मेडिकल छात्रों में बढ़ता हुआ तम्बाकू सेवन

मेडिकल छात्रों में बढ़ता हुआ तम्बाकू सेवन

तम्बाकू सेवन मत करोकह देने से ही तम्बाकू नही छूट जाती है. अनेकों स्वास्थ्यकर्ता जिनमे डाक्टर एवं मेडिकल छात्र शामिल हैं, तम्बाकू का सेवन करते हैं. चौकाने वाली बात ये है कि तम्बाकू-जनित कुप्रभावों के रोगी को तम्बाकू छोड़ने का परामर्श देते हुए ये डाक्टर स्वयं तम्बाकू का धड़ल्ले से सेवन करते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय विश्व-जन-स्वास्थ्य प्रोफेशनल छात्रों के सर्वे से इस बात की पुष्टि होती है.

इस सर्वे में भारत के १५ मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने भाग लिया था. बाकि समाज से अधिक तम्बाकू सेवन का दर मेडिकल छात्रों में निकल के आया है.

इस रिपोर्ट से ये भी स्पष्ट होता है कि अस्पताल परिसर में तम्बाकू-धूम्रपान पर रोक लगाने वाले अधिनियमों का सख्ती से अनुपालन नही होता है. इस रिपोर्ट से ये भी स्पष्ट है कि तम्बाकू नशा उन्मूलन के कार्यक्रम निष्फल से हो रहे हैं और तम्बाकू छुड़वाने में कारगर नही है.

लगभग आधे मेडिकल छात्रों ने ये कहा कि सुबह उठने के ३० मिनट के अन्दर ही तम्बाकू सेवन करने की तलब होती है.

४२ प्रतिशत छात्रों ने ये कहा कि वो घर पर परोक्ष धूम्रपान झेलते हैं और ७३ प्रतिशत छात्रों ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर तम्बाकू सेवन को परोक्ष रूप से झेलना पड़ता है.

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