तर पर भारत में सबसे अधिक तपेदिक या टी.बी से ग्रसित लोग हैं. प्रोजेक्ट अक्षय को एड्स, टी.बी (तपेदिक) और मलेरिया से लड़ने के लिये समर्पित ग्लोबल फंड ने काफी भारी मात्रा में आर्थिक अनुदान दिया है. अक्षय प्रोजेक्ट पिछले वर्ष २३ भारतीय प्रदेशों के ३७४ जिलों में लागू हुआ जिससे कि संशोधित राष्ट्रीय तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम में जन-भागीदारी एवं प्रभावित लोगों की प्रतिभागिता बढ़े और तपेदिक सम्बंधित कार्यक्रम एवं सेवाओं की पहुँच और प्रभाव बढ़े, जिससे कि २०१५ तक ७४४ मिलियन लोगों को तक यह सेवाएँ पहुँच पायें.

'इंटरनैशनल यूनियन अगेंस्ट टूबरकुलोसिस एंड लंग डिसीस' (द यूनियन), और 'वर्ल्ड विज़न' इंडिया दोनों भारत सरकार के साथ इस जन-पहल अक्षय प्रोजेक्ट के समन्वयन को नेत्रित्व प्रदान कर रहे हैं. द यूनियन, इस अक्षय प्रोजेक्ट को २१ प्रदेशों के ३०० जिलों में लागू कर रहा है और ५७७ मिलियन जनसंख्या तक प्रोजेक्ट सम्बंधित सेवाओं को पहुंचाएगा, और वर्ल्ड विज़न इंडिया ७ प्रदेशों के ७४ जिलों में इस प्रोजेक्ट को लागू करेगा. पांच प्रदेश ऐसे हैं जिनमें दोनों संस्थाओं के संयुक्त समन्वय से यह प्रोजेक्ट लागू होगा.

'द यूनियन' के दक्षिण-पूर्वी एशिया के छेत्रिय निदेशक डॉ नेविन विल्सन ने कहा कि "प्रोजेक्ट अक्षय का प्रचालन तंत्र अवश्य बड़ा लगता है परन्तु तपेदिक/टी.बी. कार्यक्रमों का प्रभाव बढ़ाने के लिये नए सशक्त समूहों का गठन करना भी आवश्यक है. इस प्रोजेक्ट के प्रबंधन के लिये 'द यूनियन' ने कार्यकुशल लोगों की टीम जुटाई है और विभिन्न छेत्रों में अपनी निपुणता स्थापित करने वाली नौ संस्थाओं के साथ साझेदारी में इस प्रोजेक्ट को लागू किया जा रहा है. इसके अलावा भी अनेक लोगों के साथ कार्य किया जा रहा है."

विभिन्न कार्यछेत्रों से सरकारी, गैर-सरकारी, निजी, तकनीकि संस्थाओं, प्रभावित समुदाओं और मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ साझेदारी में कार्य करना ही प्रोजेक्ट अक्षय की मूल कार्यनीति है. तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण के लिये सिर्फ चिकित्सकीय कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि अनेक अन्य विकास-सम्बंधित छेत्रों और अन्य रोगों या जीवनशैलियों से तपेदिक (टी.बी.) होने का खतरा बढ़ता है, जैसे कि तपेदिक (टी.बी.) और गरीबी, कुपोषण, मधुमेह, तम्बाकू सेवन, एच.आई.वी. आदि से सम्बन्ध, जिनके कारणवश तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण एक पर्वतीय चुनौती बना हुआ है. इन कड़ियों को चिन्हित करना और उनपर तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण कार्यक्रमों के जरिए सक्रीय रूप से कार्य करना ही जन स्वास्थ्य के लिये श्रेयस्कर है.

डॉ विल्सन ने कहा कि "हमारे देश के सरकारी तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण कार्यक्रम ने उल्लेखनीय कार्य किया है परन्तु अब यह सर्वविदित है कि सफलतापूर्वक तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण सिर्फ सरकार द्वारा नहीं किया जा सकता है. विभिन्न कार्यछेत्रों के अनेक साझेदारों को मिलजुल कर तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण में योगदान देना चाहिए जिससे कि सूचना और सेवाएँ दोनों लोगों तक पहुंचे, जवाबदेही बढ़े और प्रभावित समुदाय सशक्त हो कर भागीदार बने. यही प्रोजेक्ट अक्षय करने की कामना करता है."

जिन लोगों तक तपेदिक (टी.बी.) सम्बंधित सूचनाएँ और सेवाएँ वर्तमान में नहीं पहुँच रही हैं, वें प्रोजेक्ट अक्षय के विशेष केंद्रबिंदु हैं, जिनमें जन-जातियां, बच्चे, महिलाएं, जटिल भौगोलिक छेत्रों में जहां आवागमन मुश्किल है वहाँ रहने वाले लोग, और अन्य लोग जैसे कि एच.आई.वी. और तपेदिक (टी.बी.) दोनों से संक्रमित लोग आदि शामिल हैं.

तपेदिक (टी.बी.) और अन्य विकास सम्बंधित या रोगों से जिससे तपेदिक (टी.बी.) का सम्बन्ध है, उन कड़ियों पर प्रभावकारी कार्य हेतु 'द यूनियन' प्रयासरत है.

डॉ विल्सन ने कहा कि "तपेदिक (टी.बी.) एवं गरीबी और गैर-संक्रामक रोगों की कड़ियों पर सफलतापूर्वक कार्य करना और अनेक कार्यछेत्रों के साथ प्रभावकारी तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण के लिये साझेदारी में कार्य करना जिससे कि जन स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभ हो, 'द यूनियन' के लिये सिर्फ अभिलाषा ही नहीं है - बल्कि हमने ठोस व्यवस्था बनायीं है जिससे कि प्रोजेक्ट अक्षय के माध्यम से इन कार्यक्रमों को निपुणता से क्रियान्वित किया जा सके." 'द यूनियन' के दक्षिण-पूर्वी एशिया के कार्यालय से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन का तपेदिक (टी.बी.) और गरीबी सह-समूह का सचिवालय, और तपेदिक (टी.बी.) सेवा एवं नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय साझेदारी का सचिवालय भी क्रियान्वित है. 'द यूनियन' के लिये गैर-संक्रामक रोग विशेष केंद्रबिंदु रहे हैं जैसे कि तम्बाकू नियंत्रण.

प्रोजेक्ट अक्षय को विभिन्न प्रदेशों में लागू करने के लिये 'द यूनियन' के मुख्य साझेदार, जो ग्लोबल फंड अनुदान के सह-प्राप्तकर्ता है, निम्नलिखित हैं:
 - कैथोलिक बिशप्स कांफेरेंस ऑफ़ इंडिया - कोयालिशन फॉर एड्स एंड रिलेटेड डिसीजेस
- कैथोलिक हेल्थ असोसियेशन ऑफ़ इंडिया
- क्रिश्चियन मेडिकल असोसियेशन ऑफ़ इंडिया
- इमानुएल हॉस्पिटल असोसियेशन
- ममता हेल्थ इंस्टीटयूट फॉर मदर एंड चाइल्ड (ममता)
- ममता सामाजिक संस्था
- पोपुलेशन सर्विसेस इंटरनैशनल
- रिसोर्स ग्रुप फॉर एजूकेशन एंड अड्वोकेसी फॉर कम्युनिटी हेल्थ (रीच)
- वोलंटरी हेल्थ असोसियेशन ऑफ़ इंडिया

डॉ सरबजीत चढ्ढा, जो इस प्रोजेक्ट अक्षय के निदेशक हैं, ने कहा कि "तपेदिक (टी.बी.) सम्बंधित सेवाएँ सर्वव्यापी हों और सबकी पहुँच में हों, इसी उद्देश्य से प्रोजेक्ट अक्षय व्यापक तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण के लिये समर्थन जुटाने, संचार माध्यमों का पर्याप्त और समोचित उपयोग करने, और जनमत जुटाने के लिये प्रयासरत है. साझेदारों के सक्रिय योगदान से प्रोजेक्ट अक्षय, अनेक गतिविधियों के जरिए समुदाय को तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण में समर्थ और सशक्त करेगा, राजनीतिक और प्रशासनिक समर्थन के लिये आवाज़ उठाएगा, समस्त स्वास्थ्यकर्मियों की भागीदारी से तपेदिक (टी.बी.) कार्यक्रमों की समुदाय में पहुँच बढ़ाएगा, दवाओं और जांच के सही और विवेकपूर्ण इस्तेमाल का समर्थन करेगा, और तपेदिक (टी.बी.) से सम्बंधित राष्ट्रीय प्राथमिकता के छेत्रों में प्रशिक्षण आयोजित करेगा."

अपने नौ साझेदारों के साथ 'द यूनियन' सुचारू और पूर्वनियोजित ढंग से प्रोजेक्ट अक्षय को लागू कर सके इसीलिए 'द यूनियन' ने ७३ कार्यक्रम प्रबंधकों, सहायक कार्यक्रम प्रबंधकों, जिला समन्वयकों और वित्तीय प्रबंधकों के लिये ५ दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया. इस प्रशिक्षण में, तपेदिक (टी.बी.) एवं तपेदिक (टी.बी.) नियंत्रण प्रणाली से सम्बंधित मूल जानकारी, प्रोजेक्ट गतिविधियाँ, रेकॉर्डिंग और रपट आदि विषय शामिल थे. इस प्रशिक्षण में जिन जिलों में प्रोजेक्ट अक्षय लागू होना है, उन जिलों के जिला तपेदिक (टी.बी.) अधिकारी भी सक्रीय रूप से शामिल हुए, और प्रशिक्षण के अंत में हर जिले ने अपनी गतिविधि योजना भी बनायीं.

  डॉ नेविन विल्सन ने कहा कि "तपेदिक (टी.बी.) जैसे संक्रामक रोग एक व्यक्ति से दुसरे को फैलते हैं और धीरे धीरे अनेक लोगों को संक्रमण हो जाता है. प्रोजेक्ट अक्षय के जरिए हम इस प्रक्रिया को उलटने की कोशिश कर रहे हैं - तपेदिक (टी.बी.) सम्बंधित जानकारी फ़ैलाने का प्रयास कर रहे हैं, लोगों को यह बता रहे हैं कि तपेदिक (टी.बी.) का पक्का इलाज उपलब्ध है, और लोगों को सशक्त होकर इन सेवाओं से लाभान्वित होना चाहिए. हमारी आशा है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए हम करोड़ों लोगों तक पहुँच पायेंगे और तपेदिक (टी.बी.) से अनेक जीवन बचा पाएंगे."

बाबी रमाकांत - सी.एन.एस.

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