मधुमेह रोग-----केवल धन ही नहीं, जीवन की भी हानि

मधुमेह रोग - केवल धन ही नहीं, जीवन की भी हानि

‘यह रुपयों का सवाल नहीं है. मैं चाहे जितने भी पैसे खर्च करूँ ,मेरा पाँव मुझे वापस नहीं मिलेगा।’ यह दु:ख है एक ६५ वर्षीय, मधुमेह से पीड़ित,एक महिला का जिन्हें हाल ही मे, गांधी स्मारक एवं सम्बंधित चिकित्सालय में, अपना पैर कटवाना पड़ा। निकट भविष्य में, १४ नवम्बर,२००८ को आने वाले विश्व मधुमेह दिवस के लिए इस महिला की कराह एक संदेश है---मधुमेह से उपजे अनेक शारीरिक विकारों को रोकने के लिए।

डाक्टर ऋषि सेठी (जो छत्रपती साहूजी महराज मेडिकल यूनिवर्सिटी मे ह्रदय रोग विभाग मे कार्यरत हैं) का कहना है, “ मधुमेह के रोगियों मे ह्रदय रोग एवं पक्षाघात की सम्भावना बढ़ जाती है। इस सम्भावना को कम करने के लिए रोगी के शरीर मे शर्करा और कोलेस्ट्रोल की मात्रा एवं उसके रक्तचाप को नियंत्रित रखना आवश्यक है। ऐसा करने से पैरों की रक्त धमनियों के सिकुड़ने या उनमें अवरोध उत्पन्न होने को रोका जा सकता है।”

छत्रपति शाहूजी महराज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ‘डायबेटिक फुट’ इकाई के अध्यक्ष, प्रोफेसर रमा कान्त के अनुसार “मधुमेह के रोगी के शरीर के स्नायुओं के क्षतिग्रस्त होने की भी सम्भावना होती है। कुछ रोगियों मे इस क्षति के कोई बाह्य लक्षण नहीं दिखाई देते, परन्तु कुछ रोगियों को हाथ-पैरों में दर्द, झंझनाहट या संज्ञा शून्यता महसूस होती है। मधुमेही के गुर्दों पर भी इस रोग का बुरा प्रभाव पड़ सकता है। गुर्दे शरीर को साफ़ रखने मे असमर्थ होते जाते हैं और अंतत: कार्य करना बंद कर देते हैं। इस स्थिति को ‘क्रोनिक किडनी फेलियर' कहते हैं।”

डाक्टर रमा कान्त का कहना है की गुर्दों के निष्काम होने का सबसे आम कारण है मधुमेह, जिसके चलते लगभग ४४% नए रोगियों के गुर्दे क्षतिग्रस्त होते हैं। मधुमेह को नियंत्रित करने के बाद भी गुर्दों के निष्काम होने की सम्भावना बने रहती है। परन्तु मधुमेह का सबसे भयानक प्रभाव है ‘डायबेटिक फुट’ अथवा ‘मधुमेही पाँव' जिसने उपर्युक्त वर्णित महिला को विकलांग बना दिया। अधिक समय तक मधुमेह रोग होने से पांवों की धमनियों और स्नायुओं मे विकार हो जाता है, जिसके चलते न केवल रोगी के पैर को, वरन उसके जीवन को भी खतरा हो सकता है। ‘ मधुमेही पाँव’ से पीड़ित होने पर रोगी को लंबे समय तक अस्पताल मे रहना पड़ सकता है तथा उसके परिचार मे भी बहुत सजगता बरतनी पड़ती है।

मधुमेही के पाँव काटने की स्थिति आने के दो मुख्य कारण हैं---लंबे समय तक चलने वाले अनियंत्रित मधुमेह की वजह से पैर के स्नायुओं का संज्ञाशून्य हो जाना अथवा पाँव के तलवों मे ‘हाई प्रेशर पॉइंट' बन जाने से वहां घाव हो जाना। और यदि रोगी धूम्रपान भी करता हो तो स्नायु क्षतिग्रस्त होने से पैरों मे रक्त संचार कम हो जाता है। बढ़ती उम्र के साथ साथ रोगी के पैरों मे रक्तसंचार बाधित होने से और संज्ञाहीनता बढ़ने से पाँव मे संक्रमण की सम्भावना बढ़ जाती है।

प्रोफेसर रमा कान्त के अनुसार मधुमेह के रोगियों को अपने पाँव की रक्षा हेतु निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिये —
(१) पैरों को नियमित रूप से धो कर साफ़ रखें।
(२) केवल गुनगुने पानी का प्रयोग करें---गर्म पानी,आयोडीन, अल्कहौल या गर्म पानी की बोतल का प्रयोग न करें।
(३) पैरों को सूखा रखें---विशेषकर उँगलियों के बीच के स्थान को. सुगंधहीन क्रीम /लोशन के प्रयोग से त्वचा को मुलायम रखें।
(4) पैरों के नाखून उचित प्रकार से काटें---किनारों पर गहरा न काटें।
(५) गुख्रू को हटाने के लिए ब्लेड, चाकू , ‘कॉर्न कैप' का प्रयोग न करें।
(६) नंगे पाँव कभी न चलें, घर के अन्दर भी नहीं. हमेशा जूता/चप्पल पहन कर ही चलें।
(७) कसे हुए या फटे पुराने जूते/चप्पल न पहनें. आरामदेह जूते/चप्पल ही पहनें।
(८) स्वयं ही अपने पाँव की जांच नियमित रूप से करें और कोई भी परेशानी होने पर तुंरत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
(९) केवल चिकित्सक द्वारा बताई गयी औषधि का ही प्रयोग करें —घरेलू इलाज न करें।
‘मधुमेह का रोग केवल धन ही नहीं, और भी बहुत कुछ गंवाता है।’

अंतर्राष्ट्रीय डायबिटीज़ फेडेरेशन (आई.डी.ऍफ़.) ने एक डायबिटीज़ एटलस प्रकाशित किया है जिसके अनुसार भारत मे २००७ मे लगभग ४ करोड़ व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित थे। यह संख्या २०२५ मे ७ करोड़ हो जाने की सम्भावना है। २०२५ तक चीन, भारत एवं अमेरिका मे विश्व के सबसे अधिक मधुमेही होंगे और संभवत: हर पांचवा मधुमेही भारतीय होगा। इतने अधिक मधुमेह पीड़ित रोगियों के कारण उत्पन्न आर्थिक भार का बहुत अधिक बोझ भारत को ही उठाना पडेगा।
आई.डी.ऍफ़. जनसाधारण मे इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने मे एवं वैश्विक स्तर पर इस रोग का उपचार सभी रोगियों को उपलब्ध कराने मे सतत प्रयत्नशील है। विश्व मधुमेह दिवस (१४ नवम्बर,२००८) मे कुछ ही दिन शेष हैं। यह दिन भारत में अपने प्रथम प्रधानमंत्री, स्वर्गीय श्री जवाहरलाल नेहरू (जिन्हें बच्चों से बहुत स्नेह था) के जन्म दिवस की याद मे ‘बाल दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

हम सभी को यह आशा करनी चाहिए की मधुमेह के प्रति जनसाधारण मे जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी की रोकथाम मे सहायता मिलेगी।


अमित द्विवेदी
लेखक सिटिज़न न्यूज़ सर्विस के विशेष संवाददाता हैं


(यह लेख मेरी ख़बर में अक्टूबर २००८ को प्रकाशित हुआ है, जिसको पढ़ने के लिए यहाँ पर क्लिककीजिये )
डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में जिसको पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

No comments: