तम्बाकू उत्पादनों पर चित्रमय चेतावनियों का अनुपालन सख्ती से नहीं

तम्बाकू उत्पादनों पर चित्रमय चेतावनियों का अनुपालन सख्ती से नहीं

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के १५ मार्च २००८ को जारी निर्देश के अनुसार ३१ मई २००९ के बाद पूरे देश में तम्बाकू उत्पादनों पर चित्रमय चेतावनी लगाना कानूनन जरूरी हो गया है.

परन्तु एक जनता जांच के दौरान यह ज्ञात हुआ कि भारत में जगह जगह (जिनमें लखनऊ शामिल है) तम्बाकू उत्पादनों पर सख्ती से चित्रमय चेतावनी नहीं लगायी जा रही हैं और इस सरकारी निर्देश का उल्लंघन हो रहा है. इस जनता जांच में भारत के ९ प्रदेशों से ६० तम्बाकू उत्पादनों को परखा गया जिसमें १७ धूम्रपान वाले तम्बाकू उत्पादन थे और ४३ धुआं-रहित तम्बाकू उत्पादन.

कई ऐसे तम्बाकू उत्पादन पाये गए जिनपर कोई भी चित्रमय चेतावनी लगी नहीं थी या नियमानुसार नहीं लगी थी.

"जिस जन हितैषी इरादे के साथ यह चित्रमय चेतावनी निर्देश जारी किया गया है, उसको पूर्ण नहीं किया जा रहा है। चित्रमय चेतावनी को लागू करने में यूँ भी दो साल से अधिक तक की देरी की गई और अब जब यह जारी हुआ तो इसको लागू कमजोरी से किया जा रहा है. चित्रमय चेतावनी निर्देश को लागू करने (३० मई २००९) से ठीक २ महीने बाद, ३० जुलाई २००९ को उन अधिकारियों को सरकारी निर्देश द्वारा सूचित किया गया जो इसको लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं" कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त प्रोफ़ेसर (डॉ) रमा कान्त का।

चित्रमय चेतावनी लागू करने में चंद मुख्य कमियां जो पायी गयीं हैं, वोह इस प्रकार हैं:

- चित्रमय चेतावनी का आकार: चित्रमय चेतावनी का आकार तम्बाकू पाकेट के आगे वाले सबसे बड़े भाग के ४०% से कम हैं. जिन ६० तम्बाकू उत्पादनों को परखा गया, उसमें से २५ गुटखा के ब्रांड, १० खैनी के ब्रांड एवं २ बीड़ी के ब्रांड ऐसे पाये गए जिनपर चित्रमय चेतावनी छोटी थी.

- तम्बाकू पाकेट पर भ्रामक शब्द लिखे गए थे: हालाँकि भारत में ऐसे शब्दों को लिखने पर प्रतिबन्ध है, परन्तु ५ सिगरेट ब्रांड एवं ४ चबाने वाली तम्बाकू के ब्रांड पर ऐसे भ्रामक शब्द लिखे पाये गए.

- तम्बाकू सेवन को बढ़ावा देता हुआ संदेश: १० तम्बाकू ब्रांड पर ऐसा संदेश लिखा हुआ पाया गया जो तम्बाकू सेवन को बढ़ावा देता है.

- कोई भी चित्रमय चेतावनी नहीं: कई ऐसे तम्बाकू उत्पादन पाये गए जिनपर कोई भी चित्रमय चेतावनी नहीं प्रकाशित थी. ८ चबाने वाली तम्बाकू ब्रांड एवं ९ धुएँ वाले तम्बाकू उत्पादनों पर कोई भी चित्रमय चेतावनी नहीं थी.

- सही चित्रमय चेतावनी नहीं: ३ ब्रांड ऐसे पाये गए जिनपर सही चित्रमय चेतावनी जो सरकारी निर्देश में दी गई है, वो नहीं प्रकाशित है.

- भाषा: कुछ तम्बाकू उत्पादनों पर चित्रमय चेतावनी उस भाषा में नहीं है जिस भाषा में 'पाकिंग' पर ब्रांड का नाम छपा है.

"कुछ गुटखा कंपनियां चित्रमय चेतावनी जन हितैषी कानून को दरकिनार कर ४०% से काफी कम जगह चेतावनी को दे रही हैं, और ४०% जगह पर सफ़ेद रंग या 'बॉर्डर' बनाया जा रहा है. सरकार को चाहिए कि जन हितैषी कानून को सख्ती से लागू करे" कहना है बाबी रमाकांत का, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक द्वारा २००८ में पुरुस्कृत हुए थे और आशा परिवार से जुड़े हुए हैं।

यह एक षडयंत्र जैसा ही है कि चित्रमय चेतावनी निर्देश के जारी होने के इतने समय के बाद भी सभी तम्बाकू उत्पादनों पर चेतावनी नियमानुसार नहीं छप रही है और उद्योग इस जन हितैषी नीति को दरकिनार करने का हर सम्भव प्रयास कर रहा है. यह सभवत: ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकारी निर्देश में 'विक्रय' शब्द को बदल कर 'निर्मित/ आयात' शब्द छपा है जिससे तम्बाकू उद्योग को यह संदेश चला गया है कि इस निर्देश के प्रति हम संजीदा नहीं है, कहना है हे़लिस - सेखसरिया इन्सटीट्युत फॉर पब्लिक हे़ल्थ के निदेशक डॉ पी.सी.गुप्ता का.

No comments: