धुआं उड़ाने में अव्वल हैं बीपीओ कर्मचारी

धुआं उड़ाने में अव्वल हैं बीपीओ कर्मचारी

साइबर सिटी की बीपीओ कंपनियों में काम करने वाले युवा रात भर जागकर काम करने के लिए सबसे ज्यादा सिगरेट का सहारा ले रहे हैं। एक बीपीओ कंपनी के सर्वे में पता चला है कि बीपीओ में काम करने वाले 65 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी स्मोकिंग करते हैं। इस सर्वे में यह भी साफ हो गया है कि दिन के मुकाबले रात को काम करने वाले कर्मचारी ज्यादा स्मोकिंग करते हैं। परेशानी की बात यह है कि महिलाएं भी स्मोकिंग करने में बहुत पीछे नहीं हैं।

इस कंपनी की 30 फीसदी महिला कर्मचारी अपनी टेंशन को सिगरेट के धुएं में उड़ाने में यकीन रखती हैं। पिछले दो सालों से स्मोकिंग कर रही रीना तलवार ने बताया कि उन्हें सिगरेट पीने की ऐसी लत पड़ चुकी है कि अब उनके लिए स्मोकिंग छोड़ना बहुत मुश्किल हो चुका है। रीना के मुताबिक शुरू में उन्होंने अपनी फ्रेंड्स के बीच रुतबा कायम करने के लिए स्मोकिंग शुरू की थी और अब हालत यह है कि वह 20 सिगरेट का एक पैकिट दो दिन में खत्म कर देती हैं।

अपने कर्मचारियों की स्मोकिंग की इस खतरनाक लत से बीपीओ कंपनियां भी परेशान हैं। एक बीपीओ कंपनी के मैनिजर अनेश अग्रवाल ने बताया कि अब वह किसी भी नए कर्मचारी का सलेक्शन करने से पहले उसकी स्मोकिंग की आदतों के बारे में भी जानकारी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि बीपीओ कर्मचारियों में स्मोकिंग की बढ़ती लत के लिए ऑफिस के माहौल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। मनोवैज्ञानिक डॉ। राम त्रिवेदी का कहना है कि यह धारणा बिल्कुल गलत है कि रात को जागने के लिए स्मोकिंग का सहारा लेना जरूरी है।

उनके मुताबिक रात को लोग बुरी आदतों के प्रति ज्यादा आसानी से आकर्षित होते हैं। डॉ। त्रिवेदी ने सलाह दी कि बीपीओ में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी से लगातार रात को काम नहीं कराना चाहिए, बल्कि बीच-बीच में सभी की शिफ्ट चेंज होती रहनी चाहिए।

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