मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009, का विरोध।

ज्ञापन

दिनांकः 19 सितम्बर, 2009

सेवा में
आदरणीय मनमोहन सिंह जी

प्रधान मंत्री, भारत सरकार
नई दिल्ली

विषयः मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009, का विरोध।

माननीय मनमोहन सिंह जी,

हम हाल ही में आपकी सरकार द्वारा पारित मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम का विरोध करते हैं क्योंकिः


1. यह कानून भारत में भेदभावपूर्ण शिक्षा व्यवस्था, जिसमें अमीरों व गरीबों के बच्चों के लिए दो अलग किस्म की व्यवस्थाएं अस्तित्व में हैं, को बरकरार रखेगा।
2. यह कानून शिक्षा के निजीकरण के एजेण्डे को बढ़ावा देगा।

हमारी मांग है किः
1. वर्तमान कानून को वापस लेकर एक नया कानून लाया जाए जो समान शिक्षा प्रणाली तथा पड़ोस के विद्यालय की अवधारणा को लागू किया जाए।
2. शिक्षा का बजट बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत किया जाए।
3. शिक्षा का निजीकरण रोका जाए। सभी के लिए एक जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकारी खर्च पर उपलब्ध होनी चाहिए।

उम्मीद है आप देश के गरीब बच्चों को निराश नहीं करेंगे।

भवदीय,


एस.आर. दारापुरी
राज्य समन्वयक, जन आंदोंलनों का राष्ट्रीय समन्वय और लोक राजनीति मंच

डॉ संदीप पाण्डेय, अरुंधती धुरु, Mahesh, चुन्नीलाल, ऊषा विश्वकर्मा, किरण , उर्वशी शर्मा, विवेक राय, हिमांशु, महेन्द्र, अभिषेक, आशीष श्रीवास्तव, अब्दुल नबी, मुन्नालाल, बाबी रमाकांत

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