जनता उम्मीदवारों से पूछे उनके बच्चे सरकारी विद्यालय में पढ़ते हैं या नहीं?

सरकारी चिकित्सालय में इलाज कराना भी अनिवार्य हो
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने जा रहे हैं। कुछ दिनों पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले कि सरकारी तनख्वाह पाने वालों व जन प्रतिनिधियों के बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी विद्यालय में पढ़ना होगा के आलोक में सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) जनता का आह्वान करती है कि वे इन चुनावों में खड़े होने वालों उम्मीदवार से पूछना शुरू करें के उनके बच्चे सरकारी विद्यालय में पढ़ते हैं अथवा नहीं? उच्च न्यायालय के आदेशानुसार यह व्यवस्था अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होनी चाहिए।

      सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) का मानना है कि इस देश में चुनाव उसी को लड़ने की छूट होनी चाहिए जो खुद सरकारी विद्यालय में पढ़ा हो और अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ा रहा हो।

      हम उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी का स्वागत करते हैं कि उच्च न्यायालय का फैसला आते ही उन्होंने अपनी नातिन को सरकारी विद्यालय में भेजना शुरू कर दिया। हम उम्मीद करते हैं कि अन्य जन प्रतिनिधि व सरकारी कर्मचारी शिक्षा मंत्री से प्रेरणा लेकर अपने अपने बच्चों का निजी विद्यालयों ये नाम कटा कर सरकारी विद्यालय में दाखिला कराएंगे।

      तब तक जन प्रतिनिधियों व सरकारी कर्मचारियों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में नहीं पढ़ेंगे तब तक सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी और जब तक सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता नहीं सुधरेगी तब तक इस देश के गरीब के बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाएगी।

      इसी तरह सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) का यह भी मानना है कि जन प्रतिनिधियों या जो चुनाव लड़ना चाहते हैं और सरकारी कर्मचारियों को अपना व अपने परिवार वालों का इलाज सरकारी चिकित्सालय में कराना अनिवार्य होना चाहिए। विदेश में जाकर इलाज कराने पर तो रोक लगनी चाहिए। यदि हमारे कर्मचारियों व जन प्रतिनियों को अपने विद्यालयों व चिकित्सालयों पर भरोसा नहीं होगा तो वे इन विद्यालयों व चिकित्सालयों में जनता की ठीेक से सेवा कैसे कर पाएंगे?
 
सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के गिरीश कु. पाण्डेय, मुन्नालाल, चुन्नीलाल, शरद पटेल, आलोक सिंह, बाबी रमाकांत, और डॉ संदीप पाण्डेय ने जारी विज्ञप्ति में उपरोक्त बातें कहीं.

सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
१५ सितम्बर २०१५

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