क्या आप जानते हैं कि महिलाओं को रोगाणुरोधी प्रतिरोध का अधिक है खतरा
पुरुष हो या महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति, यदि उसको दवा-प्रतिरोधक संक्रमण हो जाए तो सामान्य दवाएँ कार्य नहीं करेंगी। यह बात पशु या पौधों पर भी लागू होती है यदि उनको ऐसा संक्रमण हो जो दवा-प्रतिरोधक हो - सामान्य दवाएं कार्य नहीं करेंगी।
तमाम वादों के बावज़ूद हम जेंडर समानता पर क्यों पिछड़ रहे हैं?
[English] दुनिया की सभी सरकारों ने 2030 तक जेंडर समानता का वादा किया था (5वाँ सतत विकास लक्ष्य)। 2030 के इन वादों को पूरा करने के लिए सिर्फ़ 5 साल से कम समय शेष है परंतु सभी देश इन लक्ष्यों से बहुत दूर हैं।
हम इंसानियत के सबसे पुराने और सबसे बड़े अन्याय को खत्म करने में नाकाम क्यों हो रहे हैं?
[English] "महिला हिंसा, इंसानियत के सबसे पुराने और सबसे बड़े अन्याय में शामिल हैं पर उस पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास अत्यंत कम हुए हैं। कोई भी समाज खुद को सही, सुरक्षित या स्वस्थ नहीं कह सकता जब तक उसकी आधी आबादी डर में जी रही हो। इस हिंसा को खत्म करना सिर्फ़ नीति का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, बराबरी और मानवाधिकारों का मामला है।" - यह कहना है संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च स्वास्थ्य संस्था - विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अधनोम घेब्रेसस का।
90% देशों ने एएमआर योजना तो बनायी पर सिर्फ़ 11% ने उसे वित्तीय पोषण दिया
कल्पना कीजिए कि 97 साल पहले उन लोगों का क्या हाल होता होगा जो बैक्टीरिया से होने वाले रोगों से बीमार थे परंतु 1928 तक एंटीबायोटिक दवा का इजात ही नहीं हुआ था। एंटीबायोटिक की दवा आने के बाद अनेक जानलेवा और लाइलाज संक्रमणों का इलाज आसान हो गया। परंतु दवाओं के ग़ैर-जिम्मेदारी के साथ बढ़ते अनुचित और दुरुपयोग के कारण, रोग पैदा करने वाले जीवाणु, दवा प्रतिरोधक हो जाते हैं जिसे एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस या एएमआर कहते हैं। दवा प्रतिरोधकता के बाद दवाएं काम नहीं करती, रोग का इलाज मुश्किल हो जाता है (नई दवाएँ चाहिए जो अत्यंत सीमित हैं और महँगी हैं) और रोग लाइलाज तक हो सकता है।
अमरीका बनाम दुनिया: क्या स्वास्थ्य और जेंडर को राजनीतिक प्राथमिकता मिलेगी?
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पाद बनाने के सबसे बड़े वैश्विक उद्योग हैं अमरीकी

[English] सितंबर 22 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में, अमरीका ने दुनिया के अधिकांश देशों की आपसी सहमति से तैयार किया हुआ राजनीतिक घोषणापत्र को पारित करने से रोक दिया। सरकारों ने इस राजनीतिक घोषणापत्र के मसौदे को अनेक महीने के विमर्श के बाद सर्वसम्मति से तैयार किया था जिससे कि ग़ैर-संक्रामक रोगों के कारण होने वाले रोग और असामयिक मृत्यु दर पर रोक लग सके। अमरीका के इस नकारात्मक हस्तक्षेप के बाद यह संभव है कि जल्दी ही यह राजनीतिक घोषणापत्र का मसौदा, संयुक्त राष्ट्र में वोट के लिए जाये।
क्या स्वास्थ्य सेवाएं विकलांग लोगों के प्रति संवेदनशील हैं?
[English] जब तक रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य-संबंधित अन्य जानकारियां सांकेतिक भाषा और ब्रेल लिपि में नहीं होगी तब तक हम कैसे सुनिश्चित करेंगे कि जो लोग सामान्य रूप से देख-सुन नहीं सकते, वह भी जागरूक हों, रोग से बचें और ज़रूरत पड़ने पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवा से लाभान्वित हो सकें। जो लोग चलने में असमर्थ हैं उनके लिए पहियेदार कुर्सी (व्हीलचेयर) ज़रूरी है, स्वास्थ्य व्यवस्था में चढ़ने के लिए जीने की जगह (या जीने के साथ) रैंप या ढलान बनाना ज़रूरी है जिसपर पहिएदार कुर्सी सरलता और सुरक्षा के साथ आवागमन कर सके।
एचआईवी के नए संक्रमण दर में गिरावट क्यों थमी?
[English] 2023 और 2024 में वैश्विक स्तर पर एचआईवी से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या में और एड्स से मृत होने वाले लोगों की संख्या में कोई अंतर ही नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के साझा एड्स कार्यक्रम की नवीनतम रिपोर्ट (यूएन-एड्स ग्लोबल एड्स अपडेट 2025) के अनुसार, 2023 और 2024 में, हर साल, विश्व में 13 लाख लोग एचआईवी से नए संक्रमित हुए और 6.3 लाख मृत। ज़ाहिर है कि अधिकांश नए एचआईवी संक्रमण और एड्स मृत्यु वैश्विक दक्षिण देशों में हुईं है।
विकास के लिए वित्तपोषण पर वैश्विक बैठक नारीवादी एजेंडे पर विफल रही
[English] दुनिया की सभी सरकारें इस समय संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में स्वास्थ्य और जेंडर संबंधित सतत विकास लक्ष्यों पर हुई प्रगति का मूल्यांकन कर रही हैं। परंतु बिना पर्याप्त पूंजीनिवेश के, स्वास्थ्य और जेंडर लक्ष्यों पर कैसे खरा उतरा जाएगा? जुलाई 2025 के पहले सप्ताह में संपन्न हुई विकास के लिए वित्तपोषण पर वैश्विक बैठक भी स्वास्थ्य और नारीवादी एजेंडे पर पूर्णत: विफल रही है।
लैंगिक समानता और मानवाधिकार अविभाज्य, आधारभूत और बिना शर्त हैं
[English] लैंगिक समानता और मानवाधिकार अविभाज्य, आधारभूत और बिना शर्त हैं, यह कहना है संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य अधिकार पर विशेष प्रतिवेदक, डॉ त्लालेंग मोफ़ोकेंग का। यदि सतत विकास लक्ष्यों पर सबके लिए खरा उतरना है तो हमें सभी लक्ष्यों पर खरा उतरना होगा। यदि सरकारें चंद लक्ष्यों की ओर कार्य करेंगी और बाक़ी को नज़रअंदाज़ करेंगी, तो हम सभी लक्ष्यों पर असफल होंगे क्योंकि सतत विकास लक्ष्य तो एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
बच्चों को नशीले उत्पादन बेचने की गहरी साजिश
[English] जो उद्योग बच्चों को मुनाफा कमाने के लिए नशीले उत्पादनों की लत लगवा रहे हैं, वे सब एक सी ही धूर्त चालें और भ्रामक कूटनीति अपनाते हैं। इन उत्पादनों में शामिल हैं: तंबाकू और निकोटीन, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड (अति-प्रसंस्कृत) खाद्य उत्पाद, और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ।
युद्ध और अन्य आपदाओं का जेंडर समानता और स्वास्थ्य अधिकार पर क़हर
[English] महिलाओं के लिए पहले से ही अनेक असमानताएं मौजूद हैं जिन्हें युद्ध और मानवीय संकट और भी बढ़ा देते हैं, जिससे महिला हिंसा, प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियाँ बढ़ जाती हैं और साथ ही स्वास्थ्य देखभाल और आजीविका जैसी बुनियादी ज़रूरतें पहुँच से बाहर हो जाती हैं।
जब इन 3 संक्रमणों से बचाव मुमकिन है तो क्यों बच्चे इनसे संक्रमित जन्में?
[English] जब एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और सिफ़िलिस संक्रमणों से बचाव मुमकिन है तो कोई भी बच्चा क्यों इनसे संक्रमित जन्में? सरकारों ने भी वायदा किया है कि 2030 तक एक भी बच्चा गर्भावस्था और जन्म के समय इनसे संक्रमित नहीं होगा। इस दिशा में कार्य तो हुआ है परंतु इस संदर्भ में अभी भी स्वास्थ्य सेवा अनेक देशों में असंतोषजनक है।
मानवाधिकारों से अलग नहीं हैं सुरक्षित गर्भपात
[English] सुरक्षित गर्भपात एक मानव अधिकार है। अनेक ऐसे वैश्विक समझौते या संधि हैं (जैसे कि CEDAW 1979, जो कानूनी रूप से बाध्य संधि है), जहाँ हमारी सरकारों ने गर्भपात अधिकार को सम्मान देते हुए प्रजनन और यौनिक स्वास्थ्य के अनेक वायदे किए हैं। परंतु, पितृसत्ता के चलते अनेक महिलाएं, सुरक्षित गर्भपात सेवाओं से वंचित रह जाती हैं। कुछ देशों में जहाँ गर्भपात ग़ैर-कानूनी है वहाँ महिलाएं कानूनी उत्पीड़न का खतरा उठा कर असुरक्षित गर्भपात की ओर बढ़ने को मजबूर होती हैं।
घटिया और नकली दवाएं दे रहीं हैं जन स्वास्थ्य को बड़ी चुनौती
[English] 2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसके अनुसार विकासशील देशों में कम-से-कम 10% दवाएं, घटिया या नक़ली थीं। इस रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा था कि ये आंकड़े बहुत कम रिपोर्ट हो सके हैं जब कि संभवत: यह समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है।
क्या सरकारें बीजिंग+30 बैठक में जेंडर समानता पर ठोस कदम उठायेंगी?
[English] जेंडर समानता और मानवाधिकारों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि और कई अन्य घोषणाओं, समझौतों और वायदों के बावजूद, सरकारें अपने वायदे पूरे करने में विफल रही हैं। जेंडर असमानता प्राकृतिक आपदाओं के कारण नहीं बल्कि गहरी पैठ वाली पितृसत्ता के कारण होती है, जिसका पूंजीवाद, निजीकरण, धार्मिक कट्टरवाद और सैन्यीकरण के साथ भयावह संबंध है।
बिना शोषण और भेदभाव समाप्त किए 2027 तक कुष्ठ रोग उन्मूलन कैसे होगा?
[English] जो बैक्टीरिया कुष्ठ रोग (लेप्रोसी या हैंसेंस रोग) उत्पन्न करता है उसका तो पक्का इलाज है परंतु जो समाज में कुष्ठ रोग संबंधित शोषण और भेदभाव व्याप्त है, वह तो मानव-जनित है - उसका निवारण कैसे होगा? कुष्ठ रोग का सफलतापूर्वक इलाज करवा चुकीं माया रनवाड़े बताती हैं कि यदि कुष्ठ रोग की जल्दी जाँच हो, सही इलाज बिना-विलंब मिले, तो शारीरिक विकृति भी नहीं होती और सही इलाज शुरू होने के 72 घंटे बाद से रोग फैलना भी बंद हो जाता है। फिर शोषण और भेदभाव क्यों?
सह-संक्रमण और रोग के खतरे पलट सकते हैं एड्स नियंत्रण अभियान की प्रगति
विश्व में 86% एचआईवी के साथ जीवित लोगों को अपने एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी थी, उनमें से 89%लोग जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं ले रहे थे और इनमें से 93% लोगों का वायरल लोड नगण्य था (यानी कि वह स्वस्थ थे और उनसे वायरस फैलने का खतरा भी शून्य था)। पर यदि हम एचआईवी से संबंधित संक्रमण और रोग (या अन्य रोग जो समाज में हैं) पर ध्यान नहीं देंगे तो एड्स नियंत्रण अभियान में प्रगति पलट सकती है, यह कहना है डॉ ईश्वर गिलाडा का, जो एचआईवी चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान से जुड़े भारतीय विशेषज्ञों के सबसे देश व्यापी संगठन, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई), के एमेरिटस अध्यक्ष हैं।
गुजरात में पहली बार हो रहा है एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों का राष्ट्रीय अधिवेशन ASICON 2025
ASICON 2025 का उद्घाटन गुजरात के मुख्य मंत्री ने किया

गुजरात के मुख्य मंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने आज, देश के एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों के 16वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन (ASICON 2025) का उद्घाटन किया। ASICON 2025 अधिवेशन इस साल अहमदाबाद, गुजरात, में 21-23 फ़रवरी के दौरान आयोजित हो रहा है। यह पहली बार है कि यह प्रतिष्ठित अधिवेशन गुजरात में आयोजित हो रहा है। एचआईवी चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान से जुड़े भारतीय विशेषज्ञों का सबसे प्रमुख चिकित्सकीय संगठन, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई) इस अधिवेशन को आयोजित कर रहा है।
2030 तक एड्स उन्मूलन के लिए सभी लोगों तक एचआईवी सेवाओं का पहुंचना है ज़रूरी
[English] एचआईवी संक्रमण से बचाव के अनेक प्रमाणित साधन उपलब्ध हैं और एचआईवी पॉजिटिव लोगों के लिए जीवनरक्षक दवाएं सरकारी सेवाओं में उपलब्ध हैं। यदि सभी एचआईवी के साथ जीवित लोगों को यह दवाएं मिलें, और उनका वायरल लोड नगण्य रहे, तो न केवल वह पूर्णत: स्वस्थ रहेंगे बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एचआईवी संक्रमण फैलना का खतरा भी शून्य रहेगा ("जीरो रिस्क")। तो फिर क्यों विश्व में 2023 में 6.3 लाख नए लोग एचआईवी से संक्रमित पाये गए और 13 लाख लोग एड्स-संबंधित कारणों से मृत हुए?
विकास वित्तपोषण का गहराता संकट
[English] अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने जो निर्णय लिए हैं उनका सीधा असर विकासशील देशों में विकास वित्तपोषण (डेवलपमेंट फ़ाइनेंसिंग) पर पड़ा है। उदाहरण के लिए, अमरीकी सरकार की दाता एजेंसी (यूएसएआईडी) के फ़िलहाल बंद हो जाने से अनेक अफ्रीकी देशों में एचआईवी के साथ जीवित लोग जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएँ लेने में असमर्थ हो सकते हैं। दक्षिण एशिया के देशों में 16 लाख परिवार मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य सेवा से वंचित हो सकते हैं। अमरीका ने जिस तरह से विकास वित्तपोषण को एक झटके में खंडित किया है, उसकी निंदा तो होनी चाहिए, परंतु जो देश अमरीकी अनुदान से विकास वित्तपोषण कर रहे थे, उनको भी विवेचना करनी होगी कि विकास का वित्तपोषण किसकी मूल जिम्मेदारी है और लोगों की प्राथमिकता क्या है? और वे 'विकास' की आड़ में किन शर्तों पर अनुदान और अमीर देशों के बैंक से क़र्ज़ ले रहे थे?
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