अंक ४६
रविवार, १८ मई २००८
स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामादोस ने शनिवार को चेन्नई में हो रही एक प्रेस वार्ता में कहा कि शराब और तम्बाकू कम्पनियाँ मिल के उनको खदेड़ना चाहती हैं.
-------------------------------------------------
-------------------------------------------------
-------------------------------------------------
*******************************************
तम्बाकू नियंत्रण पर अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में नियमित समाचार और लेख पढने के लिए, यहाँ क्लिक्क करें
ईमेल द्वारा तम्बाकू नियंत्रण से संबंधित अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में समाचार और लेखों को प्राप्त करने के लिए, इस ईमेल पर लिखें :
एली लिल्ली नामक दवा कंपनी ने पिछले हफ्ते ही १० करोड़ अमरीकी डालर दान दिया था जिससे चिकित्सकों को मल्टी-ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक के सही इलाज के लिये प्रशिक्षित किया जा सके. यह धनराशी वर्ल्ड मेडिकल असोसिएशन या अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सकों का संगठन, को दी गई है. यह प्रशिक्षण, नि:शुल्क है, और इंटरनेट के मध्यम से दिया जाएगा. इसके पंजीकरण के लिये, इस वेबसाइट पर जाएं: http://www.wma.net

१५ मई २००८
अंक ३७९
वायु प्रदुषण और तम्बाकू के धुएँ से तपेदिक या टीबी रोग सक्रिय हो सकता है
एक नए शोध से यह स्थापित हो
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क कीजिये
--------------------------------------
बीड़ी सेवन करने से २ लाख या २००,००० लोग तपेदिक या टीबी से मृत्यु के शिकार
इंडो एशियन न्यूज़ सर्विस
भारत में १० करोड़ बीड़ी सेवन करने वालों में से २ लाख लोगों की मृत्यु टीबी या तपेदिक की वजह से होती है। इनमें से अधिकांश लोग गरीब और पढे लिखे नही होते हैं। यह रपट बीड़ी सेवन के ऊपर पहली रपट है जो बीड़ी से संबंधित सभी मुद्दों को व्यापक ढंग से रखती है।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क कीजिये
------------------------------------------------
मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों ने लिया तम्बाकू न खाने का संकल्प
आई - नेक्स्ट, लखनऊ, बुधवार, १4 मई २००८
हर साल ५० लाख से अधिक लोग तम्बाकू जनित जानलेवा बिमारिओं की वजह से मौत के शिकार हो जातें हैं। यदि तम्बाकू का सेवन इसी तरह से बढ़ता रहा तो २०३० तक यह अनुपात करीब ८० लाख हो जाएगा।
तम्बाकू मृत्यु का विश्व का चौथा सबसे बड़ा कारण है। यह जानकारी 'इंडियन सोसिएटी अगेन्स्ट स्मोकिंग ' के कार्यक्रम समन्वयक रितेश आर्या ने दी जो कि कुछ साल पहले तक ख़ुद भी तम्बाकू का सेवन करते थे।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क कीजिये
---------------------------------------------
तम्बाकू नियंत्रण कानूनों का सही तरीके से पालन हो: प्रो० रमाकांत
अमर उजाला, लखनऊ, बुधवार, १4 मई २००८
तम्बाकू नियंत्रण कानूनों का सही तरीके से पालन से तम्बाकू के प्रयोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह जानकारी 'इंडियन सोसिएटी अगेन्स्ट स्मोकिंग ' के अध्यक्ष प्रो० रमाकांत ने दी। ।हर साल ५० लाख से अधिक लोग तम्बाकू जनित जानलेवा बिमारिओं की वजह से मौत के शिकार हो जातें हैं।
कल विश्व स्वास्थ्य संगठन की नशा उन्मूलन क्लिनिक तथा कई अन्य संगठनों ने तम्बाकू से होने वाली जानलेवा बिमारिओं पर पोस्टर प्रदर्शनी और आन स्पॉट नशा छोड़ने के लिए परामर्श अभियान का आयोजन आशा सामाजिक विद्यालय में जो कि गोमती नदी के किनारे मलिन बस्ती में स्थित है किया गया ।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क कीजिये
तम्बाकू नियंत्रण पर अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में नियमित समाचार और लेख पढने के लिए, यहाँ क्लिक्क करें
ईमेल द्वारा तम्बाकू नियंत्रण से संबंधित अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में समाचार और लेखों को प्राप्त करने के लिए, इस ईमेल पर लिखें :
अमरीका में रहने वाले दक्षिण
एली लिल्ली नामक दवा कंपनी ने अमरीकी डालर १ मिलियन दान दिया है जिससे कि टीबी या तपेदिक चिकित्सकों को ओनलाइन या इंटरनेट के मध्यम से ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक के चिकित्सकीय इलाज और रोकधाम के लिये पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जा सके. यह अतिआवश्यक है क्योकि ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक का दर बढ़ता ही जा रहा है और इलाज के विकल्प सीमित हो रहे हैं. इसलिए आवश्यक है कि ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक का इलाज सही तरीके से पूरा किया जाए और टीबी नियंतरण को, खासकर कि विकासशील देशों में, अधिक प्रभावकारी बनाया जा सके.
तम्बाकू नियंत्रण पर अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में नियमित समाचार और लेख पढने के लिए, यहाँ क्लिक्क करें
ईमेल द्वारा तम्बाकू नियंत्रण से संबंधित अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में समाचार और लेखों को प्राप्त करने के लिए, इस ईमेल पर लिखें :
२० लोगों ने लिया तम्बाकू न खाने का संकल्प
कल विश्व स्वास्थ्य संगठन की नशा उन्मूलन क्लिनिक तथा कई अन्य संगठनों ने तम्बाकू से होने वाली जानलेवा बिमारिओं पर पोस्टर प्रदर्शनी और आन-स्पॉट नशा छोड़ने के लिए परामर्श अभियान का आयोजन आशा सामाजिक विद्यालय में किया जो कि गोमती नदी के किनारे मलिन बस्ती में स्थित है।
कार्यक्रम के दौरान अभिनव भारत फाउंडेशन के प्रवक्ता राहुल द्विवेदी ने बताया कि "प्रभावकारी तम्बाकू नियंत्रण के लिए यह जरूरी है कि तम्बाकू नियंत्रण संधियों का सही तरीके से पालन हो"।
इस कार्यक्रम में स्कूल के करीब १०० बच्चों ने जो कि इन मलिन बस्तियों में रहतें हैं के साथ-साथ उनके माता-पिता तथा आस - पास के और भी लोगों ने भाग लिया । कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों और विश्वविद्यालयों के जन-स्वास्थ्य विभाग के छात्रों ने भी भाग लिया जिनमें अलोक द्विवेदी , हिमांशु कुमार, सारिका त्रिपाठी आदि प्रमुख थे।
-------------------------------------------------
आई - नेक्स्ट, लखनऊ, बुधवार, १4 मई २००८
मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों ने लिया तम्बाकू न खाने का संकल्प
हर साल ५० लाख से अधिक लोग तम्बाकू जनित जानलेवा बिमारिओं की वजह से मौत के शिकार हो जातें हैं। यदि तम्बाकू का सेवन इसी तरह से बढ़ता रहा तो २०३० तक यह अनुपात करीब ८० लाख हो जाएगा।
तम्बाकू मृत्यु का विश्व का चौथा सबसे बड़ा कारण है। यह जानकारी 'इंडियन सोसिएटी अगेन्स्ट स्मोकिंग ' के कार्यक्रम समन्वयक रितेश आर्या ने दी जो कि कुछ साल पहले तक ख़ुद भी तम्बाकू का सेवन करते थे।
कार्यक्रम में तम्बाकू से होने वाली जानलेवा बिमारिओं पर पोस्टर प्रदर्शनी और आन स्पॉट नशा छोड़ने के लिए परामर्श अभियान का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों और विश्व विद्यालयों के जन स्वास्थ्य विभाग के छात्रों - अलोक द्विवेदी , हिमान्सू कुमार, सारिका त्रिपाठी आदि - ने भी भाग लिया।
---------------------------------------------
अमर उजाला, लखनऊ, बुधवार, १4 मई २००८
तम्बाकू नियंत्रण कानूनों का सही तरीके से पालन हो: प्रो० रमाकांत
तम्बाकू नियंत्रण कानूनों का सही तरीके से पालन से तम्बाकू के प्रयोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह जानकारी 'इंडियन सोसिएटी अगेन्स्ट स्मोकिंग ' के अध्यक्ष प्रो० रमाकांत ने दी। ।हर साल ५० लाख से अधिक लोग तम्बाकू जनित जानलेवा बिमारिओं की वजह से मौत के शिकार हो जातें हैं।
कल विश्व स्वास्थ्य संगठन की नशा उन्मूलन क्लिनिक तथा कई अन्य संगठनों ने तम्बाकू से होने वाली जानलेवा बिमारिओं पर पोस्टर प्रदर्शनी और आन स्पॉट नशा छोड़ने के लिए परामर्श अभियान का आयोजन आशा सामाजिक विद्यालय में जो कि गोमती नदी के किनारे मलिन बस्ती में स्थित है किया गया ।
यदि तम्बाकू का सेवन इसी तरह से बढ़ता रहा तो २०३० तक यह अनुपात करीब ८० लाख हो जाएगा। तम्बाकू विश्व का चौथा सबसे बड़ा कारण है, लोगों की मौत का। कार्यक्रम में तम्बाकू से होने वाली जानलेवा बिमारिओं पर पोस्टर प्रदर्शनी और आन स्पॉट नशा छोड़ने के लिए परामर्श अभियान का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों और विश्व विद्यालयों के जन स्वास्थ्य विभाग के छात्रों - अलोक द्विवेदी , हिमान्सू कुमार, सारिका त्रिपाठी आदि - ने भी भाग लिया।
-------------------------------------------------------
वाइस ऑफ़ लखनऊ, लखनऊ, बुधवार, १4 मई २००८
२० लोगों ने लिया तम्बाकू न खाने का संकल्प
कल विश्व स्वास्थ्य संगठन की नशा उन्मूलन क्लिनिक तथा कई अन्य संगठनों ने तम्बाकू से होने वाली जानलेवा बिमारिओं पर पोस्टर प्रदर्शनी और आन स्पॉट नशा छोड़ने के लिए परामर्श अभियान का आयोजन आशा सामाजिक विद्यालय में जो कि गोमती नदी के किनारे मलिन बस्ती में स्थित है किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अभिनव भारत फाउंडेशन के प्रवक्ता राहुल द्विवेदी ने बताया कि "प्रभावकारी तम्बाकू नियंत्रण के लिए यह जरूरी है की तम्बाकू नियंत्रण संधियों का सही तरीके से पालन हो। इस कार्यक्रम में स्कूल के करीब १०० बच्चों ने जो की इन मलिन बस्तियों में रहतें हैं के साथ-साथ उनके माता-पिता तथा आस - पास के और भी लोगों ने भाग लिया । कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों और विश्वविद्यालयों के जन स्वास्थ्य विभाग के छात्रों - अलोक द्विवेदी , हिमान्सू कुमार, सारिका त्रिपाठी आदि - ने भी भाग लिया।
दिल्ली में १२ मई २००८ को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, सेंटर फॉर डिसीस कंट्रोल और विश्व स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त तत्वावधान में बीड़ी के ऊपर एक व्यापक रपट का विमोचन हुआ है (बीड़ी मोनोग्राफ).
अंक ३७८
बुधवार, १४ मई २००८
--------------
१० करोड़ से अधिक लोग भारत में बीड़ी का सेवन करते हैं
लगभग १० करोड़ लोग जिनमें से अधिकांश लोग गरीब और अनपढ़ होते हैं, वह बीड़ी का सेवन करते हैं। इनमें से २ लाख या २००,००० लोग तपेदिक या टीबी से प्रतिवर्ष मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
भारत में बीड़ी के रूप में सबसे अधिक तम्बाकू सेवन होता है।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क करें
-------------------------------------------
बीड़ी में सिगरेट से कम तम्बाकू होती है परन्तु कहीं अधिक निकोटीन और अन्य जहरीले पदार्थ व्यसनी को मिलते हैं
रॉयटर्स
सिगरेट की तुलना में बीड़ी में तम्बाकू की मात्रा कम होती है परन्तु बीड़ी पीने से व्यसनी को निकोटीन और अन्य जहरीले पदार्थ कही अधिक मात्रा में प्राप्त होते हैं। ऐसा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा पारित एक रपट में सामने आया।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क करें
---------------------------------------
बीड़ी सेवन करने से २ लाख या २००,००० लोग तपेदिक या टीबी से मृत्यु के शिकार
इंडो एशियन न्यूज़ सर्विस
भारत में १० करोड़ बीड़ी सेवन करने वालों में से २ लाख लोगों की मृत्यु टीबी या तपेदिक की वजह से होती है। इनमें से अधिकांश लोग गरीब और पढे लिखे नही होते हैं। यह रपट बीड़ी सेवन के ऊपर पहली रपट है जो बीड़ी से संबंधित सभी मुद्दों को व्यापक ढंग से रखती है।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क कीजिये
------------------------------------------------
भारत में बीड़ी सेवन करने से ६ लाख लोगों की प्रतिवर्ष मृत्यु
द टाइमस ऑफ़ इंडिया
भारत में बीड़ी सेवन करने से लगभग ६ लाख लोगों की मृत्यु तम्बाकू-जनित जानलेवा बीमारियों की वजह से हर साल होती है। ऐसा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विमोचित रपट में निकल के आया है। लगभग २.३ प्रतिशत बच्चे भी बीड़ी का सेवन करते हैं।
पूरा समाचार पढने के लिए यहाँ क्लिक्क कीजिये
-----------------------------------------------
तम्बाकू नियंत्रण पर अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में नियमित समाचार और लेख पढने के लिए, यहाँ क्लिक्क करें
ईमेल द्वारा तम्बाकू नियंत्रण से संबंधित अंग्रेज़ी और हिन्दी भाषा में समाचार और लेखों को प्राप्त करने के लिए, इस ईमेल पर लिखें :
कोई दो राय नही है कि तम्बाकू विश्व में सबसा बड़ा ऐसा मृत्यु का कारण है जिससे पूरी तरह बचाव मुमकिन है।
यह एकमात्र ऐसा उत्पाद है जो यदि इसको बनाने वाली कंपनियों के निर्देश के अनुसार भी इस्तिमाल किया जाए, तब भी घातक होगा।
एक आवाज सक्रिय होने के लिए : विश्व में सिर्फ़ ५ प्रतिशत जनसंख्या इस तरह की है जो ऐसे देशों में रहती है जहाँ तम्बाकू के उत्पादों के विज्ञापन और इसके प्रोत्साहन पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा हुआ है।
विश्व स्तर पर बच्चों की आधी जनसंख्या पर तम्बाकू के उत्पाद के निःशुल्क वितरण पर किसी तरह का प्रतिबन्ध नही है। आज यहाँ रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा का सबसे ज्यादा प्रभावकारी तरीका किसी भी देश के लिए यह हो सकता है कि वह अपने यहाँ तम्बाकू उत्पाद के विज्ञापन प्रोत्साहन और इसके द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमों पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा दे।
सिर्फ़ और सिर्फ़ पूर्ण और व्यापक प्रतिबन्ध ही नए तम्बाकू सेवन करने वालों के दर को कम कर सकते हैं। राष्ट्र स्तर पर कराये गए शोध से यह पता चलता है कि तम्बाकू पर व्यापक प्रतिबन्ध लगा देने से इसके उपयोग में दस प्रतिशत की कमी आई है।
एक आवाज तम्बाकू उत्पाद के विज्ञापनों, इसके प्रचार- प्रसार और प्रयोजन पर १०० प्रतिशत रोकथाम के लिए :
** नीति निर्माताओं को शामिल करना :- नीति निर्माताओं में इस बात की जागरूकता पैदा करना कि सिर्फ़ स्वैच्छिक नीतियों द्वारा ही तम्बाकू कंपनियों के भ्रामक विज्ञापन पर प्रतिबन्ध नही लगाया जा सकता है। नीति निर्माताओं को इस बात की भी जानकारी देना कि तम्बाकू का खतरा विकासशील देशों में ज्यादा है जहाँ विश्व की कुल उपभोगताओं में से एक तिहाई निवास करते हैं।
** स्थान आधारित अवसरों पर प्रतिबन्ध : जैसे इंटरनेट के द्वारा इसके बिक्री, वेंडिंग मशीन के प्रयोग पर प्रतिबन्ध तथा नए - नए तम्बाकू के छोटे दुकानों आदि पर प्रतिबन्ध जो की युवओं को लुभाने आदि के लिए बनाये जातें हैं ।
** तम्बाकू उत्पाद के भ्रामक पैकेजिंग आदि पर प्रतिबन्ध :- अक्सर तम्बाकू कम्पनियाँ अपने उत्पाद के पैकेटों पर विभिन्न तरीके के भ्रामक स्लोगन आदि का इस्तेमाल करती हैं । जैसे ' लाईट ' माइल्ड' ' लो टार' आदि । इसके साथ गुटखा "विभिन्न स्वादों में उपलब्ध है" इत्यादि जैसे कथन पर भी प्रतिबन्ध लगाना क्योंकि इस तरह की युक्तियाँ भी युवाओं को इसके प्रयोग के लिए लुभाती हैं।
तम्बाकू की वैकल्पिक कीमतें: तम्बाकू की कम्पनियाँ अपने उत्पाद के ज्यादा से ज्यादा बिक्री के लिए विभिन्न तरह की योजनाएं आदि लाती हैं जैसे किड्स पैक आदि। तम्बाकू कंपनिया अपने कई लाख ग्राहकों को जो कि या तो तम्बाकू के द्वारा होने वाली बीमारिओं से मर जातें हैं या फिर किसी अन्य प्रभाव में आकर इसका उपयोग बंद कर देते हैं।
ऐसे में नए ग्राहकों को तैयार करना इनका सबसे बड़ा लक्ष्य होता है।महिलाओं में बढ़ते तम्बाकू के स्वरूप ने विश्व में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। यद्यपि कई सारे देशों में महिलाएं परम्परागत रूप से तम्बाकू का सेवन नहीं करती हैं और पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में तम्बाकू का सेवन लगभग एक चौथाई कम है किंतु तम्बाकू कंपनिया इन महिलाओं को भी अपने उत्पादों के ज्यादा से ज्यादा प्रयोग की तरफ़ रिझाने में लगीं हैं।
(सपम्चा कंग्लेइपल के नाम से भी जाना जाता है)
---------------
मणिपुर पोलिस ने सपम्चा कंग्लेइपल मीटी को गिरफ्तार कर लिया है. सपम्चा मणिपुर के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो मणिपुर की राजधानी इम्फाल में "शहरियों को यदि अस्त्र-शास्त्र दे दिए जाए तो उसका मणिपुर में परिणाम क्या होगा" के विषय पर एक परिचर्चा को आयोजित कर रहे थे. सपम्चा ने अपने उदबोधन में मणिपुर के मुख्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी.
"यदि लोकतंत्र में सरकार द्वारा लिए गए निर्णय पर कोई परिचर्चा नही हो सकती है तो ऐसे लोकतंत्र के क्या
समन्वयक
एमनेस्टी इंटरनेशनल इम्फाल ग्रुप

